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बस्तर में मूसलाधार बारिश: स्कूल बंद, नेशनल हाईवे बनेगा ग्रीन कॉरिडोर; धान शॉर्टेज पर उठे सवाल

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बस्तर में मूसलाधार बारिश: स्कूल बंद, नेशनल हाईवे बनेगा ग्रीन कॉरिडोर; धान शॉर्टेज पर उठे सवाल
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छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पिछले गुरुवार शाम से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसी के मद्देनजर, बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से जिले के सभी शासकीय और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। राजधानी जगदलपुर समेत आसपास के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण सड़कों पर आवागमन भी प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए बस्तर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। इस बीच, जगदलपुर शहर के लिए एक सकारात्मक खबर भी है, जहां राष्ट्रीय राजमार्ग को ग्रीन कॉरिडोर में बदलने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है, जबकि 89 करोड़ के धान शॉर्टेज पर जवाबदेही के सवाल उठने से प्रशासन की चुनौतियां बढ़ गई हैं।

भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, स्कूलों में अवकाश

बस्तर संभाग में मानसूनी गतिविधियों ने एक बार फिर अपनी रफ्तार पकड़ ली है, जिसके परिणामस्वरूप गुरुवार शाम से ही जगदलपुर और आसपास के क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश हो रही है। इस मूसलाधार बारिश ने शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है। शहर की कई प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। निचले इलाकों और विभिन्न वार्डों में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे घरों और दुकानों में पानी घुसने की खबरें भी सामने आ रही हैं। यह स्थिति बच्चों के स्कूल जाने के लिए असुरक्षित माहौल पैदा कर रही थी।

जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कार्रवाई की है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए, कलेक्टर ने सभी शासकीय और निजी स्कूलों को बंद रखने का निर्देश जारी किया है। यह निर्णय बच्चों को बारिश के कारण होने वाली संभावित स्वास्थ्य समस्याओं और आवागमन में आने वाली कठिनाइयों से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रशासन ने सभी स्कूल प्रबंधन को आदेश का कड़ाई से पालन करने के लिए निर्देशित किया है ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।

मौसम विभाग ने अपनी ताजा चेतावनी में बस्तर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों के लिए अगले 24 घंटों तक भारी बारिश की आशंका जताई है। यह चेतावनी स्थानीय निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि उन्हें सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की आवश्यकता है। प्रशासन ने आपदा प्रबंधन टीमों को भी अलर्ट पर रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। स्थानीय निकाय भी जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने और निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने में जुटे हुए हैंबारिश के कारण फसलों को होने वाले नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है, हालांकि अभी तक विस्तृत रिपोर्ट सामने नहीं आई है, लेकिन किसानों में चिंता का माहौल है।

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जगदलपुर नेशनल हाईवे पर ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण

एक ओर जहां बस्तर बारिश की मार झेल रहा है, वहीं दूसरी ओर जगदलपुर शहर के सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की गई है। शहर के प्रवेश द्वार पर स्थित नेशनल हाईवे को अब केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि एक हरी-भरी पहचान के रूप में विकसित किया जा रहा है। लालबाग के समीप, करीब 3 हजार मीटर लंबे हिस्से में 2700 पौधे लगाकर एक विशाल ग्रीन बेल्ट तैयार करने का कार्य आरंभ किया गया है। यह परियोजना शहर की हरियाली को बढ़ाने और वायु प्रदूषण को कम करने में सहायक सिद्ध होगी

यह परियोजना नगर निगम, वन विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में चलाई जा रही है, जो विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस ग्रीन कॉरिडोर के लिए टेकोमा, बोगनवेलिया और कनेर जैसी प्रजातियों के पौधों का चयन किया गया है। इन प्रजातियों का चुनाव सड़क किनारे की विशिष्ट भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है, ताकि वे आसानी से पनप सकें और कम रखरखाव में भी हरे-भरे रहें। ये पौधे न केवल सौंदर्य बढ़ाएंगे, बल्कि धूल और शोर को नियंत्रित करने में भी मदद करेंगे।

इस पहल का दोहरा उद्देश्य है: पहला, शहर के प्रवेश मार्ग को अधिक आकर्षक और सौंदर्यपूर्ण बनाना, जिससे यहां आने वाले लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़े और उन्हें एक स्वच्छ व सुंदर शहर का अनुभव हो; और दूसरा, सड़क सुरक्षा में सुधार लाना। हरियाली से भरे किनारे न केवल दृश्य प्रदूषण को कम करते हैं, बल्कि चालकों को अधिक आरामदायक ड्राइविंग अनुभव भी प्रदान करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम शहर की हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ इसे स्वच्छ और सुंदर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऐसे प्रयासों से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और शहरी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलती है, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक है

कुल मिलाकर, बस्तर जिला एक तरफ प्रकृति की चुनौती (भारी बारिश) का सामना कर रहा है, तो दूसरी तरफ विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम भी बढ़ा रहा है। हालांकि, 89 करोड़ के धान शॉर्टेज जैसे गंभीर वित्तीय मामलों पर जवाबदेही तय करना भी प्रशासन के लिए एक बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है, जिस पर आगे चलकर और स्पष्टीकरण की उम्मीद है।

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