पैरा साइक्लिस्ट लीशा दास ने फेडरेशन का समर्थन ठुकराया, अपने खर्च पर खेलेंगी
भारतीय पैरा साइक्लिस्ट लीशा दास ने राष्ट्रमंडल खेलों से ठीक पहले देश के खेल अधिकारियों के साथ अपने विवाद को और बढ़ा दिया है। उन्होंने साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (CFI) को सूचित किया है कि वह आधिकारिक भारतीय किट नहीं पहनेंगी और अपना स्वयं का तिरंगा लेकर जाएंगी। इसके साथ ही, लीशा ने टीम होटल के बाहर रहने, स्वतंत्र रूप से बुक किए गए टिकटों पर यात्रा करने और ग्लासगो में फेडरेशन द्वारा की गई यात्रा व आवास व्यवस्था को अस्वीकार करने का फैसला किया है। उन्होंने अपने इस कदम के पीछे लगातार उत्पीड़न, मानसिक तनाव और समर्थन की कमी का हवाला दिया है। लीशा ने अपने कोच आदित्य मेहता के लिए तत्काल मान्यता और खेल के मैदान तक पहुंच की भी मांग की है, यह कहते हुए कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें पहले ही उनके कोच के रूप में मान्यता दे दी है।
फेडरेशन के समर्थन से इनकार और निजी व्यवस्थाएँ
लीशा दास ने स्पष्ट रूप से CFI की व्यवस्थाओं को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने एक ईमेल में लिखा, "मैं आधिकारिक किट नहीं पहनूंगी। मैं अपनी खुद की किट पहनूंगी और अपना खुद का भारतीय झंडा लेकर जाऊंगी।" यह बयान CFI द्वारा लीशा, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ आशा शेख और तकनीशियन के दत्तात्रेय के लिए उड़ान टिकट बुक करने और ग्लासगो में भारतीय पैरा-साइक्लिंग दल के लिए व्यवस्था करने की सूचना के बाद आया। हालांकि, उनके कोच आदित्य मेहता को इसमें शामिल नहीं किया गया था। लीशा ने बताया कि उन्होंने अपने प्रशिक्षण, उपकरण और खेलों में भागीदारी के लिए व्यक्तिगत रूप से खर्च वहन किया है। उनकी कोचिंग टीम के अनुसार, इस पर लगभग 12 लाख रुपये का खर्च आया है, जिसमें गैर-वापसी योग्य उड़ान टिकट, ग्लासगो में निजी आवास और उनकी उच्च-स्तरीय अनुकूलित साइकिल पर भुगतान किया गया सीमा शुल्क शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें एक ऐसी सहायता प्रणाली का प्रतिनिधित्व करने का कोई कारण नहीं दिखता "जिससे मुझे कोई सार्थक समर्थन नहीं मिला है"।
कोच और सहयोगी स्टाफ की मान्यता पर जोर
लीशा दास ने अपनी नई मांग में अपने कोच आदित्य मेहता, तकनीशियन के दत्तात्रेय और फिजियोथेरेपिस्ट डॉ आशा शेख को उनके आवश्यक सहयोगी कर्मियों के रूप में इवेंट एक्सेस प्रदान करने की बात दोहराई है। उन्होंने जोर दिया कि दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा आदित्य मेहता को कोच के रूप में मान्यता दिए जाने के कारण उन्हें तत्काल मान्यता और खेल के मैदान तक पहुंच मिलनी चाहिए। लीशा ने यह भी दावा किया कि फेडरेशन ने "मुझे पहले से सूचित किए बिना" टिकट बुक किए थे और उनके कोच व सहयोगी टीम ने "लंबे समय तक स्पष्टता और समय पर संचार की कमी" के कारण पहले ही अपनी यात्रा और आवास को अंतिम रूप दे दिया था। उन्होंने अपनी स्वतंत्र व्यवस्थाओं के बावजूद, मेहता और उनके सहयोगी स्टाफ के लिए मान्यता की अपनी मांग को कमजोर न करने पर जोर दिया।
तस्वीरों के इस्तेमाल पर आपत्ति और कानूनी चेतावनी
लीशा ने पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (PCI) के आधिकारिक मंचों पर अपनी तस्वीरों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन तस्वीरों से यह भ्रामक धारणा पैदा होती है कि उन्हें अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षित, प्रायोजित या समर्थित किया गया है। एक नाबालिग होने के नाते, उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके अभिभावक ने इन तस्वीरों के इस्तेमाल के लिए सहमति दी थी। लीशा ने चेतावनी दी कि यदि इन सामग्रियों को हटाया नहीं गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने की प्रतिबद्धता
इन सब विवादों के बावजूद, लीशा दास ने इस बात पर जोर दिया कि वह भारत का गर्व के साथ प्रतिनिधित्व करना जारी रखेंगी। उन्होंने कहा कि उनकी स्वतंत्र व्यवस्थाओं से आदित्य मेहता और उनके सहयोगी कर्मचारियों के लिए मान्यता की उनकी मांग कमजोर नहीं होनी चाहिए। लीशा का मानना है कि उनका लक्ष्य देश के लिए पदक जीतना है, और इसके लिए उन्हें अपने चुने हुए सहयोगी स्टाफ के साथ पूरी सहायता और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने खेल अधिकारियों से उत्पीड़न और समर्थन की कमी के बावजूद अपने खेल पर ध्यान केंद्रित रखने का संकल्प दोहराया है।