छत्तीसगढ़ में फूड प्रोसेसिंग की बड़ी छलांग: निवेशकों के लिए नए अवसर
छत्तीसगढ़ अब केवल कृषि प्रधान राज्य ही नहीं, बल्कि फूड प्रोसेसिंग उद्योग का उभरता हुआ केंद्र भी बनता जा रहा है। राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीतियों, बेहतर बुनियादी ढांचे और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ रही है। धान, मक्का, दलहन, फल और वन उत्पादों की प्रचुर उपलब्धता ने फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को नई दिशा दी है।
राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को प्रोत्साहन दे रही है। इसके तहत उद्योगों को टैक्स में छूट, भूमि आवंटन में सुविधा और बिजली दरों में रियायत जैसी कई सुविधाएं दी जा रही हैं। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और बस्तर क्षेत्र में कई नई प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में ऑर्गेनिक उत्पादों और मिलेट आधारित खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से उद्योग को और मजबूती मिलेगी। राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में मिलने वाले वनोपज जैसे इमली, महुआ, चिरौंजी और कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाज अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना रहे हैं। इससे स्थानीय किसानों और स्व-सहायता समूहों को सीधा लाभ मिल रहा है।
फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में निवेश बढ़ने से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से विकास देखने को मिल रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख फूड प्रोसेसिंग हब के रूप में स्थापित करना है।
उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य में निवेशकों को “सिंगल विंडो सिस्टम” के जरिए तेज और पारदर्शी अनुमति प्रक्रिया उपलब्ध कराई जा रही है। इससे छोटे और बड़े दोनों प्रकार के निवेशकों को लाभ मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी गति से निवेश और नीतिगत सहयोग जारी रहा, तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ देश के सबसे बड़े कृषि आधारित उद्योग केंद्रों में शामिल हो सकता है।
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