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चीनी मीडिया ने की PM मोदी की तारीफ, जिनपिंग का 7 साल बाद भारत दौरा

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चीनी मीडिया ने की PM मोदी की तारीफ, जिनपिंग का 7 साल बाद भारत दौरा
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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे भारत की राजधानी दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए है। यह पिछले सात सालों में उनका पहला भारत दौरा है, जो भारत-चीन संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं चीनी राष्ट्रपति को इस सम्मेलन में आमंत्रित किया था। इस दौरे से दुनिया की निगाहें भारत और चीन पर टिक गई हैं, और खास बात यह है कि चीनी मीडिया ने भी इस पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की है, इसे दोनों एशियाई ताकतों के बीच रिश्तों को सुधारने का एक बड़ा अवसर बताया जा रहा है।

चीनी मीडिया की सराहना और रिश्तों में सुधार की उम्मीद

शी जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि के बाद, चीनी मीडिया ने इस घटनाक्रम को बेहद सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। चीनी सरकार के मुखपत्र माने जाने वाले अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय और चीनी विशेषज्ञों के हवाले से इस दौरे को दोनों देशों के बीच रिश्तों को सुधारने का एक बड़ा और अहम मौका बताया है। अखबार ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस कूटनीतिक पहल की सराहना की है, जिसके तहत उन्होंने स्वयं जिनपिंग को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया था। यह निमंत्रण स्वीकार करना और जिनपिंग का भारत आना, दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में भी इस यात्रा को एक बड़े स्तर की कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर दोनों एशियाई ताकतों के आपसी रिश्तों को स्थिर करने की कोशिशों पर पड़ेगा। सिंघुआ यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ छ्यान फंग ने कहा कि भारत इस मुलाकात को रिश्तों को बेहतर बनाने का बहुत अच्छा मौका मानता हैसात साल बाद जिनपिंग का भारत आना अपने आप में एक प्रतीकात्मक महत्व रखता है

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और वैश्विक महत्व

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन दिल्ली में हो रहा है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता एक साथ आ रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन का वैश्विक भू-राजनीति और अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है। शी जिनपिंग की उपस्थिति इस सम्मेलन को और भी महत्वपूर्ण बना देती है, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय संबंध कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ब्रिक्स मंच इन देशों को व्यापार, निवेश, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक शासन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहयोग करने का अवसर प्रदान करता है। ग्लोबल टाइम्स ने अपने ट्वीट में भी इस बात पर जोर दिया है कि जिनपिंग की यह यात्रा चीन-भारत संबंधों को और बेहतर बनाने और 'ग्लोबल साउथ' सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। भारत और चीन, दोनों ही 'ग्लोबल साउथ' के प्रमुख सदस्य हैं, और उनके बीच का सहयोग इन देशों की सामूहिक शक्ति को बढ़ा सकता है। इस सम्मेलन में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

द्विपक्षीय वार्ता की संभावना और भविष्य की राह

शी जिनपिंग के भारत दौरे के दौरान, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति के बीच कोई द्विपक्षीय बैठक होगी। सिंघुआ यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ छ्यान फंग ने भी ऐसी द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद जताई है। यदि यह बैठक होती है, तो यह दोनों नेताओं को सीधे तौर पर सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगा, जो पिछले कुछ समय से दोनों देशों के संबंधों में खटास पैदा कर रहे हैं। यह बैठक एक महत्वपूर्ण मंच बन सकती है जहां दोनों नेता विश्वास बहाली के उपायों पर चर्चा कर सकते हैं और भविष्य के सहयोग के लिए एक रोडमैप तैयार कर सकते हैं। चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, जैसे सीमा विवाद। इस दौरे से यह उम्मीद की जा रही है कि दोनों नेता एक-दूसरे के प्रति समझ और सम्मान की भावना को बढ़ावा देंगे, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता की नींव रखी जा सके। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर होने वाली संभावित द्विपक्षीय बैठकें क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होंगी।

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