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एआई रोजगार पर माइक्रोसॉफ्ट सीईओ मुस्तफा सुलेमान का नया आकलन

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एआई रोजगार पर माइक्रोसॉफ्ट सीईओ मुस्तफा सुलेमान का नया आकलन
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माइक्रोसॉफ्ट एआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मुस्तफा सुलेमान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अपने पहले के कड़े रुख में बदलाव किया है। कुछ महीने पहले जहां उन्होंने 12 से 18 महीनों के भीतर अधिकांश व्हाइट-कॉलर नौकरियों के एआई द्वारा स्वचालित होने की भविष्यवाणी की थी, वहीं अब वे नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री डैरोन एसमोग्लू के इस विचार का समर्थन कर रहे हैं कि अगले दशक में एआई केवल 5% मानव कार्य को ही प्रतिस्थापित करेगा। यह महत्वपूर्ण बदलाव 7 अक्टूबर, 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उनके एक पोस्ट के माध्यम से सामने आया, जिसमें उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट एआई द्वारा प्रकाशित नई पत्रिका द ह्यूमनिस्ट रिव्यू के उद्घाटन अंक में एसमोग्लू के एक निबंध का हवाला दिया। इस नई सोच का उद्देश्य एआई के माध्यम से नौकरियों को बदलने के बजाय श्रमिकों की उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना है, जिससे एआई के भविष्य को लेकर व्याप्त आशंकाओं को कम किया जा सके।

पहले की चेतावनी और उसका प्रभाव

मुस्तफा सुलेमान ने फरवरी में फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में एक ऐसी तस्वीर पेश की थी जो कई लोगों के लिए चिंताजनक थी। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि 12 से 18 महीनों के भीतर अधिकांश, यदि सभी नहीं, व्हाइट-कॉलर कार्य एआई द्वारा पूरी तरह से स्वचालित हो जाएंगे। उन्होंने विशेष रूप से लेखांकन, कानूनी कार्य, विपणन और परियोजना प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को एआई के प्रभाव के प्रति संवेदनशील बताया था। यह भविष्यवाणी व्यापक रूप से फैल गई थी और इसने सीनेटर बर्नी सैंडर्स जैसे प्रमुख हस्तियों का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने इसे सच होने पर "आर्थिक भूकंप" करार दिया था। सुलेमान की यह चेतावनी ऐसे समय में आई थी जब एआई तकनीक तेजी से विकसित हो रही थी और नौकरी बाजार पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस छिड़ी हुई थी। उनकी यह बात कई कंपनियों और कर्मचारियों के लिए भविष्य की अनिश्चितताओं को बढ़ा रही थी, जिससे एआई को एक संभावित "जॉब किलर" के रूप में देखा जाने लगा था। इस प्रारंभिक चेतावनी ने नीति निर्माताओं और व्यावसायिक नेताओं को एआई के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में गंभीरता से सोचने पर मजबूर किया था, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में श्रमिकों के बीच चिंता पैदा हुई थी।

वर्तमान में बदली हुई दृष्टि

अपने नवीनतम पोस्ट में, मुस्तफा सुलेमान ने अब एक बहुत अधिक क्रमिक दृष्टि प्रस्तुत की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगले दस वर्षों में, मानव द्वारा किए जाने वाले कार्यों का केवल 5% ही एआई द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा। यह आंकड़ा नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री डैरोन एसमोग्लू के एक निबंध पर आधारित है, जिसे माइक्रोसॉफ्ट एआई (MAI) की नई पत्रिका द ह्यूमनिस्ट रिव्यू के पहले अंक में प्रकाशित किया गया है। सुलेमान ने अपने पोस्ट में लिखा है कि एआई से नौकरियों के तेजी से खत्म होने का डर अतिरंजित है और ध्यान नौकरियों को बदलने के बजाय ऐसी प्रणालियों के निर्माण पर होना चाहिए जो श्रमिकों को अधिक उत्पादक बनने में मदद करें। यह बदलाव एआई के विकास के मानवीय पहलू पर जोर देता है और इसे एक सहायक उपकरण के रूप में प्रस्तुत करता है, न कि एक प्रतिस्थापन के रूप में। यह नई स्थिति एआई के प्रति एक अधिक आशावादी और सहयोगात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जो एआई को मानव क्षमता को बढ़ाने वाले एक उपकरण के रूप में देखती है, बजाय इसके कि यह उसे कम करे।

एआई और भविष्य का कार्यबल: एक संतुलित दृष्टिकोण

सुलेमान के इस बदली हुई राय का कार्यबल और नीति निर्माताओं के लिए गहरा निहितार्थ है। यह दृष्टिकोण एआई के विकास को एक अवसर के रूप में देखता है, जहां नई तकनीकों का उपयोग कर्मचारियों को सशक्त बनाने, उनकी दक्षता बढ़ाने और उन्हें अधिक मूल्यवान कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एआई दोहराए जाने वाले और थकाऊ कार्यों को स्वचालित कर सकता है, जिससे मानव कर्मचारी अधिक रचनात्मक, रणनीतिक और समस्या-समाधान वाले कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। यह एक ऐसा मॉडल है जहां एआई मानव बुद्धि का पूरक है, न कि उसका प्रतिद्वंद्वी। यह संतुलित दृष्टिकोण बताता है कि सरकारों, व्यवसायों और शैक्षणिक संस्थानों को एआई के साथ मिलकर काम करने के लिए कार्यबल को तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसमें नए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों, आजीवन सीखने के अवसरों और ऐसे शैक्षिक ढांचे का विकास शामिल है जो एआई साक्षरता को बढ़ावा दें। एआई के विकास को लेकर अब ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि इसे कैसे जिम्मेदारी से विकसित किया जाए ताकि यह समाज के लिए अधिकतम लाभ प्रदान कर सके, जबकि संभावित नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके। सुलेमान का यह नवीनतम बयान एआई के भविष्य पर एक महत्वपूर्ण बहस को फिर से शुरू करता है, जो अब नौकरियों के विनाश के बजाय उत्पादकता और मानव क्षमता के विस्तार पर केंद्रित है। यह एआई के एक ऐसे भविष्य की कल्पना करने में मदद करता है जहां प्रौद्योगिकी हमारे जीवन को बेहतर बनाती है, न कि उसे खतरे में डालती है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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