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रायगढ़: मां से बिछड़ा नन्हा गजराज, वन विभाग ड्रोन से ढूंढेगा

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रायगढ़: मां से बिछड़ा नन्हा गजराज, वन विभाग ड्रोन से ढूंढेगा
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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के घने जंगलों में एक नन्हा हाथी अपनी मां से बिछड़कर भटक रहा है, जिससे वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में गहरी चिंता का माहौल है। पिछले कुछ दिनों से यह गजराज मां की तलाश में अकेला घूमता देखा जा रहा है, जिसकी उम्र लगभग छह से आठ महीने बताई जा रही है। वन विभाग ने इस नन्हे हाथी को उसकी मां से मिलाने के लिए एक व्यापक और विशेष अभियान शुरू किया है, जिसमें आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। यह हृदय विदारक घटना रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ वन परिक्षेत्र के पास सामने आई है, जहाँ हाथियों का आवागमन सामान्य है और यह क्षेत्र अक्सर हाथी-मानव संघर्ष के लिए भी जाना जाता है। बिछड़े हुए बच्चे की तस्वीरें और खबरें सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और वन्यजीव विशेषज्ञों पर उसे जल्द से जल्द उसकी मां तक पहुंचाने का दबाव बढ़ गया है।

बिछड़ने की वजह और नन्हे गजराज की स्थिति

नन्हे हाथी के अपने झुंड और मां से बिछड़ने के कई संभावित कारण हो सकते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह झुंड के तेजी से आगे बढ़ने, किसी मानवीय बाधा या फिर शिकारी जानवर के अचानक हमले से बचने की कोशिश में हुआ होगा। यह भी संभव है कि भोजन या पानी की तलाश में झुंड के एक बड़े क्षेत्र में फैलने के दौरान बच्चा पीछे रह गया हो। यह नन्हा गजराज अभी बहुत छोटा है और अपनी मां के दूध पर पूरी तरह निर्भर है, जिससे उसकी सुरक्षा और पोषण को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं। जंगल में अकेला होने के कारण वह जंगली जानवरों जैसे तेंदुए या भालू का आसान शिकार बन सकता है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने नन्हे हाथी को कई बार अकेला और परेशान देखा है, जो लगातार आवाजें निकालकर अपनी मां को ढूंढने की कोशिश कर रहा था। उसकी यह स्थिति देखकर वन विभाग की टीम ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। इस नन्हे हाथी की उम्र के कारण, उसे अपनी मां की गंध और आवाज की तीव्र आवश्यकता है, जो उसे सुरक्षा और भोजन प्रदान करती है।

वन विभाग का बचाव अभियान और तकनीकी सहायता

नन्हे गजराज को उसकी मां से मिलाने के लिए वन विभाग ने एक विशेष टीम का गठन किया है। इस टीम में वन अधिकारी, वनकर्मी और वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि उनकी प्राथमिकता बच्चे को सुरक्षित उसकी मां तक पहुंचाना है, क्योंकि एक बच्चे का अपनी मां के साथ रहना उसके अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। इस अभियान में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि जंगल के दुर्गम और घने इलाकों में भी मां हाथी की तलाश की जा सके। ड्रोन से मिलने वाली हवाई तस्वीरें और वीडियो जंगल के बड़े हिस्से को कम समय में स्कैन करने में मदद कर रहे हैं। वन विभाग के डीएफओ (DFO)श्रीमान आर.के. तिवारी ने मीडिया को बताया कि उनकी टीम लगातार नन्हे हाथी पर नजर रख रही है और उसे सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने हाथियों के संभावित मार्गों और पानी के स्रोतों के आसपास अपनी निगरानी बढ़ा दी है, क्योंकि मां हाथी भी अपने बच्चे की तलाश में उन जगहों पर लौट सकती है।

हाथियों के आवास और संघर्ष की चुनौतियाँ

रायगढ़ जिला हाथियों के लिए एक महत्वपूर्ण गलियारा रहा है, लेकिन तेजी से बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों, खनन परियोजनाओं और मानवीय अतिक्रमण के कारण उनके प्राकृतिक आवास सिकुड़ते जा रहे हैं। इससे हाथियों और मनुष्यों के बीच संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे अक्सर दोनों पक्षों को नुकसान होता है। नन्हे हाथी का अपने झुंड से बिछड़ना इन बड़े पर्यावरणीय मुद्दों की ओर भी ध्यान खींचता है। वन्यजीव संरक्षण संगठनों ने इस बात पर चिंता जताई है कि यदि हाथियों के प्राकृतिक मार्गों को बाधित किया जाता रहा, तो ऐसी घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं। हाथियों के आवासों का विखंडन उन्हें भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों के करीब आने पर मजबूर करता है, जिससे संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है। इस घटना ने एक बार फिर हाथियों के सुरक्षित गलियारों को बनाए रखने और उनके आवासों की रक्षा के महत्व को उजागर किया है।

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भविष्य की रणनीति और उम्मीदें

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि मां हाथी को ढूंढने में सफलता नहीं मिलती है और नन्हा गजराज लंबे समय तक अकेला रहता है, तो उसे विशेष देखभाल के लिए किसी वन्यजीव पुनर्वास केंद्र या हाथी बचाव केंद्र भेजा जा सकता है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उसे पर्याप्त पोषण, चिकित्सा देखभाल और सुरक्षा मिले, ताकि वह स्वस्थ जीवन जी सके। हालांकि, विभाग की पहली प्राथमिकता मां और बच्चे का पुनर्मिलन कराना है, क्योंकि एक बच्चे के लिए अपनी जैविक मां के साथ रहना ही सबसे स्वाभाविक और हितकर होता है। वन विभाग भविष्य में ऐसी बिछड़ने की घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीणों के साथ जागरूकता अभियान चलाने और हाथियों के सुरक्षित गलियारों को बनाए रखने पर भी जोर दे रहा है। इस घटना ने स्थानीय समुदाय और वन्यजीव प्रेमियों को एक साथ ला दिया है, और सभी को उम्मीद है कि यह नन्हा गजराज जल्द ही अपनी मां से मिल पाएगा और जंगल में सुरक्षित जीवन जी पाएगा।

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