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अर्जेंटीना विश्व कप फाइनल में, इंग्लैंड को हराकर फॉकलैंड विवाद गरमाया

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अर्जेंटीना विश्व कप फाइनल में, इंग्लैंड को हराकर फॉकलैंड विवाद गरमाया
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डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना ने बुधवार रात को अटलांटा में खेले गए दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराकर लगातार दूसरी बार फुटबॉल विश्व कप फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। यह जीत टीम ने अंतिम क्षणों में शानदार वापसी करते हुए हासिल की, जब वह 85वें मिनट तक 0-1 से पीछे चल रही थी। हालांकि, इस रोमांचक जीत के बाद, अर्जेंटीना के खिलाड़ियों द्वारा मैदान पर 'लास माल्विनास सोन अर्जेंटीनास' (फॉकलैंड/माल्विनास अर्जेंटीना के हैं) लिखा हुआ बैनर लहराने से एक नया विवाद खड़ा हो गया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के प्रशंसकों के बीच झड़पें हुईं और फॉकलैंड/माल्विनास द्वीप समूह पर लंबे समय से चले आ रहे दावे का मुद्दा फिर से सुर्खियों में आ गया। अब अर्जेंटीना का मुकाबला 19 जुलाई को फाइनल में स्पेन से होगा।

रोमांचक मुकाबला और मेसी का जादू

मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमें आक्रामक थीं, लेकिन इंग्लैंड ने 55वें मिनट में एंथनी गॉर्डन के गोल से बढ़त बना ली, जिससे ऐसा लग रहा था कि वे फाइनल की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि, लियोनेल मेसी की अगुवाई वाली अर्जेंटीना ने हार नहीं मानी और आखिरी वक्त में मैच का रुख पलट दिया। मेसी के शानदार पास पर, एंजो फर्नांडेज ने 85वें मिनट में 25 गज की दूरी से एक बेहतरीन गोल दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इसके बाद, इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में, मेसी के एक सटीक क्रॉस को सब्स्टीट्यूट लॉटारो मार्टिनेज ने हेडर से गोल में बदलकर अर्जेंटीना को 2-1 की निर्णायक जीत दिला दी। इस तरह मेसी ने दोनों गोलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए दो असिस्ट प्रदान किए और अपनी टीम को एक बार फिर विश्व कप के खिताबी मुकाबले में पहुंचा दिया। यह जीत अर्जेंटीना के दृढ़ संकल्प और हार न मानने वाले जज्बे का प्रमाण है।

फॉकलैंड/माल्विनास विवाद फिर सुर्खियों में

जीत के तुरंत बाद, अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने मैदान पर एक बड़ा बैनर लहराया जिस पर स्पष्ट रूप से 'लास माल्विनास सोन अर्जेंटीनास' लिखा था, जिसका अर्थ है 'फॉकलैंड/माल्विनास अर्जेंटीना के हैं'। इस कृत्य ने तुरंत विवाद को जन्म दिया और स्टेडियम के अंदर और बाहर दोनों देशों के प्रशंसकों के बीच झड़पें हुईं। फॉकलैंड अटलांटिक महासागर में स्थित एक द्वीप समूह है, जिस पर अर्जेंटीना और ब्रिटेन दोनों ही अपना दावा करते हैं। इस द्वीप समूह को लेकर 2 अप्रैल 1982 को अर्जेंटीना ने कब्जा कर लिया था, जिसके बाद ब्रिटेन ने 74 दिन चले युद्ध के बाद द्वीपों पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर लिया था। ऐतिहासिक रूप से, 1816 में स्पेन से आजादी के बाद फॉकलैंड अर्जेंटीना का हिस्सा था, लेकिन बाद में ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया। यह बैनर लहराना केवल एक जश्न का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह अर्जेंटीना की उस पुरानी राजनीतिक और क्षेत्रीय भावना को दर्शाता है जो इस द्वीप समूह पर अपने संप्रभुता के दावे को बनाए रखती है। इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस संवेदनशील मुद्दे को बहस का विषय बना दिया है।

अर्जेंटीना का विश्व कप इतिहास और पहले हाफ का संघर्ष

यह अर्जेंटीना का सातवां विश्व कप फाइनल होगा। टीम इससे पहले 1930, 1978, 1986, 1990, 2014 और 2022 में फाइनल खेल चुकी है। अर्जेंटीना ने अब तक 1978, 1986 और 2022 में तीन बार विश्व कप का खिताब जीता है। अब उसके पास लगातार दूसरी बार और कुल चौथा खिताब जीतने का शानदार मौका है। ब्यूनस आयर्स में अर्जेंटीना के प्रशंसकों ने सड़कों पर उतरकर अपनी टीम की जीत का जोरदार जश्न मनाया।

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मैच का पहला हाफ फुटबॉल कम और खिलाड़ियों की भिड़ंत ज्यादा रही। तीसरे ही मिनट में इंग्लैंड के इलियट एंडरसन पर हुए टैकल के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी आमने-सामने आ गए, और रेफरी इस्माइल एलफाथ को बीच-बचाव करना पड़ा। पूरे पहले हाफ में कई बार खिलाड़ी भिड़े और फाउल की भरमार रही, जिससे खेल में तनाव साफ दिखाई दे रहा था। 33वें मिनट में इंग्लैंड को पहला मौका मिला जब डेक्लन राइस की फ्री-किक पर जॉन स्टोन्स ने हेडर लगाया, लेकिन गेंद नेट से लगकर बाहर चली गई। पहले हाफ में दोनों ही टीमों ने अपनी रक्षात्मक रणनीति पर अधिक ध्यान दिया, लेकिन दूसरे हाफ में अर्जेंटीना ने अपनी आक्रामक खेल शैली से मैच को अपने पक्ष में कर लिया।

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