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ITR फाइलिंग 2026: आयकर पोर्टल पर नया कॉलम, जानें क्या देना होगा ब्यौरा

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ITR फाइलिंग 2026: आयकर पोर्टल पर नया कॉलम, जानें क्या देना होगा ब्यौरा
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आयकर विभाग ने करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइलिंग प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। 04 जुलाई 2026 को जारी अपडेट के अनुसार, विभाग ने अपने ऑनलाइन ITR पोर्टल पर "Receipts not in the nature of income" नाम से एक नया कॉलम जोड़ा है। इस कदम का उद्देश्य टैक्सपेयर्स के वित्तीय लेनदेनों की बेहतर जानकारी जुटाना है, खासकर उन प्राप्तियों की जो आय की श्रेणी में नहीं आतीं लेकिन बैंक खातों में दिखाई देती हैं। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से किसी की टैक्स देनदारी सीधे तौर पर नहीं बढ़ेगी, बल्कि यह विभाग को वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने और संभावित विसंगतियों की पहचान करने में मदद करेगा। यह नया प्रावधान ITR फाइलिंग 2026 से प्रभावी होगा, जिसमें करदाताओं को अपनी उन प्राप्तियों का विवरण देना होगा जिन पर सीधे तौर पर टैक्स नहीं लगता, लेकिन वे महत्वपूर्ण वित्तीय लेनदेन का हिस्सा होती हैं।

क्यों जोड़ा गया यह नया कॉलम?

आयकर विभाग का यह कदम टैक्सपेयर्स के वित्तीय प्रवाह को अधिक स्पष्ट रूप से समझने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कॉलम को जोड़ने का मुख्य उद्देश्य करदाताओं पर अतिरिक्त कर का बोझ डालना नहीं है, बल्कि वित्तीय लेनदेनों के संबंध में बेहतर डेटा एकत्र करना है। अक्सर ऐसा होता है कि लोगों के बैंक खातों में ऐसी बड़ी रकम आती है जो देखने में आय जैसी लगती है, लेकिन वास्तव में वह किसी आय स्रोत से नहीं आती। उदाहरण के लिए, किसी मित्र से लिया गया बड़ा ऋण या पैतृक संपत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि। पहले ऐसे लेनदेन को रिपोर्ट करने के लिए कोई स्पष्ट कॉलम नहीं था, जिससे विभाग के लिए इन प्राप्तियों की प्रकृति को समझना कठिन हो जाता था। यह नया कॉलम विभाग को "आय" और "गैर-आय प्राप्तियों" के बीच अंतर करने में सक्षम बनाएगा, जिससे कर मूल्यांकन में अधिक सटीकता आएगी और करदाताओं को अनावश्यक नोटिस मिलने की संभावना कम होगी। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह कॉलम फिलहाल केवल ऑनलाइन ITR पोर्टल पर उपलब्ध है और कागजी ITR फॉर्म में शामिल नहीं किया गया है, जो डिजिटल फाइलिंग को बढ़ावा देने की विभाग की मंशा को दर्शाता है।

किन पैसों की जानकारी देनी होगी?

इस नए प्रावधान के तहत, टैक्सपेयर्स को अब सिर्फ अपनी टैक्स-फ्री आय की ही नहीं, बल्कि ऐसी कई प्राप्तियों की भी जानकारी देनी होगी जो आय की श्रेणी में नहीं आतीं। इन प्राप्तियों में कुछ प्रमुख श्रेणियां शामिल हैं:

* बैंक, वित्तीय संस्था या किसी दोस्त-रिश्तेदार से लिया गया लोन: यदि किसी व्यक्ति ने बैंक से या किसी निजी स्रोत से बड़ी राशि का ऋण लिया है, तो अब उसे इसकी जानकारी ITR में देनी होगी। यह सुनिश्चित करेगा कि विभाग को पता हो कि यह राशि आय नहीं, बल्कि एक देयता है।

