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प्रधानमंत्री ने साझा किया होम्योपैथी पर लेख: भारत के स्वास्थ्य तंत्र में बढ़ती भूमिका

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प्रधानमंत्री ने साझा किया होम्योपैथी पर लेख: भारत के स्वास्थ्य तंत्र में बढ़ती भूमिका
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 10 अप्रैल, 2026 को केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव द्वारा लिखित एक लेख को अपने सोशल मीडिया मंच X पर साझा किया। इस लेख में भारत की स्वास्थ्य और कल्याण प्रणाली में होम्योपैथी की बढ़ती और महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। यह बताता है कि कैसे होम्योपैथी भारत के बहुलवादी स्वास्थ्य सेवा ढांचे का एक अभिन्न अंग बन गई है, जो उपचार के लिए एक समग्र और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण प्रदान करती है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि होम्योपैथी अपने मजबूत सामुदायिक जुड़ाव और टिकाऊ दृष्टिकोण के साथ 'विकसित भारत' के व्यापक लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। यह साझाकरण 9 अप्रैल को मनाए गए विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर के ठीक बाद हुआ, जिसने देश की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में होम्योपैथी की लगातार विस्तारित होती भूमिका पर चिंतन करने का अवसर प्रदान किया।

होम्योपैथी: भारत की स्वास्थ्य प्रणाली का अभिन्न अंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने X पोस्ट में इस बात पर विशेष बल दिया कि केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव का लेख होम्योपैथी के विकास को दर्शाता है, जिसने भारत की विविध और बहुलवादी स्वास्थ्य प्रणाली में अपनी जगह बनाई है। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सा पद्धति केवल रोगों का इलाज नहीं करती, बल्कि एक समग्र और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाती है। इसका अर्थ है कि उपचार केवल लक्षणों पर आधारित नहीं होता, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को ध्यान में रखता है। यह दृष्टिकोण भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपराओं के अनुरूप है।

प्रधानमंत्री ने लेख में उल्लिखित होम्योपैथी के सामुदायिक जुड़ाव और टिकाऊ दृष्टिकोण की सराहना की। यह दर्शाता है कि होम्योपैथी केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी अपनी पहुंच बना रही है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा मिल रही है। यह 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जहां हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच हो। होम्योपैथी का यह मॉडल वर्तमान स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करता है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी टिकाऊ समाधान प्रदान करता है।

केंद्रीय मंत्री जाधव का आलेख और विस्तार लेती भूमिका

अपने आलेख में, केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने विश्व होम्योपैथी दिवस को भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में होम्योपैथी की विस्तारित भूमिका पर विचार करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि होम्योपैथी देश के जन-केंद्रित और एकीकृत देखभाल मॉडल में लगातार योगदान दे रही है। यह मॉडल इस विचार पर आधारित है कि स्वास्थ्य सेवा में समुदाय की सक्रिय भागीदारी और विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों का एकीकरण शामिल है। होम्योपैथी इस मॉडल को एक मजबूत संस्थागत नेटवर्क, बड़ी संख्या में चिकित्सकों और सार्वजनिक स्वास्थ्य वितरण में अपनी बढ़ती भूमिका के माध्यम से मजबूत कर रही है।

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जाधव ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में होम्योपैथी एक संरचित और व्यापक रूप से स्वीकृत चिकित्सा प्रणाली के रूप में विकसित हुई है। देश भर में वर्तमान में 291 होम्योपैथिक कॉलेज कार्यरत हैं, और 3.6 लाख से अधिक पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सक अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। ये आंकड़े होम्योपैथी की गहरी जड़ें और समाज में इसकी स्वीकार्यता को दर्शाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि होम्योपैथी, अपने व्यक्तिगत उपचार, निवारक देखभाल और लागत प्रभावी उपचारों पर ध्यान केंद्रित करने के कारण, टिकाऊ स्वास्थ्य सेवा के लक्ष्य के साथ पूरी तरह से संरेखित है। यह न केवल व्यक्तियों के स्वास्थ्य में सुधार करती है, बल्कि पूरी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में भी मदद करती है। अनुसंधान, विनियमन और व्यापक जन-स्वीकृति के माध्यम से, होम्योपैथी भारत की बहुलवादी स्वास्थ्य प्रणाली को लगातार सशक्त बना रही है।

आयुष फ्रेमवर्क और समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण

भारत में, होम्योपैथी आयुष फ्रेमवर्क के तहत अभ्यास की जाने वाली चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। आयुष में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी और सिद्ध जैसी अन्य पारंपरिक भारतीय प्रणालियाँ भी शामिल हैं। सरकार देश में निवारक और समग्र स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने के व्यापक प्रयास के तहत इन पारंपरिक और वैकल्पिक प्रणालियों को लगातार बढ़ावा दे रही है। यह दृष्टिकोण केवल रोगों के उपचार पर केंद्रित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य को बनाए रखने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने पर भी जोर देता है। होम्योपैथी, अपने विशिष्ट सिद्धांतों और उपचार विधियों के साथ, इस समग्र दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो भारत के नागरिकों को विविध और एकीकृत स्वास्थ्य विकल्प प्रदान करती है। यह सुनिश्चित करता है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति एक साथ मिलकर देश के स्वास्थ्य लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करें।

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