टेक्नोलॉजी 6 मिनट पढ़ें

विनेश फोगाट को एशियाई खेल ट्रायल की मंजूरी, WFI नीति को हाईकोर्ट ने बताया अनुचित

33 व्यूज़
विनेश फोगाट को एशियाई खेल ट्रायल की मंजूरी, WFI नीति को हाईकोर्ट ने बताया अनुचित
टेक्नोलॉजी

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में प्रसिद्ध भारतीय पहलवान विनेश फोगाट को आगामी एशियाई खेल 2026 के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) की मौजूदा चयन नीति पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह नीति मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी करने वाली elite खिलाड़ियों को अनुचित रूप से बाहर करती है। मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने अपने आदेश में निर्देश दिया कि विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को होने वाले ट्रायल में शामिल होने दिया जाए। यह फैसला खेल और न्याय के हित में लिया गया है, और इससे WFI की नीतियों में लचीलेपन की कमी उजागर हुई है, विशेषकर उन एथलीटों के लिए जो व्यक्तिगत कारणों से खेल से कुछ समय के लिए दूर रहती हैं।

WFI नीति पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) की मौजूदा चयन नीति को स्पष्ट रूप से exclusionary बताया। कोर्ट ने विशेष रूप से उन खिलाड़ियों की स्थिति पर प्रकाश डाला जो मातृत्व अवकाश के कारण खेल से दूर रही हैं। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, "यह नीति और सर्कुलर स्पष्ट रूप से बहिष्करणकारी प्रकृति के हैं, क्योंकि यह प्रतिवादी नंबर 1 (WFI) को appellant जैसी प्रतिष्ठित खिलाड़ियों को उनके मातृत्व अवकाश के कारण लिए गए sabbatical के मद्देनजर विचार करने का कोई विवेक नहीं देता है।" यह टिप्पणी WFI की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत परिस्थितियों के प्रति संवेदनशीलता की कमी को दर्शाती है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि विनेश फोगाट को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में उल्लिखित कारण "पूर्व-नियोजित" प्रतीत होते हैं और ऐसे मामलों को फिर से खोलने के समान हैं जो पहले ही सुलझा लिए गए थे। यह दर्शाता है कि WFI का रवैया पक्षपातपूर्ण हो सकता है और उनके निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है।

निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए निर्देश

अदालत ने चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को निर्देश दिया है कि संपूर्ण चयन प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए। इसके अतिरिक्त, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के स्वतंत्र पर्यवेक्षक पूरी कार्यवाही की निगरानी करेंगे। ये कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं कि ट्रायल प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात की गुंजाइश न रहे और सभी प्रतिभागियों को समान अवसर मिलें। कोर्ट का स्पष्ट मानना है कि ऐसे प्रतिष्ठित खिलाड़ी को अवसर देना "खेल और न्याय के हित में" आवश्यक है। यह आदेश विनेश फोगाट द्वारा 18 मई के एकल-न्यायाधीश पीठ के फैसले को चुनौती देने के बाद आया है, जिसने पहले उन्हें ट्रायल में भाग लेने के संबंध में तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। इस नए फैसले ने विनेश के लिए दरवाजे खोल दिए हैं।

विनेश फोगाट: एक चैंपियन की वापसी की राह

भारत की सबसे सम्मानित पहलवानों में से एक, विनेश फोगाट के लिए यह आदेश एक बड़ी राहत है। उन्होंने हाल ही में 2024 पेरिस ओलंपिक में सुर्खियां बटोरी थीं, जहां महिला 50 किग्रा फ्रीस्टाइल फाइनल से पहले सुबह के weigh-in में 100 ग्राम अधिक वजन पाए जाने के कारण उन्हें दिल तोड़ने वाली अयोग्यता का सामना करना पड़ा था। यह घटना उनके करियर का एक कठिन दौर था, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला उन्हें अपनी प्रतिभा साबित करने का एक और मौका देता है और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा। विनेश ने हमेशा देश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और इस निर्णय से उन्हें अंतर्राष्ट्रीय मंच पर वापसी करने की उम्मीद मिली है। यह दिखाता है कि न्यायपालिका किस प्रकार खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा कर सकती है, खासकर जब उन्हें प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। यह निर्णय अन्य महिला एथलीटों के लिए भी एक मिसाल कायम करता है जो मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी करना चाहती हैं, उन्हें यह विश्वास दिलाता है कि उनकी मेहनत और समर्पण को उचित मान्यता मिलेगी और उन्हें अनुचित रूप से बाहर नहीं किया जाएगा।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

टैग्स

और पढ़ें

लेखक