भारत ने वैश्विक रक्षा सहयोग हेतु 'रक्षा' रोडमैप किया जारी
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम में अगले 10 वर्षों के लिए भारत की रक्षा कूटनीति के 'रक्षा' नामक रणनीतिक रोडमैप का अनावरण किया। इस दस्तावेज़ का लक्ष्य वैश्विक रक्षा और सुरक्षा संबंधों का विस्तार करना है, जिसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को सक्रिय अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ संरेखित किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह रूपरेखा भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र और क्षेत्रीय स्थिरता के लंगर के रूप में स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह पहल द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सुरक्षा संबंधों को गहरा करने, मित्र देशों के साथ क्षमता निर्माण करने, स्वदेशी रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर केंद्रित है।
'रक्षा' दस्तावेज़ का व्यापक दृष्टिकोण
'रक्षा' दस्तावेज़ भारत की विदेश नीति के एक मुख्य स्तंभ के रूप में रक्षा कूटनीति को रेखांकित करता है। इसका उद्देश्य भारत को बदलते वैश्विक परिदृश्य में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था के एक लंगर के रूप में सुनिश्चित करना है। यह दस्तावेज़ राष्ट्रीय सुरक्षा को सक्रिय अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ जोड़ने के लिए एक स्पष्ट और कार्रवाई योग्य दृष्टिकोण प्रदान करता है। मंत्रालय ने कहा कि यह व्यापक रूपरेखा भारत को एक प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र और क्षेत्रीय स्थिरता के केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखती है। दस्तावेज़ विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को एक नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर और फर्स्ट रिस्पोंडर के रूप में मजबूत करने का भी प्रयास करता है, जो इस क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को दर्शाता है। यह रोडमैप भारत की बढ़ती सामरिक महत्वाकांक्षाओं और वैश्विक सुरक्षा में योगदान देने की उसकी इच्छा को दर्शाता है।
चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रणनीति
'रक्षा' ढांचा चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जो भारत की रक्षा कूटनीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं:।
1. रणनीतिक साझेदारी: इसके तहत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग को गहरा किया जाएगा। यह भारत को दुनिया भर के प्रमुख देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने और साझा सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में मदद करेगा।
2. क्षमता निर्माण: इस स्तंभ में मित्र राष्ट्रों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना शामिल है। इसका उद्देश्य भागीदार देशों की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाना और क्षेत्रीय सुरक्षा में सामूहिक योगदान देना है।
3. स्वदेशी निर्यात: यह भारत में बने रक्षा प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिससे भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके। यह मेक-इन-इंडिया पहल को बढ़ावा देगा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा।
4. समुद्री सुरक्षा: यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को एक नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर और फर्स्ट रिस्पोंडर के रूप में मजबूत करने पर जोर देता है। यह क्षेत्र में समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और अन्य सुरक्षा खतरों से निपटने में भारत की सक्रिय भूमिका को बढ़ाएगा।
उच्च स्तरीय उपस्थिति और व्यापक निहितार्थ
इस महत्वपूर्ण दस्तावेज़ के विमोचन समारोह में कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इनमें सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार प्रमुख थे। इनके अलावा, विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन, वायु सेना उप-प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित और नौसेना उप-प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया। यह कार्यक्रम कर्तव्य भवन में आयोजित किया गया था, जो सरकार के महत्वपूर्ण आयोजनों का स्थल है। रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क निदेशालय ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि यह ढांचा वैश्विक सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए 10 साल का रोडमैप निर्धारित करता है। यह रेखांकित करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को सक्रिय अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ जोड़ते हुए, यह व्यापक ढांचा भारत को एक प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र और क्षेत्रीय स्थिरता के लंगर के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखता है।
बेल्जियम के साथ गहन वार्ता और भविष्य की दिशा
'रक्षा' रोडमैप का अनावरण भारत और बेल्जियम के बीच द्विपक्षीय रक्षा और औद्योगिक सहयोग के विस्तार के उद्देश्य से हुई गहन चर्चा के एक दिन बाद हुआ है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को नई दिल्ली में बेल्जियम के रक्षा और व्यापार मंत्री थियो फ्रेंकेन की मेजबानी की थी। इस बैठक के दौरान रक्षा औद्योगिक सहयोग के तहत कई समझौता ज्ञापनों और अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए। सिंह ने इस बैठक को "बहुत उपयोगी" बताया, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूती मिलेगी। यह घटनाक्रम भारत की रक्षा कूटनीति की सक्रिय प्रकृति को दर्शाता है, जहां वह न केवल रणनीतिक दस्तावेज जारी कर रहा है, बल्कि विभिन्न देशों के साथ ठोस साझेदारी भी बना रहा है। यह पहल भारत के वैश्विक रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव और भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।