सार्थक-PDS फेज-2 को मंजूरी: 81 करोड़ को खाद्य सुरक्षा, CM योगी ने PM का आभार जताया
लखनऊ। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को और अधिक सुदृढ़ तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए SARTHAK-PDS फेज-2 के लिए ₹25,530 करोड़ की भारी-भरकम राशि को मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक निर्णय का मुख्य उद्देश्य देश के 81 करोड़ से अधिक जरूरतमंद नागरिकों की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना और उन्हें सम्मानपूर्वक अन्न उपलब्ध कराना है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्र सरकार के इस फैसले का तत्काल स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था न केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाएगी, बल्कि AI एवं आधुनिक तकनीकों के उपयोग से इसकी दक्षता में भी उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।
सार्थक-PDS: खाद्य सुरक्षा का नया अध्याय
SARTHAK-PDS फेज-2 योजना, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹25,530 करोड़ की लागत से संचालित करने की मंजूरी दी है, देश की खाद्य सुरक्षा नीतियों में एक मील का पत्थर साबित होगी। इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य देश के 81 करोड़ से अधिक गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न की सुनिश्चित पहुँच बनाना है। यह पहल सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पूरी तरह से डिजिटल और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की परिकल्पना करती है, जिससे खाद्यान्न वितरण में होने वाली अनियमितताओं को रोका जा सके और लाभार्थियों तक उनके हक का अनाज बिना किसी बाधा के पहुँच सके। इस चरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाएगा, जो वितरण प्रक्रिया को न केवल अधिक पारदर्शी बनाएगा बल्कि उसकी जवाबदेही और दक्षता को भी बढ़ाएगा। सरकार का मानना है कि यह निर्णय 'अंत्योदय' और 'गरीब कल्याण' के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करेगा, जिसके तहत समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और कल्याण का लाभ पहुँचाना सुनिश्चित किया जाता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार और दृष्टिकोण
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा SARTHAK-PDS फेज-2 को दी गई मंजूरी को 'ऐतिहासिक निर्णय' करार दिया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए लिखा कि यह निर्णय देश के 81 करोड़ से अधिक जरूरतमंद नागरिकों की खाद्य सुरक्षा को और सुदृढ़ करने वाला है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस योजना में AI एवं आधुनिक तकनीकों के समावेश की सराहना की, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पहल 'अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सम्मानपूर्वक अन्न पहुंचाने' के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करती है। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, यह व्यवस्था वितरण प्रणाली में मानवीय हस्तक्षेप को कम करके त्रुटियों की संभावना को न्यूनतम करेगी, जिससे वास्तविक लाभार्थियों को ही लाभ मिल पाएगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह निर्णय न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि गरीबों के जीवन में आत्मसम्मान और गरिमा भी लाएगा।
उपमुख्यमंत्री मौर्य ने बताया जन-कल्याणकारी निर्णय
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे जन-कल्याणकारी और दूरदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि ₹25,530 करोड़ की लागत से संचालित होने वाली यह योजना देशभर में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को अधिक मजबूत, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाएगी। मौर्य ने इस बात पर बल दिया कि यह निर्णय गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के खाद्य सुरक्षा अधिकार को और मजबूत करेगा। उनके अनुसार, यह योजना 'अंत्योदय' और 'गरीब कल्याण' के संकल्प को नई मजबूती प्रदान करती है, जो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की प्राथमिकता रही है। उपमुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग न केवल दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि भ्रष्टाचार को भी प्रभावी ढंग से रोकेगा, जिससे सुनिश्चित होगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही हाथों तक पहुँचे। यह एक ऐसा कदम है जो भारत को एक विकसित और समावेशी राष्ट्र बनाने की दिशा में अग्रसर करेगा।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली में तकनीकी उन्नयन का महत्व
SARTHAK-PDS फेज-2 में AI और आधुनिक तकनीकों का समावेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव है। यह न केवल खाद्यान्न के रिसाव को रोकेगा बल्कि वितरण प्रक्रिया में गति और सटीकता भी लाएगा। उदाहरण के लिए, आधार-आधारित प्रमाणीकरण और बायोमेट्रिक पहचान से यह सुनिश्चित होगा कि अनाज केवल अधिकृत लाभार्थियों तक ही पहुँचे। रियल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग और सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन से खाद्यान्न की उपलब्धता और वितरण का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा। यह प्रणाली कालाबाजारी और हेराफेरी पर अंकुश लगाएगी, जिससे गरीब परिवारों को उनके हक का पूरा अनाज मिल पाएगा। इसके अतिरिक्त, शिकायत निवारण तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा, जिससे लाभार्थियों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। यह तकनीकी उन्नयन भारत को एक डिजिटल-सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ सरकारी सेवाएं अधिक प्रभावी और सुलभ हों। यह योजना खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ सुशासन के सिद्धांतों को भी मजबूत करती है।