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ओडिशा-आंध्र में भारी बारिश: 10,000 विस्थापित, स्कूल बंद, मंत्री सक्रिय

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ओडिशा-आंध्र में भारी बारिश: 10,000 विस्थापित, स्कूल बंद, मंत्री सक्रिय
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ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय तथा आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। बंगाल की खाड़ी में बने एक गहरे दबाव के चलते हुई इस बारिश के कारण दोनों राज्यों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। गुरुवार को आंध्र प्रदेश के पड़ोसी तट पर गहरे दबाव के पहुंचने के बाद से ही बारिश का कहर जारी है, जिसके परिणामस्वरूप निचले इलाकों और भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों से 10,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। कई जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं, सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं और कृषि फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। राज्य सरकारों ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में तेजी लाने और स्थिति का जायजा लेने के लिए मंत्रियों को भेजा है।

ओडिशा में मूसलाधार बारिश और जनजीवन पर असर

ओडिशा में गहरे दबाव के प्रभाव से कई स्थानों पर 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे राज्य में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, राज्य में भूस्खलन, जलभराव, पेड़ों का उखड़ना और घरों को नुकसान जैसी कई घटनाएं सामने आई हैं। सड़कों पर पानी भरने से कई क्षेत्रों में संचार व्यवस्था बाधित हो गई है। दक्षिणी और पश्चिमी ओडिशा के निचले और भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 10,000 लोगों को 200 राहत केंद्रों में स्थानांतरित किया गया है। भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे प्रशासन को स्कूलों को बंद करने का आदेश देना पड़ा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने तटीय क्षेत्रों में 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना जताई है और चार ओडिशा जिलों के लिए रेड वार्निंग अलर्ट जारी किया है। पुरी जैसे तटीय शहरों में तेज हवाओं और ऊंची लहरों का मंजर देखा जा रहा है।

आंध्र प्रदेश में बाढ़ और कृषि पर गंभीर प्रभाव

बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के कलिंगापटनम के पास तट से टकराया, जिसके बाद पिछले तीन दिनों से राज्य में व्यापक वर्षा हो रही है। उत्तरी आंध्र प्रदेश के जिलों, विशेषकर विजयनगरम, श्रीकाकुलम और पार्वतीपुरम मन्यम में भी बाढ़ का प्रकोप देखा जा रहा है। नागावली नदी में उफान आने से स्थिति और गंभीर हो गई है, और दोपहर तक इसमें 60,000 क्यूसेक पानी होने की उम्मीद है। नदियों और मौसमी धाराओं में अचानक आई बाढ़ के कारण सड़कें कट गई हैं और कृषि फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, राजम और आसपास के क्षेत्रों में 10,000 एकड़ से अधिक फसलें बर्बाद हो गई हैं। केले और सब्जियों की फसलें इन तीन जिलों में सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। विजयनगरम के कलेक्टर एस रामसुंदर रेड्डी ने नागावली में बाढ़ की स्थिति की लगातार निगरानी की है। राज्य सरकार ने स्थिति सामान्य होने के बाद फसलों के नुकसान का आकलन करने की बात कही है।

मौसम विभाग की चेतावनी और सरकारी राहत कार्य

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार (सितंबर 25, 2026) सुबह तक तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं और खराब मौसम की चेतावनी जारी की है, और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। यह चेतावनी सितंबर 25, 2026 को दोपहर 12:30 बजे तक प्रभावी है। ओडिशा और आंध्र प्रदेश दोनों राज्य सरकारों ने स्थिति से निपटने के लिए त्वरित कदम उठाए हैं। ओडिशा में मंत्रियों को प्रभावित जिलों में भेजा गया है ताकि वे जमीनी स्तर पर राहत और बचाव कार्यों की देखरेख कर सकें। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए 200 से अधिक राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां उन्हें भोजन और आश्रय प्रदान किया जा रहा है। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। आपदा प्रबंधन टीमें सक्रिय रूप से काम कर रही हैं ताकि जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके और प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता पहुंचाई जा सके। आने वाले दिनों में स्थिति का और विस्तृत आकलन किया जाएगा ताकि पुनर्वास और क्षतिपूर्ति के कदम उठाए जा सकें।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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