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नवी मुंबई हवाई अड्डे के नामकरण को लेकर 15,000 लोगों का विधान भवन मार्च

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नवी मुंबई हवाई अड्डे के नामकरण को लेकर 15,000 लोगों का विधान भवन मार्च
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नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (NMIA) का नामकरण दिवंगत किसान नेत...

नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (NMIA) का नामकरण दिवंगत किसान नेता लोकनेते दिंकर बालू (डी.बी.) पाटील के नाम पर करने की अपनी दशकों पुरानी मांग को लेकर लगभग 15,000 लोग, जिनमें परियोजना-प्रभावित व्यक्ति (PAPs), किसान और आगरी-कोली समुदाय के सदस्य शामिल हैं, बुधवार, 8 जुलाई, 2026 को पनवेल से मुंबई के विधान भवन तक एक विशाल मार्च निकालेंगे। आयोजकों ने बताया कि यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय हो रहा है जब NMIA से 15 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय उड़ान संचालन शुरू होने वाला है, जिससे इस मुद्दे की तात्कालिकता और बढ़ गई है। यह मार्च युवा कार्यकर्ता रश्मिता पोपेता द्वारा शुरू की गई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के बाद हो रहा है, जिसने हवाई अड्डे के नामकरण आंदोलन को एक बार फिर से जीवंत कर दिया है। यह मांग एक दशक से अधिक समय से इस क्षेत्र के सबसे भावनात्मक राजनीतिक मुद्दों में से एक बनी हुई है, और समुदाय अपनी पहचान और अपने नेता के सम्मान के लिए एकजुट होकर खड़ा है।

नामकरण विवाद की पृष्ठभूमि और आंदोलन का इतिहास

नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नामकरण को लेकर विवाद एक दशक से भी अधिक पुराना है, जब से इस परियोजना की परिकल्पना की गई थी। स्थानीय आगरी-कोली समुदाय और परियोजना प्रभावित व्यक्तियों (PAPs) के लिए, यह केवल एक नामकरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और उनके संघर्षों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। लोकनेते डी.बी. पाटील एक सम्मानित किसान नेता थे जिन्होंने महाराष्ट्र में किसानों और वंचितों के अधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उन्होंने भूमि अधिग्रहण, उचित मुआवजे और स्थानीय लोगों के सशक्तिकरण के लिए कई बड़े आंदोलन चलाए थे। यही कारण है कि स्थानीय समुदाय, विशेष रूप से आगरी-कोली समाज, का मानना है कि इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना का नाम उनके प्रिय नेता के नाम पर रखा जाना चाहिए, जिन्होंने इस क्षेत्र के लोगों के लिए अथक प्रयास किए थे। पिछले कई वर्षों से, विभिन्न सामाजिक संगठन, राजनीतिक दल और स्थानीय नेता इस मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन और याचिकाएँ देते रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण समुदाय में गहरा असंतोष व्याप्त है।

विशाल मार्च की तैयारी और मार्ग

यह विशाल प्रदर्शन 'लोकनेते डीबा प्रेमी नामकरण समिति' के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है। समिति के आयोजकों ने बताया कि यह जुलूस सुबह 10 बजे पनवेल के छत्रपति शिवाजी महाराज चौक से शुरू होगा। प्रदर्शनकारी सबसे पहले छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे, जिसके बाद वे एसटी स्टैंड, कलंबोली, सनपाड़ा, चेंबूर और ईस्टर्न एक्सप्रेसवे होते हुए विधान भवन की ओर बढ़ेंगे। सामाजिक कार्यकर्ता कांतिलाल काडू ने बताया कि इस मार्च के लिए पनवेल, उरण, पेण, रोहा, अलीबाग, खालापुर, कर्जत, ठाणे, कल्याण, भिवंडी, वसई, विरार और पालघर सहित विभिन्न गाँवों में व्यापक स्तर पर बैठकें आयोजित कर लामबंदी की गई है। उन्होंने आगे कहा कि महिला संगठन, कलाकार समूह, बैलगाड़ी संघ, ग्राम समितियाँ, आगरी संगठन और कई सामाजिक संस्थाओं ने भी इस विरोध प्रदर्शन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। इस व्यापक समर्थन से यह स्पष्ट होता है कि यह मांग केवल कुछ व्यक्तियों की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक भावना का प्रतिनिधित्व करती है।

आगामी चुनौतियाँ और सरकार पर दबाव

यह मार्च ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है जब NMIA 15 जुलाई से अंतर्राष्ट्रीय उड़ान संचालन शुरू करने वाला है। हवाई अड्डे के वाणिज्यिक संचालन से ठीक पहले इस तरह का एक बड़ा विरोध प्रदर्शन निश्चित रूप से राज्य सरकार पर दबाव बढ़ाएगा। सरकार को इस भावनात्मक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे को जल्द से जल्द संबोधित करने की आवश्यकता होगी। युवा कार्यकर्ता रश्मिता पोपेता की भूख हड़ताल ने इस आंदोलन को एक नई ऊर्जा दी है और यह दर्शाता है कि स्थानीय युवा भी इस मांग को लेकर कितने प्रतिबद्ध हैं। समुदाय का मानना है कि डी.बी. पाटील के नाम पर हवाई अड्डे का नामकरण करना उनके संघर्षों और बलिदानों का सम्मान करने का एक उचित तरीका होगा। इस विशाल जन आंदोलन से सरकार पर एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि स्थानीय लोगों की भावनाओं को अब और अनदेखा नहीं किया जा सकता है। सरकार को इस मामले में एक स्थायी और स्वीकार्य समाधान खोजने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे, अन्यथा यह मुद्दा भविष्य में और भी बड़े सामाजिक-राजनीतिक टकराव का कारण बन सकता है।

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