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पीएम मोदी के सामने 'हनुमान अंश' डायरेक्टर ने गाया 'सीता राम' भजन, तालियों से गूंजा माहौल

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पीएम मोदी के सामने 'हनुमान अंश' डायरेक्टर ने गाया 'सीता राम' भजन, तालियों से गूंजा माहौल
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हाल ही में दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 'भारतीय संस्कृति एवं कला महोत्सव' के एक भव्य सांस्कृतिक समारोह के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में, प्रसिद्ध फिल्म 'हनुमान अंश' के निर्देशक श्री अविनाश कुमार ने एक अत्यंत भावपूर्ण 'सीता राम' भजन प्रस्तुत किया। उनकी मधुर और भक्तिमय प्रस्तुति ने पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया, और स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। यह क्षण कला, आध्यात्मिकता और राष्ट्रीय नेतृत्व के संगम का एक अद्भुत प्रतीक बन गया, जिसका उद्देश्य देश में सांस्कृतिक पुनरुत्थान को बढ़ावा देना और युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत से जोड़ना था। इस कार्यक्रम ने भारतीय कला और संस्कृति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।

भक्तिमय प्रस्तुति और प्रधानमंत्री का उत्साहवर्धन

श्री अविनाश कुमार ने अपनी ओजस्वी आवाज और गहरी भक्ति के साथ 'सीता राम' भजन का गायन शुरू किया। उनकी प्रस्तुति में केवल स्वर का जादू ही नहीं था, बल्कि हर शब्द और धुन में भगवान राम और देवी सीता के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा स्पष्ट झलक रही थी। सभागार में मौजूद सैकड़ों दर्शक, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल थीं, उनकी प्रस्तुति से गहरे प्रभावित हुए। भजन की धुन जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पूरा वातावरण भक्ति और शांति से भर गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो पहली पंक्ति में बैठे थे, ने पूरी तल्लीनता से भजन सुना। उनके चेहरे पर संतोष और गर्व के भाव स्पष्ट रूप से देखे जा सकते थे। भजन के समापन पर, पीएम मोदी ने स्वयं खड़े होकर जोरदार तालियां बजाईं, जिससे अन्य दर्शकों को भी प्रेरणा मिली और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह क्षण कलाकार के लिए किसी बड़े सम्मान से कम नहीं था और इसने उनकी प्रतिभा को एक राष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया।

'भारतीय संस्कृति एवं कला महोत्सव' का महत्व

'भारतीय संस्कृति एवं कला महोत्सव' का आयोजन देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर लाने और उसे बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। इस महोत्सव में संगीत, नृत्य, नाटक, चित्रकला और साहित्य सहित विभिन्न कला रूपों का प्रदर्शन किया गया। इसका प्रमुख लक्ष्य युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करना और उन्हें भारतीय कला परंपराओं से जोड़ना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में अक्सर 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की अवधारणा पर जोर दिया है, और यह महोत्सव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। इस कार्यक्रम ने विभिन्न राज्यों की कलाओं और कलाकारों को एक साथ लाकर सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का प्रयास किया। महोत्सव में देशभर से आए 500 से अधिक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं, जिनमें श्री अविनाश कुमार की 'सीता राम' भजन प्रस्तुति एक विशेष आकर्षण रही। सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल कला और संस्कृति को जीवंत रखते हैं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और पहचान को भी सुदृढ़ करते हैं।

'सीता राम' भजन का आध्यात्मिक और सामाजिक प्रभाव

'सीता राम' भजन भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का एक अभिन्न अंग है। यह भजन भगवान राम और देवी सीता के पवित्र संबंधों, उनके त्याग, प्रेम और धर्मपरायणता का प्रतीक है। श्री अविनाश कुमार द्वारा प्रस्तुत इस भजन ने दर्शकों को न केवल एक संगीतमय अनुभव दिया, बल्कि उन्हें आध्यात्मिक शांति और आंतरिक संतोष का भी अनुभव कराया। भजन के बोलों में निहित संदेश, जो धर्म, कर्तव्य और मानवता के मूल्यों पर आधारित है, ने उपस्थित जनसमूह को गहरे स्तर पर छुआ। भारतीय परंपरा में भजन केवल गायन का एक रूप नहीं है, बल्कि यह ईश्वर से जुड़ने और मन को शुद्ध करने का एक माध्यम भी है। इस प्रस्तुति ने यह भी दर्शाया कि कैसे कला और आध्यात्मिकता मिलकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और लोगों को एक साथ जोड़ सकते हैं। ऐसे समय में जब समाज विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है, भक्ति संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों को भावनात्मक रूप से एकजुट करने और उनमें आशा का संचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में एक कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने भारतीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण तथा संवर्धन को हमेशा प्राथमिकता दी है। 'हनुमान अंश' जैसी फिल्में और श्री अविनाश कुमार जैसे कलाकारों की प्रस्तुतियां, जो हमारी पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित हैं, इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। यह सांस्कृतिक महोत्सव और ऐसी भक्तिमय प्रस्तुतियां यह संकेत देती हैं कि भारत अपनी जड़ों से जुड़कर भविष्य की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री का तालियां बजाना केवल एक कलाकार का सम्मान नहीं था, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति उनके गहरे सम्मान और उसे बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। ऐसे आयोजनों से न केवल कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि युवा पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति पर गर्व करने और उसे आगे ले जाने की प्रेरणा मिलती है। यह एक ऐसा प्रयास है जो भारत को विश्व पटल पर एक सांस्कृतिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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