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किया बनर्जी ने 140 किग्रा डेडलिफ्ट कर जीता विश्व रजत, भारत में पावरलिफ्टिंग को मिली नई पहचान

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किया बनर्जी ने 140 किग्रा डेडलिफ्ट कर जीता विश्व रजत, भारत में पावरलिफ्टिंग को मिली नई पहचान
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दक्षिण अफ्रीका के सन सिटी में आयोजित 2026 आईपीएफ विश्व सब-जूनियर एवं जूनियर क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भारतीय पावरलिफ्टर किया कुणाल बनर्जी ने इतिहास रच दिया है। 21 वर्षीय किया ने जूनियर महिला 47 किलोग्राम वर्ग में 140 किलोग्राम का असाधारण डेडलिफ्ट उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। उनकी यह उपलब्धि न केवल इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने विश्व मंच पर पदक जीता, बल्कि इसलिए भी कि उन्होंने अपने शरीर के वजन (45.70 किलोग्राम) से तीन गुना से अधिक वजन उठाया, जिसने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है। इस वायरल प्रदर्शन ने भारत में पावरलिफ्टिंग को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, और इस खेल को पहली बार मुख्यधारा की खेल चर्चाओं में शामिल किया है, जिससे देश में पावरलिफ्टिंग के प्रति जागरूकता और रुचि बढ़ी है

किया का ऐतिहासिक डेडलिफ्ट और वैश्विक पहचान

किया कुणाल बनर्जी का 140 किलोग्राम का डेडलिफ्ट सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारतीय पावरलिफ्टिंग के लिए एक मील का पत्थर है। सोशल मीडिया पर उनके लिफ्ट के वीडियो तेजी से वायरल हुए, जहाँ उपयोगकर्ताओं ने उनकी असाधारण ताकत और दृढ़ संकल्प की सराहना की। कई लोगों ने इस बात पर खुशी जताई कि पावरलिफ्टिंग जैसा खेल अब भारत में व्यापक चर्चा का विषय बन रहा है। किया ने चैंपियनशिप में कुल 280 किलोग्राम वजन उठाया, जिसमें 90 किलोग्राम स्क्वाट, 50 किलोग्राम बेंच प्रेस और 140 किलोग्राम डेडलिफ्ट शामिल था। हालांकि, 47 किलोग्राम जूनियर वर्ग में वह समग्र रूप से पांचवें स्थान पर रहीं, लेकिन व्यक्तिगत डेडलिफ्ट इवेंट में उनका प्रदर्शन असाधारण था, जिसने उन्हें वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई। यह प्रदर्शन भारतीय एथलीटों की बढ़ती शक्ति और क्षमता का प्रतीक है

पदक की दौड़ में किया का शानदार प्रदर्शन

व्यक्तिगत डेडलिफ्ट स्पर्धा में किया का प्रदर्शन वास्तव में शानदार था। उन्होंने 140 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक हासिल किया, जो फ्रांस की इनेस हर्बो (165 किलोग्राम) के बाद दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। इस स्पर्धा में आयरलैंड की ब्लाथनाइड ओ'ड्वायर ने भी 140 किलोग्राम वजन उठाया था, लेकिन डेडलिफ्ट स्टैंडिंग में बेहतर स्थिति के कारण किया ने उन्हें पीछे छोड़ते हुए रजत पदक पर कब्जा किया। यह निर्णायक क्षण दर्शाता है कि कैसे हर किलोग्राम और बारीक अंतर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मायने रखता है। किया का यह पदक भारत के लिए पावरलिफ्टिंग में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह देश के युवाओं को इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा

किया के प्रदर्शन का लगातार बढ़ता ग्राफ

किया बनर्जी का विश्व चैंपियनशिप में यह प्रदर्शन कोई अचानक मिली सफलता नहीं है, बल्कि यह उनके निरंतर प्रयासों और उल्लेखनीय प्रगति का परिणाम है। पिछले एक साल में उनके प्रदर्शन में लगातार सुधार देखने को मिला है। 2025 राष्ट्रीय चैंपियनशिप में, उन्होंने कुल 257.5 किलोग्राम वजन उठाया था, जिसमें 82.5 किलोग्राम स्क्वाट, 47.5 किलोग्राम बेंच प्रेस और 127.5 किलोग्राम डेडलिफ्ट शामिल था। उनकी प्रगति 2026 राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी जारी रही, जहाँ उन्होंने कुल 287.5 किलोग्राम वजन के साथ 95 किलोग्राम स्क्वाट, 52.5 किलोग्राम बेंच प्रेस और 140 किलोग्राम डेडलिफ्ट का नया व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाया। दक्षिण अफ्रीका में 140 किलोग्राम का डेडलिफ्ट इस प्रकार उनके तेजी से बढ़ते करियर का नवीनतम पड़ाव है, जो उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को दर्शाता है। यह उनके भविष्य के लिए एक मजबूत नींव तैयार करता है

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मधुरा कर ने भी लहराया परचम, जीते चार स्वर्ण

जहां किया बनर्जी के वायरल लिफ्ट ने सबसे अधिक सोशल मीडिया पर धूम मचाई, वहीं चैंपियनशिप में भारत के कई अन्य उल्लेखनीय प्रदर्शन भी रहे। इनमें से सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन जलपाईगुड़ी की युवा पावरलिफ्टर मधुरा कर का रहा, जिन्होंने सब-जूनियर महिला 52 किलोग्राम वर्ग में चार स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। मधुरा, जिनका वजन 49.35 किलोग्राम था, ने 107.5 किलोग्राम स्क्वाट, 60 किलोग्राम बेंच प्रेस और 125 किलोग्राम डेडलिफ्ट उठाया, जिससे उनका कुल वजन 292.5 किलोग्राम रहा। उन्होंने इन सभी चार श्रेणियों में स्वर्ण पदक जीते। उनकी यह उपलब्धि उनकी उम्र को देखते हुए विशेष रूप से उल्लेखनीय है। जलपाईगुड़ी की कक्षा XII की छात्रा मधुरा ने पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली थी, उन्होंने 2024 में राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप जीती और 2025 में इस खिताब को बरकरार रखा। उन्होंने इस साल फरीदाबाद में राष्ट्रीय बेंच प्रेस चैंपियनशिप भी जीती। ये सभी उपलब्धियां भारतीय पावरलिफ्टिंग के उज्ज्वल भविष्य का संकेत देती हैं

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