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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विश्व उद्यमिता दिवस: युवाओं में जगाई गई उद्यमिता की अलख

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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विश्व उद्यमिता दिवस: युवाओं में जगाई गई उद्यमिता की अलख
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आज 21 अगस्त को विश्व उद्यमिता दिवस का भव्य आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य युवाओं में उद्यमशीलता की भावना को बढ़ावा देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना था। विश्वविद्यालय के दीनदयाल उपाध्याय उद्यमिता एवं कौशल विकास केंद्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि उद्यमिता केवल व्यवसाय शुरू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नवाचार, जोखिम लेने और समस्याओं का समाधान खोजने की एक मानसिकता है। इस अवसर पर विभिन्न कार्यशालाओं, पैनल चर्चाओं और सफल उद्यमियों के प्रेरणादायक अनुभवों को साझा किया गया, जिसने उपस्थित 200 से अधिक छात्रों और युवा शोधकर्ताओं में उत्साह भर दिया।

कुलपति का प्रेरणादायी संबोधन

विश्व उद्यमिता दिवस के अवसर पर, कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने अपने संबोधन में युवाओं को भविष्य के चुनौतियों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का युग केवल नौकरी मांगने वालों का नहीं, बल्कि नौकरी देने वालों का है। प्रो. सचदेवा ने आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए युवाओं को नए विचारों के साथ आगे आने और उन्हें वास्तविकता में बदलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विशेष रूप से डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी पहलों का उल्लेख किया, जो युवा उद्यमियों के लिए असीमित अवसर प्रदान करती हैं। कुलपति ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं, जैसे इनक्यूबेशन सेंटर, मेंटरशिप प्रोग्राम और स्टार्ट-अप फंडिंग के लिए मार्गदर्शन के बारे में भी जानकारी दी, ताकि छात्र अपने उद्यमशीलता के सपनों को पूरा कर सकें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असफलता से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि हर महान सफलता के पीछे कई असफलताओं का अनुभव होता है।

उद्यमिता केंद्र की भूमिका और गतिविधियाँ

दीनदयाल उपाध्याय उद्यमिता एवं कौशल विकास केंद्र इस आयोजन का मुख्य आयोजक था, जिसने विश्वविद्यालय में उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि उनका लक्ष्य छात्रों को केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें कौशल-सम्पन्न बनाकर स्वरोजगार के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि केंद्र नियमित रूप से उद्यमिता विकास कार्यक्रम, कौशल प्रशिक्षण कार्यशालाएं और उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद सत्र आयोजित करता है। हाल ही में, केंद्र ने 10 से अधिक छात्र-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को शुरुआती मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए हैं, जिनमें से 3 ने बाजार में अपनी पहचान बनाना शुरू कर दिया है। इन गतिविधियों का उद्देश्य छात्रों को व्यापार योजना बनाने, बाजार अनुसंधान करने और वित्तीय प्रबंधन की मूल बातें समझने में मदद करना है। केंद्र ने स्थानीय उद्योगों के साथ साझेदारी भी स्थापित की है ताकि छात्रों को वास्तविक दुनिया का अनुभव मिल सके और वे अपने विचारों को व्यावहारिकता में बदल सकें।

युवाओं में नए विचारों का संचार और भागीदारी

विश्व उद्यमिता दिवस के कार्यक्रम में छात्रों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। विभिन्न विभागों के छात्रों ने अपने अभिनव व्यापार विचारों (बिजनेस आइडियाज) को प्रस्तुत किया, जिनमें से कुछ पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास और तकनीकी नवाचार पर आधारित थे। बी.टेक. के छात्र राहुल ने कृषि कचरे से ऊर्जा उत्पादन की अपनी अवधारणा प्रस्तुत की, जबकि एमबीए की छात्रा प्रिया ने स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को ऑनलाइन मंच पर लाने का विचार साझा किया। इन प्रस्तुतियों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रतिक्रिया दी गई, जिससे छात्रों को अपने विचारों को और बेहतर बनाने का अवसर मिला। कार्यक्रम में 'आइडिया पिचिंग' प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें सर्वश्रेष्ठ तीन विचारों को विश्वविद्यालय द्वारा आगे के मार्गदर्शन और संभावित सीड फंडिंग का वादा किया गया। छात्रों ने बताया कि ऐसे आयोजन उन्हें प्रेरणा देते हैं और उन्हें यह समझने में मदद करते हैं कि उनके पास केवल नौकरी खोजने के बजाय नौकरी बनाने की भी क्षमता है। यह दिन युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जहाँ उन्होंने अपने सपनों को साझा किया और भविष्य के उद्यमियों के रूप में अपनी यात्रा की शुरुआत की।

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भविष्य की राह और आत्मनिर्भरता का संकल्प

विश्व उद्यमिता दिवस का यह आयोजन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, जो छात्रों को नवाचार और उद्यमशीलता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। विश्वविद्यालय ने घोषणा की है कि वह आने वाले वर्षों में उद्यमिता शिक्षा को अपने पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाएगा और अधिक इनक्यूबेशन सुविधाओं का विस्तार करेगा। इस पहल का लक्ष्य केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करना नहीं है, बल्कि देश के आर्थिक विकास में योगदान देना भी है। छात्रों और संकाय सदस्यों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे नवाचार और रचनात्मकता के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे। इस आयोजन ने स्पष्ट कर दिया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि भविष्य के उद्यमियों और नवोन्मेषकों का भी पोषण स्थल है, जो देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। यह दिन युवाओं में एक नई ऊर्जा और उत्साह भर गया, जिससे वे अपने उद्यमशीलता के सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

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