दिल्ली में 'फील्स लाइक' 50°C पार: IMD ने बताई जानलेवा गर्मी की वजह
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में गर्मी ने एक नया और अधिक खतरनाक रूप ले लिया है, जहाँ अब अधिकतम तापमान के बजाय 'फील्स लाइक' तापमान (हीट इंडेक्स) लोगों के लिए असली खतरे का पैमाना बन गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जून 2026 के अंतिम दिनों में यह स्थिति देखी जा रही है, जब हवा में बढ़ती आर्द्रता वास्तविक तापमान से कहीं अधिक असहनीय और जानलेवा गर्मी का एहसास करा रही है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो, 5 जुलाई 2025 को दिल्ली में वास्तविक तापमान 37.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, लेकिन लोगों ने 54 डिग्री सेल्सियस जैसी भीषण गर्मी महसूस की। इसी तरह, 22 मई 2024 को जब तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस था, तब हीट इंडेक्स 55.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। यह खतरनाक प्रवृत्ति इस बात का संकेत है कि अब सिर्फ थर्मामीटर पर दिख रहे आंकड़े ही नहीं, बल्कि हवा में मौजूद नमी का स्तर भी गर्मी की गंभीरता को निर्धारित कर रहा है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं। इस सीजन दिल्ली में लू के तीन दौर अप्रैल, मई और जून में भी देखे गए हैं, जिसने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
हीट इंडेक्स: गर्मी का नया पैमाना
दिल्ली में अब केवल अधिकतम तापमान ही गर्मी की गंभीरता तय नहीं करेगा, बल्कि आने वाले समय में हीट इंडेक्स (फील्स लाइक टेम्परेचर) ही लोगों के लिए असली खतरे का पैमाना बनता जा रहा है। हीट इंडेक्स, जिसे अक्सर 'महसूस होने वाला तापमान' कहा जाता है, हवा के तापमान और सापेक्ष आर्द्रता का एक संयोजन है जो मानव शरीर द्वारा महसूस की जाने वाली गर्मी की मात्रा को दर्शाता है। जब आर्द्रता अधिक होती है, तो शरीर से पसीना वाष्पित नहीं हो पाता, जिससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता और हमें वास्तविक तापमान से कहीं अधिक गर्मी महसूस होती है।
पिछले कुछ सालों के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि दिल्ली में यह प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। 5 जुलाई 2025 को वास्तविक तापमान 37.1 डिग्री सेल्सियस होने के बावजूद, लोगों ने 54 डिग्री सेल्सियस जैसी जानलेवा गर्मी महसूस की। इसी तरह, 22 मई 2024 को जब थर्मामीटर ने 43.4 डिग्री सेल्सियस दिखाया, तब हीट इंडेक्स 55.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। इस साल (जून 2026) के अंतिम दिनों में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जो चिंता का विषय है। यह दर्शाता है कि अब हमें केवल मौसम पूर्वानुमान में बताए गए अधिकतम तापमान पर ही नहीं, बल्कि हीट इंडेक्स पर भी ध्यान देना होगा।
आर्द्रता और जानलेवा गर्मी का बढ़ता गठजोड़
दिल्ली में हीट इंडेक्स के खतरनाक स्तर तक पहुंचने का मुख्य कारण मई और जून के दौरान हवा में लगातार बढ़ने वाली आर्द्रता है। आमतौर पर, जून और जुलाई के महीनों में मानसून पूर्व की गतिविधियों और स्थानीय कारकों के कारण दिल्ली की हवा में नमी बढ़ जाती है। यह नमी, जब उच्च तापमान के साथ मिलती है, तो शरीर के लिए गर्मी को सहन करना बहुत मुश्किल बना देती है। हमारा शरीर पसीने के वाष्पीकरण के माध्यम से खुद को ठंडा करता है, लेकिन जब हवा में पहले से ही बहुत अधिक नमी होती है, तो पसीना आसानी से नहीं सूख पाता।
नतीजतन, शरीर के अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और व्यक्ति को वास्तविक तापमान से कहीं अधिक गर्मी महसूस होती है। यह स्थिति न केवल असहज होती है, बल्कि जानलेवा भी हो सकती है, क्योंकि यह हीटस्ट्रोक, थकावट और निर्जलीकरण जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाती है। IMD के विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक मौसमी पैटर्न है जो अब जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण और भी तीव्र हो गया है, जिससे इस जानलेवा गर्मी का सामना करने के लिए सार्वजनिक जागरूकता और तैयारी की आवश्यकता बढ़ गई है।
स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव और बचाव के उपाय
'फील्स लाइक' तापमान का 50 डिग्री सेल्सियस के पार जाना मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरनाक है। ऐसे में हीटस्ट्रोक, हीट एग्जॉशन, डिहाइड्रेशन और अन्य गर्मी संबंधी बीमारियाँ आम हो जाती हैं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और खुले में काम करने वाले श्रमिकों को इस जानलेवा गर्मी से विशेष खतरा है। शरीर में पानी की कमी होने से रक्तचाप गिर सकता है, गुर्दे प्रभावित हो सकते हैं और हृदय गति अनियमित हो सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों ने लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ (जैसे नींबू पानी, ओआरएस) पीने, हल्के और ढीले सूती कपड़े पहनने तथा दोपहर के समय (विशेषकर 12 बजे से शाम 4 बजे तक) बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। यदि बाहर निकलना आवश्यक हो, तो छाता या टोपी का प्रयोग करें और बार-बार छायादार स्थानों पर रुकें। अपने आसपास के लोगों, खासकर कमजोर वर्गों का ध्यान रखें और गर्मी से संबंधित किसी भी असामान्य लक्षण जैसे चक्कर आना, सिरदर्द, मतली या अत्यधिक पसीना आने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
भविष्य की चुनौतियां और जलवायु परिवर्तन का असर
दिल्ली में हीट इंडेक्स का बढ़ना एक ऐसी चुनौती है जो भविष्य में और भी गंभीर हो सकती है। मौसम विभाग लगातार ऐसे जानलेवा हालात पर नजर रख रहा है और समय-समय पर चेतावनी जारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है, जिससे भविष्य में ऐसी चुनौतियां और भी गंभीर हो सकती हैं। शहरीकरण और कंक्रीट के जंगल भी 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव को बढ़ाते हैं, जिससे शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्मी महसूस होती है।
यह स्थिति नीति निर्माताओं और आम जनता दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है कि हमें केवल वास्तविक तापमान पर ही नहीं, बल्कि महसूस होने वाले तापमान और आर्द्रता के स्तर पर भी ध्यान देना होगा। दीर्घकालिक समाधानों में हरित क्षेत्रों को बढ़ाना, शहरी नियोजन में सुधार करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास करना शामिल है। तात्कालिक रूप से, प्रत्येक व्यक्ति को अपनी और अपने आसपास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जागरूक और सतर्क रहना होगा ताकि इस जानलेवा गर्मी के खतरे से बचा जा सके।