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माता साहिब हासीदेवी की 200वीं जयंती पर सिंधी काउंसिल ने लगाए 200 पौधे

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माता साहिब हासीदेवी की 200वीं जयंती पर सिंधी काउंसिल ने लगाए 200 पौधे
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सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया छत्तीसगढ़ की युवा विंग और महिला विंग ने माता साहिब हासीदेवी की 200वीं जन्म जयंती के पावन अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए एक अनूठा पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम हाल ही में रायपुर के सेजबहार स्थित अष्टविनायक गुलमोहर ग्रीन में "एक पेड़ माता के नाम" अभियान के तहत संपन्न हुआ, जिसमें कुल 200 पौधे लगाए गए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पूज्य माता साहिब हासीदेवी की आध्यात्मिक विरासत का सम्मान करना और पर्यावरण के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना था। शदाणी दरबार के संत युधिष्ठिर लाल जी के दिव्य मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने पर्यावरण हितैषी दृष्टिकोण के साथ एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश दिया।

आध्यात्मिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण

इस विशेष पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन शदाणी दरबार की पूज्य माता साहिब हासीदेवी की 200वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में किया गया। माता साहिब हासीदेवी, जो सिंधी समुदाय में अपनी भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक शिक्षाओं के लिए जानी जाती हैं, उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए यह पहल की गई। सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष ललित जैसिंघ ने बताया कि यह अभियान संत युधिष्ठिर लाल जी के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य आध्यात्मिक मूल्यों को आधुनिक पर्यावरणीय चिंताओं से जोड़ना था। 200 पौधों का रोपण न केवल माता हासीदेवी के 200वें जन्मदिन को चिह्नित करता है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा और स्वस्थ वातावरण बनाने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। यह कार्यक्रम आस्था और प्रकृति के बीच के गहरे संबंध को उजागर करता है, जहां आध्यात्मिक प्रेरणा सामाजिक और पर्यावरणीय कल्याण के लिए कार्य करने का आधार बनती है।

गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति और सामुदायिक भागीदारी

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे इसकी गरिमा और बढ़ गई। ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू और रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदे साहू विशेष रूप से इस अवसर पर मौजूद रहे। युवा विंग अध्यक्ष जीतू लोहाना ने सभी उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया, उनकी उपस्थिति को कार्यक्रम की सफलता का एक महत्वपूर्ण कारक बताया। सिंधी काउंसिल के विभिन्न पदाधिकारी और सदस्य भी इस नेक कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हुए। इनमें प्रदेश अध्यक्ष ललित जैसिंघ, अष्टविनायक के एमडी विक्की लोहाना, महामंत्री सुनील कुकरेजा, संजय जैसिंघ, मोहन वलयानी, डॉ. एन.डी. गजवानी, पवन लोहाना, महिला विंग अध्यक्ष काजल सचदेव, महामंत्री लक्ष्मी बजाज, चंचलानी, महक होतवानी, चेयरमैन नीता कुकरेजा, उपाध्यक्ष रितेश वाधवा, धनेश मटलानी, अभय आठवानी, सुमीत आठवानी, हेमंत मेघानी, मनीष तलरेजा, राजकुमार तलरेजा, विशाल नारंग, लक्की कुकरेजा शामिल थे। इसके अतिरिक्त, युवा विंग टीम से रोशन ओछवानी, हरीश मांगतानी, राज कुकरेजा, रवि विजवानी, आशीष वासवानी, अविनाश खेतपाल और विशाल सचदेव ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इतनी बड़ी संख्या में सदस्यों की भागीदारी ने सामुदायिक भावना और एकजुटता का प्रदर्शन किया, जो ऐसे सामाजिक अभियानों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

"एक पेड़ माता के नाम" अभियान का महत्व

"एक पेड़ माता के नाम" अभियान केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का एक सशक्त प्रतीक हैअष्टविनायक गुलमोहर ग्रीन, सेजबहार (रायपुर) में 200 पौधे लगाकर, सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया ने शहर के हरित आवरण को बढ़ाने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया है। यह पहल युवाओं और महिलाओं को पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करती है, जिससे भविष्य में ऐसे और अधिक अभियानों की उम्मीद की जा सकती है। कार्यक्रम में लगाए गए पौधे आने वाले वर्षों में बड़े होकर न केवल हरियाली प्रदान करेंगे, बल्कि माता साहिब हासीदेवी की स्मृति को भी जीवित रखेंगे, जो हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीने का संदेश देती हैं। इस तरह के आयोजन समुदाय में पर्यावरणीय चेतना को मजबूत करते हैं और लोगों को अपने परिवेश की देखभाल के लिए प्रोत्साहित करते हैं

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भविष्य की दिशा और प्रेरणा

यह पौधरोपण कार्यक्रम सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को दर्शाता हैइस तरह के आयोजनों से न केवल तात्कालिक लाभ मिलते हैं, बल्कि वे दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव भी डालते हैं200 पौधों का रोपण कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और जैव विविधता को बढ़ावा देने में मदद करेगा। भविष्य में, सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया ऐसे और भी कई सामाजिक कल्याण और पर्यावरणीय संरक्षण के कार्यक्रमों को जारी रखने की योजना बना रही है, जिससे समुदाय और समाज दोनों को लाभ मिल सके। इस पहल ने एक मिसाल कायम की है कि कैसे धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों को समकालीन सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के साथ जोड़ा जा सकता है। यह आयोजन अन्य समुदायों और संगठनों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है ताकि वे भी इसी तरह की पहल कर सकें और एक स्वस्थ, हरित भविष्य के निर्माण में योगदान दे सकें।

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