गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से बढ़ेगा मेडिकल टूरिज्म: पीयूष गोयल का 1 करोड़ पर्यटकों का लक्ष्य
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केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में भारत में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने देश को प्रति वर्ष 1 करोड़ मेडिकल पर्यटकों को आकर्षित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके। गोयल ने यह बात एक विशेष स्वास्थ्य सेवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही, जिसमें उन्होंने भारत की चिकित्सा विशेषज्ञता और लागत-प्रभावशीलता का लाभ उठाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि इसे वैश्विक स्वास्थ्य सेवा का केंद्र बनाया जा सके।
भारत की मेडिकल टूरिज्म क्षमता
भारत लंबे समय से अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब यह विश्वस्तरीय चिकित्सा उपचार के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में भी उभर रहा है। पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में अत्यधिक कुशल डॉक्टर, अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और विभिन्न प्रकार के उपचार विकल्प उपलब्ध हैं, जो इसे मेडिकल टूरिज्म के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में चिकित्सा उपचार की लागत पश्चिमी देशों की तुलना में काफी कम है, जिससे यह उन मरीजों के लिए एक किफायती विकल्प बन जाता है जो गुणवत्ता से समझौता किए बिना उपचार चाहते हैं। वर्तमान में, भारत सालाना लगभग 6 से 7 लाख मेडिकल पर्यटकों को आकर्षित करता है, लेकिन गोयल का मानना है कि इस संख्या को कई गुना बढ़ाया जा सकता है यदि सही रणनीतियों और नीतियों को लागू किया जाए। उन्होंने आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणालियों को भी बढ़ावा देने का सुझाव दिया, जो समग्र स्वास्थ्य और कल्याण की तलाश करने वाले पर्यटकों को आकर्षित कर सकती हैं। भारत की इस अद्वितीय पेशकश से अंतर्राष्ट्रीय रोगियों के लिए व्यापक स्वास्थ्य समाधान उपलब्ध होंगे।
गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे का उन्नयन
पीयूष गोयल ने अपने संबोधन में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल अत्याधुनिक अस्पताल और कुशल डॉक्टर होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीजों को विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसमें स्वच्छता, रोगी सुरक्षा, व्यक्तिगत देखभाल और पारदर्शी बिलिंग जैसे पहलू शामिल हैं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के उन्नयन की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें अस्पतालों में नवीनतम तकनीक का समावेश, चिकित्सा उपकरणों का आधुनिकीकरण और प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता शामिल है। गोयल ने सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग का भी आह्वान किया ताकि स्वास्थ्य सेवा मानकों को ऊंचा उठाया जा सके और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त की जा सके। उन्होंने डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों को अपनाने का भी सुझाव दिया, जैसे कि टेलीमेडिसिन और ऑनलाइन परामर्श, जो दूर-दराज के क्षेत्रों से भी मरीजों तक पहुंच प्रदान कर सकते हैं और अंतर्राष्ट्रीय मरीजों के लिए पूर्व-परामर्श और अनुवर्ती देखभाल को आसान बना सकते हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि भारत न केवल सस्ता बल्कि सबसे अच्छा उपचार प्रदान करे, जिससे वैश्विक मंच पर इसकी विश्वसनीयता बढ़ेगी।
आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में योगदान
मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देना केवल स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। पीयूष गोयल ने बताया कि मेडिकल टूरिज्म से विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ता है, जो राष्ट्रीय आय में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसके अलावा, यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के लाखों अवसर पैदा करता है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों, क्लिनिकों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य चिकित्सा पेशेवरों की आवश्यकता बढ़ेगी। साथ ही, होटल, परिवहन, खाद्य सेवा, अनुवाद सेवाएं और अन्य सहायक उद्योगों में भी रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जो मेडिकल पर्यटकों की बढ़ती संख्या को पूरा करने के लिए आवश्यक होंगे। गोयल ने भारत को चिकित्सा उपकरणों और फार्मास्यूटिकल्स के निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की भी बात की, जो 'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप होगा और मेडिकल टूरिज्म के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगा। उन्होंने संबंधित मंत्रालयों और हितधारकों से एक एकीकृत रणनीति विकसित करने का आग्रह किया ताकि इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का उपयोग किया जा सके और भारत को वैश्विक स्वास्थ्य सेवा मानचित्र पर एक अग्रणी स्थान दिलाया जा सके।