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* वसीयत (Will) या विरासत (Inheritance) में मिली संपत्ति या नकद राशि: पूर्वजों से विरासत में मिली संपत्ति या वसीयत के माध्यम से प्राप्त नकदी या अन्य संपत्तियों को भी अब रिपोर्ट करना होगा। हालांकि, विरासत में मिली संपत्ति पर सामान्य तौर पर टैक्स नहीं लगता, इसकी जानकारी विभाग को वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने में मदद करेगी।

* अपनी निजी पुरानी वस्तु या संपत्ति बेचने से प्राप्त रकम: यदि किसी व्यक्ति ने अपनी कोई पुरानी व्यक्तिगत वस्तु (जैसे फर्नीचर, कलाकृति, या गैर-कृषि भूमि) बेची है और उससे कोई राशि प्राप्त की है, तो उसे भी इस कॉलम में दर्शाना होगा। यह ध्यान रखना होगा कि कुछ विशिष्ट मामलों में पूंजीगत लाभ (Capital Gains) पर टैक्स लग सकता है, लेकिन मूल बिक्री राशि की जानकारी यहां देनी होगी।

गांव की कृषि भूमि बेचने से मिली राशि: भारत में ग्रामीण कृषि भूमि की बिक्री से प्राप्त आय कुछ शर्तों के तहत कर-मुक्त होती है। हालांकि, इस तरह की बिक्री से प्राप्त राशि को अब इस नए कॉलम* में रिपोर्ट करना होगा, जिससे विभाग इन लेनदेनों की प्रकृति को समझ सके।

यह स्पष्ट है कि इन प्राप्तियों की जानकारी देने का मतलब यह नहीं है कि इन पर तत्काल टैक्स लग जाएगा। इनकी करदेयता अलग-अलग आयकर नियमों और संबंधित धाराओं पर निर्भर करेगी। मुख्य बात यह है कि विभाग अब इन वित्तीय प्रवाहों का एक स्पष्ट रिकॉर्ड रखना चाहता है।

टैक्सपेयर्स पर क्या होगा असर और क्या करें?

इस नए कॉलम के जुड़ने से टैक्सपेयर्स पर सीधा वित्तीय बोझ बढ़ने की संभावना कम है, जैसा कि टैक्स विशेषज्ञों ने बताया है। हालांकि, इसका अर्थ यह है कि अब करदाताओं को अपने वित्तीय लेनदेनों के प्रति और अधिक सतर्क रहना होगा। यह बदलाव विभाग को करदाताओं के समग्र वित्तीय प्रोफाइल को समझने में मदद करेगा, जिससे भविष्य में संभावित कर चोरी या बेनामी लेनदेन की पहचान करना आसान हो जाएगा। यदि किसी करदाता के खाते में बड़ी रकम आती है और वह उसे ITR में रिपोर्ट नहीं करता है, तो भविष्य में आयकर विभाग द्वारा जांच का सामना करना पड़ सकता है।

करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने सभी वित्तीय लेनदेनों का पुख्ता रिकॉर्ड रखें। इसमें बैंक स्टेटमेंट्स, लोन एग्रीमेंट्स, संपत्ति बिक्री के दस्तावेज, वसीयत की प्रतियां और उपहार प्राप्तियों से संबंधित कागजात शामिल हैं। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि ITR में दर्ज की गई जानकारी आपके वास्तविक वित्तीय स्थिति के अनुरूप हो। इस कदम से पारदर्शिता बढ़ेगी और करदाताओं को अपनी गैर-आय प्राप्तियों को स्पष्ट रूप से दर्शाने का अवसर मिलेगा, जिससे आयकर विभाग के साथ उनकी विश्वसनीयता और बेहतर हो सकेगी। यह भी संभव है कि भविष्य में विभाग इस डेटा का उपयोग कर कानूनों में और सुधार करने या नए नियम बनाने के लिए करे। इसलिए, सभी करदाताओं के लिए यह अनिवार्य है कि वे इस नए कॉलम को सावधानीपूर्वक समझें और अपनी ITR फाइलिंग में इसका सही उपयोग करें।

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