स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026: लखनऊ शीर्ष पर, सूरत पाँचवें स्थान पर फिसला
इस खबर की वेब स्टोरी देखें
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस 2026’ समारोह के दौरान, 08 सितंबर 2026 को 5वें ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026’ के राष्ट्रीय परिणामों की घोषणा की गई। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश की मेगा सिटीज (कैटेगरी-1) में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के प्रयासों का मूल्यांकन करना था। इस वर्ष उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने 200 में से 198 अंक प्राप्त कर देश में पहला स्थान हासिल किया, जबकि मध्य प्रदेश का इंदौर 197 अंकों के साथ दूसरे और जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। वहीं, पिछले दो वर्षों से टॉप-3 में शामिल गुजरात का प्रमुख व्यापारिक केंद्र सूरत इस बार 191 अंकों के साथ फिसलकर 5वें स्थान पर पहुँच गया, जो शहर के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
लखनऊ ने मारी बाजी, इंदौर और जबलपुर ने भी दिखाया दम
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में 198 अंक प्राप्त कर देश भर में पहला स्थान हासिल कर अपनी वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रतिबद्धता को साबित किया है। यह उपलब्धि शहर के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो दर्शाता है कि स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से वायु प्रदूषण पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाया जा सकता है। लखनऊ की इस सफलता का श्रेय हरित क्षेत्रों के विस्तार, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण जैसे कारकों को दिया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के शहर भी इस प्रतिस्पर्धा में पीछे नहीं रहे। इंदौर, जो अपनी स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध है, 197 अंकों के साथ बेहद सूक्ष्म अंतर से दूसरे स्थान पर रहा। इंदौर ने अपने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वायु गुणवत्ता सुधार पहलों के माध्यम से यह स्थान बरकरार रखा है। वहीं, जबलपुर ने 195 अंकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त कर सभी को चौंका दिया। यह तीनों शहर देश के अन्य महानगरों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गए हैं, जो दिखा रहे हैं कि सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।
सूरत का टॉप-3 से बाहर होना: प्रमुख कारण और चुनौतियाँ
गुजरात के लिए, इस सर्वेक्षण के परिणाम मिश्रित रहे। जहाँ राज्य के भीतर सूरत महानगर पालिका ने अपना वर्चस्व बरकरार रखा है, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर शहर को बड़ा झटका लगा है। लगातार पिछले वर्षों (2024 और 2025) में 196 स्कोर के साथ देश के टॉप-3 में शामिल रहने वाला सूरत इस बार 191 अंकों के साथ फिसलकर 5वें स्थान पर पहुँच गया है। यह गिरावट शहर के लिए चिंता का विषय है और तत्काल ध्यान देने की मांग करती है।
सूरत के पिछड़ने के दो प्रमुख कारण सामने आए हैं। पहला कारण शहर में बड़े पैमाने पर चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स हैं। मेट्रो रेल निर्माण, फ्लाईओवर और अन्य सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण हवा में निर्माण कार्य से उत्पन्न धूल कणों (PM10) का स्तर काफी अधिक पाया गया। इन परियोजनाओं से होने वाला प्रदूषण अस्थायी हो सकता है, लेकिन उचित शमन उपायों के अभाव में इसके दीर्घकालिक प्रभाव गंभीर हो सकते हैं। दूसरा प्रमुख कारण वाहनों का बढ़ता दबाव है। निजी वाहनों की संख्या में हुई अप्रत्याशित वृद्धि और पीक आवर्स के दौरान शहर के मुख्य मार्गों पर भारी यातायात जाम ने वायु गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। शहर को अब सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने और वैकल्पिक, पर्यावरण-अनुकूल परिवहन साधनों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी चुनौतियों से बचा जा सके और विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
अन्य प्रमुख शहरों का प्रदर्शन और समग्र परिदृश्य
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले अन्य शहरों का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा। भोपाल और आगरा संयुक्त रूप से 192 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहे। रायपुर ने 189 अंकों के साथ छठा स्थान प्राप्त किया, जबकि राजकोट, ठाणे और चंडीगढ़ संयुक्त रूप से 187 अंकों के साथ सातवें पायदान पर रहे। अहमदाबाद और विजयवाड़ा भी 186 अंकों के साथ संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर रहे। गाजियाबाद और नवी मुंबई ने 184 अंकों के साथ नौवां स्थान हासिल किया, और नागपुर 183.8 अंकों के साथ दसवें स्थान पर रहा। वडोदरा 179 अंकों के साथ 15वें स्थान पर रहा।
यह वार्षिक सर्वेक्षण भारतीय शहरों को अपनी वायु गुणवत्ता प्रबंधन रणनीतियों की प्रभावशीलता का आकलन करने और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करता है। समग्र रूप से, परिणाम बताते हैं कि जहाँ कुछ शहरों ने सराहनीय प्रगति की है, वहीं कई अन्य शहरों को अभी भी वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण, वाहन प्रदूषण में कमी, निर्माण स्थलों पर धूल प्रबंधन और हरित आवरण बढ़ाना शामिल है। यह पहल देश में स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
और पढ़ें
- मध्य प्रदेश न्यूज़
- ताज़ा खबरें
- मध्य प्रदेश बना निवेश का नया ग्लोबल हब: CM यादव ने दुबई में बताया अनुकूल वातावरण
- दुबई एक्सपो में मध्य प्रदेश के 6 विरासत उत्पादों की धूम, 7 दिन का प्रदर्शन
- पांढुर्णा गोटमार मेला: 11 सितंबर को जाम नदी किनारे पत्थरों का खेल
- इंदौर की छात्रा श्रेया ने लिखी पर्यावरण पर किताब, कविता संग्रह को सम्मान