सोनम वांगचुक का वजन 11 KG घटा, छात्र आंदोलन का 34वां दिन
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देशभर में नीट पेपर लीक के मुद्दे पर उपजे आक्रोश के बीच, प्रख्यात शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के 34वें दिन उनका वजन 11 किलोग्राम घट गया है। यह आंदोलन, जिसे Common Justice Platform (CJP) द्वारा 20 जून 2026 को शुरू किया गया था, छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार की कथित उदासीनता के खिलाफ एक मजबूत आवाज बन गया है। वांगचुक इस विरोध प्रदर्शन में 28 जून 2026 को शामिल हुए थे, और तब से वे लगातार युवाओं की मांगों को उजागर कर रहे हैं।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और वांगचुक का जुड़ना
नीट पेपर लीक का मुद्दा मई 2026 में सामने आया, जब देशभर के लाखों छात्र अपनी कड़ी मेहनत और भविष्य को लेकर चिंतित हो उठे। इस घटना ने शिक्षा प्रणाली में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर किया और युवाओं में भारी निराशा पैदा की। छात्रों और विभिन्न संगठनों ने तत्काल कार्रवाई की मांग की, लेकिन सरकार की ओर से कथित तौर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। विशेष रूप से, यह उम्मीद की जा रही थी कि सरकार 3 जून 2026 तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के माध्यम से इस मुद्दे का समाधान कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिससे छात्रों का गुस्सा और भड़क गया। इस स्थिति ने छात्रों के बीच सरकार के प्रति अविश्वास को गहरा कर दिया।
इसी पृष्ठभूमि में, Common Justice Platform (CJP) ने 20 जून 2026 को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक व्यापक छात्र आंदोलन की शुरुआत की। यह आंदोलन सिर्फ नीट पेपर लीक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग भी शामिल थी। सोनम वांगचुक, जो अपने पर्यावरण और शिक्षा संबंधी कार्यों के लिए जाने जाते हैं, 28 जून 2026 को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उनके जुड़ने से आंदोलन को एक नई गति और विश्वसनीयता मिली, क्योंकि वे न केवल एक सम्मानित व्यक्ति हैं, बल्कि छात्रों के मुद्दों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी जगजाहिर है। वांगचुक ने छात्रों के साथ मिलकर सरकार पर दबाव बनाने का संकल्प लिया है, ताकि उनकी जायज मांगों को सुना जाए और उन पर कार्रवाई की जाए। उनका मानना है कि युवाओं का भविष्य किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए सर्वोपरि है।
वांगचुक के स्वास्थ्य पर असर और आगे की रणनीति
आंदोलन के 34वें दिन तक, सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर स्पष्ट प्रभाव पड़ा है। उनके लगातार उपवास और विरोध प्रदर्शन के कारण उनका वजन 11 किलोग्राम कम हो गया है। यह उनके दृढ़ संकल्प और छात्रों के भविष्य के प्रति उनकी गहरी चिंता को दर्शाता है। उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, लेकिन वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उनके इस त्याग ने देश भर के युवाओं और नागरिक समाज के सदस्यों को एकजुट होने के लिए प्रेरित किया है। कई छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता उनके समर्थन में आगे आ रहे हैं, जिससे आंदोलन को और बल मिल रहा है।
इस आंदोलन में अब केवल नीट पेपर लीक का मुद्दा ही नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है। CJP और वांगचुक ने सरकार से आग्रह किया है कि वह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करे और एक स्थायी समाधान प्रस्तुत करे। आंदोलनकारी भविष्य की रणनीति पर भी विचार कर रहे हैं, जिसमें देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और जन जागरूकता अभियान शामिल हो सकते हैं। उनका लक्ष्य है कि सरकार को इस मुद्दे की गंभीरता का एहसास हो और वह तत्काल प्रभावी कदम उठाए, ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में दोबारा न हों और छात्रों का विश्वास बहाल हो सके।
देश भर में छात्रों का बढ़ता आक्रोश
जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने देश के अन्य हिस्सों में भी छात्रों के बीच आक्रोश को जन्म दिया है। उदाहरण के लिए, हाल ही में पटना में छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़पें इस बात का प्रमाण हैं कि यह मुद्दा कितना संवेदनशील और व्यापक है। पटना में छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ और कई पुलिसकर्मी घायल हुए। ऐसी घटनाएं सरकार के लिए एक चेतावनी हैं कि यदि इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो स्थिति और बिगड़ सकती है, जिससे बड़े पैमाने पर सामाजिक अशांति फैलने का खतरा है।
शिक्षा प्रणाली में विश्वास की कमी छात्रों और अभिभावकों के बीच गहरी चिंता का विषय बन गई है। NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में बार-बार होने वाली अनियमितताएं न केवल छात्रों के मनोबल को तोड़ती हैं, बल्कि देश के भविष्य को भी खतरे में डालती हैं। सोनम वांगचुक और CJP का आंदोलन इस सामूहिक असंतोष का प्रतीक बन गया है। वे सरकार से एक स्वतंत्र जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत तंत्र स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। यह आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा के बारे में नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं के भविष्य और न्याय के अधिकार की लड़ाई है, जो अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है।
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