पीएम मोदी का बहुराष्ट्रीय दौरा: भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में मजबूत साझेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने महत्वपूर्ण पांच-राष्ट्र दौरे के एक अहम पड़ाव के रूप में, मंगलवार को नॉर्वे की अपनी यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न की, जिसके बाद वे अपने इस बहुराष्ट्रीय दौरे के अंतिम चरण के लिए रोम, इटली के लिए रवाना हो गए हैं। नॉर्वे में अपने प्रवास के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जहाँ उन्होंने स्वीडन, आइसलैंड, फ़िनलैंड और डेनमार्क के अपने समकक्षों के साथ गहन चर्चाएँ कीं। इस शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय बैठकों का मुख्य उद्देश्य भारत और इन नॉर्डिक देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना था, विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा, व्यापार, स्थिरता और डिजिटलीकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना। प्रधानमंत्री ने इस दौरान जोर देकर कहा कि "लोकतंत्र और कानून का शासन हमें स्वाभाविक भागीदार बनाते हैं," जो इन देशों के साथ भारत की गहरी साझेदारी का आधार है। यह दौरा भारत की वैश्विक पहुंच और विभिन्न भू-राजनीतिक क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन: साझा मूल्य और मजबूत साझेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में, लोकतंत्र और कानून के शासन के साझा मूल्यों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा, "लोकतंत्र और कानून का शासन हमें स्वाभाविक भागीदार बनाते हैं," यह कथन भारत और नॉर्डिक देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों को दर्शाता है। इस शिखर सम्मेलन का आयोजन नॉर्वे में किया गया था, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री, आइसलैंड के प्रधानमंत्री, फ़िनलैंड के प्रधानमंत्री और डेनमार्क के प्रधानमंत्री सहित अपने सभी नॉर्डिक समकक्षों के साथ मुलाकातें कीं। इन बैठकों का मुख्य एजेंडा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और आपसी सहयोग के नए रास्ते तलाशना था।
चर्चा के दौरान, नेताओं ने विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया, जिसमें जलवायु परिवर्तन, सतत विकास लक्ष्य और भू-राजनीतिक स्थिरता शामिल थे। भारत और नॉर्डिक देशों ने हरित परिवर्तन (Green Transition) को बढ़ावा देने और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल और नॉर्डिक देशों की तकनीकी विशेषज्ञता के बीच तालमेल बिठाने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नॉर्डिक मॉडल, जो नवाचार और स्थिरता पर केंद्रित है, भारत के विकास लक्ष्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत हो सकता है। यह शिखर सम्मेलन दोनों पक्षों के लिए एक मंच प्रदान करता है ताकि वे साझा चुनौतियों का सामना करने और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर सकें। डिजिटल नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग को भी प्राथमिकता दी गई, जिससे भविष्य में तकनीकी साझेदारी के नए द्वार खुलेंगे।
नॉर्वे के साथ द्विपक्षीय संबंध: स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटलीकरण में प्रगति
नॉर्वे की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर गहन चर्चा की। इन चर्चाओं में मुख्य रूप से स्वच्छ ऊर्जा, व्यापार, स्थिरता और डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्र शामिल थे। भारत और नॉर्वे के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने पर जोर दिया गया, खासकर समुद्री अर्थव्यवस्था और नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) के क्षेत्र में। नॉर्वे, समुद्री संसाधनों और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है, जो भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत भी अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है।
दोनों देशों के नेताओं ने निवेश और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए व्यापारिक संबंधों को सरल बनाने पर सहमति व्यक्त की। नॉर्वे की कंपनियों को भारत में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं, विशेष रूप से पनबिजली और पवन ऊर्जा में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी तरह, भारतीय कंपनियों को नॉर्वे के बाजारों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया गया। डिजिटलीकरण के क्षेत्र में, दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल शासन पर ज्ञान और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की इच्छा व्यक्त की। यह सहयोग न केवल आर्थिक विकास को गति देगा बल्कि दोनों देशों के लोगों के लिए नए अवसर भी पैदा करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री अनुसंधान और विकास में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा, जिसका उद्देश्य समुद्री संसाधनों का स्थायी उपयोग सुनिश्चित करना और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना है।
पांच-राष्ट्र दौरे का समापन: इटली की ओर और वैश्विक कूटनीति
नॉर्वे में सफल वार्ताओं के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच-राष्ट्र दौरे के अंतिम चरण के लिए रोम, इटली के लिए रवाना हो गए हैं। यह दौरा भारत की वैश्विक पहुंच और विभिन्न भू-राजनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ संबंधों को गहरा करने की व्यापक विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इटली में प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान, द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने, व्यापार और निवेश के अवसरों का पता लगाने और साझा वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह बहुराष्ट्रीय दौरा भारत को यूरोपीय संघ के भीतर एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी के रूप में अपनी स्थिति को रेखांकित करने में सहायक रहा है।