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योगी सरकार का आंगनबाड़ी कर्मियों को तोहफा: मानदेय में 50% वृद्धि

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योगी सरकार का आंगनबाड़ी कर्मियों को तोहफा: मानदेय में 50% वृद्धि
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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की लाखों आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और आंगनबाड़ी सहायिकाओं के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने इन सभी कर्मियों के मानदेय में 50 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि की घोषणा की है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आने और उनके अथक परिश्रम को उचित सम्मान मिलने की उम्मीद है। यह फैसला राज्य भर में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य, पोषण और बाल विकास सेवाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली इन महिला कर्मियों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस निर्णय से न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी, बल्कि समाज में उनके योगदान को भी एक नई पहचान मिलेगी।

ऐतिहासिक फैसला और लाभार्थियों का विवरण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले ने राज्य की लगभग 4 लाख से अधिक आंगनबाड़ी कर्मियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का मार्ग प्रशस्त किया है। इस वृद्धि के बाद, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मासिक मानदेय 5,500 रुपये से बढ़कर लगभग 8,250 रुपये हो गया है। इसी तरह, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय 4,250 रुपये से बढ़कर लगभग 6,375 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि आंगनबाड़ी सहायिकाओं को अब 2,750 रुपये के बजाय लगभग 4,125 रुपये का मानदेय प्राप्त होगा। यह बढ़ोतरी इन कर्मियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है और उनके समर्पण और कड़ी मेहनत को मान्यता देती है। सरकार का यह कदम दर्शाता है कि वह समाज के सबसे कमजोर वर्गों की सेवा में लगी महिला शक्ति के प्रति कितनी संवेदनशील और प्रतिबद्ध है। इस आर्थिक संबल से इन परिवारों को अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने में मदद मिलेगी।

सरकार की प्रतिबद्धता और सेवाओं का महत्व

उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय आंगनबाड़ी कर्मियों के प्रति उसकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बाल विकास, पोषण, स्वास्थ्य और प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में रीढ़ की हड्डी के रूप में काम करती हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर लागू करती हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी इन कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर घर-घर जाकर जागरूकता फैलाने, राशन वितरित करने और स्वास्थ्य सर्वेक्षण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सरकार ने इन सेवाओं के महत्व को समझते हुए उनके मानदेय में वृद्धि का यह फैसला लिया है, ताकि वे और अधिक उत्साह और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, क्योंकि यह लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का अवसर प्रदान करता है।

भविष्य की उम्मीदें और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

मानदेय में 50 प्रतिशत की वृद्धि से आंगनबाड़ी कर्मियों के सामाजिक-आर्थिक स्तर पर दूरगामी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। बेहतर आय से उनके परिवार की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, जिससे वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करा सकेंगी। यह वृद्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक खुशहाली में योगदान देगी, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रदान की जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगी। अधिक प्रेरित और आर्थिक रूप से सुरक्षित कार्यबल से बच्चों के पोषण स्तर, स्वास्थ्य मानकों और प्रारंभिक शिक्षा परिणामों में भी सुधार देखने को मिल सकता है। सरकार के इस कदम से अन्य राज्यों को भी अपने आंगनबाड़ी कर्मियों के मानदेय में वृद्धि करने की प्रेरणा मिल सकती है, जिससे देशभर में जमीनी स्तर के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की स्थिति में सुधार आएगा। यह निर्णय राज्य के समग्र मानव विकास सूचकांक को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होगा और एक स्वस्थ व शिक्षित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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