परिवर्तिनी एकादशी पर वास्तुगुरुजी राणा सिकंदर के खास वास्तु उपाय, घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए अपनाएं ये नियम
इस खबर की वेब स्टोरी देखें
2 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे परिवर्तिनी एकादशी, पार्श्व एकादशी और पद्मा एकादशी भी कहा जाता है, मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष एकादशी तिथि 21 सितंबर रात करीब 8 बजे शुरू होकर 22 सितंबर रात 9:43 बजे तक रहेगी।
वास्तुगुरुजी राणा सिकंदर के अनुसार, एकादशी केवल धार्मिक उपवास का दिन नहीं, बल्कि घर के वातावरण को सकारात्मक, शांत और आध्यात्मिक बनाने का अवसर भी माना जा सकता है। इस दिन घर की स्वच्छता, पूजा स्थल और ऊर्जा संतुलन पर विशेष ध्यान देना शुभ माना जाता है।
🪔 एकादशी पर वास्तु के अनुसार क्या करें?
- घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थान को साफ-सुथरा रखें।
- पूजा स्थल में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
- भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पित करना धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
- घर के ब्रह्मस्थान अर्थात मध्य भाग को अनावश्यक सामान से भरा न रखें। वास्तु परंपरा में इसे घर का महत्वपूर्ण केंद्रीय क्षेत्र माना जाता है।
- सुबह और शाम दीपक जलाकर मंत्र-जप एवं प्रार्थना करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया जा सकता है।
- घर में कलह, नकारात्मक बातचीत और अव्यवस्था से बचते हुए शांत वातावरण बनाए रखें।
🌿 परिवर्तिनी एकादशी का विशेष संदेश
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के करवट परिवर्तन से इसका नाम परिवर्तिनी एकादशी पड़ा। इसे वामन एकादशी और पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
वास्तुगुरुजी राणा सिकंदर के अनुसार, “परिवर्तन की शुरुआत बाहरी वातावरण के साथ-साथ स्वयं के विचारों और आचरण में सकारात्मक बदलाव से होनी चाहिए।” इसलिए इस अवसर पर घर की सफाई के साथ मन में सकारात्मकता, संयम और शांति का संकल्प लेना उपयोगी हो सकता है।
वास्तु गुरुजी राणा सिकंदर रायपुर के वास्तु सलाहकार हैं, जो 45 देवता वास्तु पद्धति से बिना तोड़फोड़ वास्तु समाधान देते हैं। उनके बारे में विस्तार से जानें: वास्तु गुरुजी राणा सिकंदर – प्रोफ़ाइल | ऑनलाइन वास्तु परामर्श: vastuguruji.in