विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस: रायगढ़ में मोटे अनाज से स्वस्थ भोजन का संदेश
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देशभर में 7 जून को मनाए गए विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर, रायगढ़ जिले के खाद्य सुरक्षा विभाग ने नागरिकों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दैनिक आहार में मोटे अनाज (मिलेट्स) को शामिल करने के लाभों पर प्रकाश डालना था, ताकि समुदाय में बेहतर पोषण और स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सके। विभाग ने विभिन्न सार्वजनिक स्थानों जैसे स्थानीय बाजारों, बस स्टैंडों, स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में पोस्टर और पंपलेट वितरित किए, जिनमें खाद्य सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांतों और मोटे अनाज के स्वास्थ्य लाभों का विस्तृत विवरण था। इस पहल का लक्ष्य जनता के बीच खाद्य जनित बीमारियों के जोखिम को कम करना और स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देना था।
स्वस्थ भोजन की महत्ता और मोटे अनाज का प्रचार
विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस हर साल लोगों को सुरक्षित भोजन के महत्व के बारे में शिक्षित करने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष, रायगढ़ में चलाए गए अभियान ने विशेष रूप से मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार, रागी, मक्का और कोदो के सेवन पर जोर दिया, जिन्हें अक्सर 'सुपरफूड' के रूप में जाना जाता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्रीमान राजेश वर्मा ने बताया कि, "मोटे अनाज फाइबर, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। इनका नियमित सेवन मधुमेह, हृदय रोग और मोटापे जैसी कई गैर-संक्रामक बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करता है।" उन्होंने आगे कहा कि, "भारत सरकार भी अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष 2023 के माध्यम से मोटे अनाज को बढ़ावा दे रही है, और हमारा प्रयास इसी राष्ट्रीय एजेंडे को स्थानीय स्तर पर लागू करना है।" वितरित किए गए पंपलेट में न केवल इन अनाजों के पोषण संबंधी लाभों का उल्लेख था, बल्कि उनके सुरक्षित भंडारण और तैयारी के तरीकों पर भी जानकारी दी गई थी, ताकि खाद्य सुरक्षा की दोहरी चुनौती का सामना किया जा सके।
जागरूकता अभियान की रणनीति और व्यापक पहुंच
खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस जागरूकता अभियान को सफल बनाने के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपनाई। पोस्टर और पंपलेट का वितरण केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं था, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी इन्हें पहुंचाया गया। विभाग ने स्थानीय स्वयं सहायता समूहों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से घर-घर जाकर जानकारी दी। प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक सभा स्थलों पर लघु वार्ताएं आयोजित की गईं, जहाँ विशेषज्ञों ने खाद्य सुरक्षा के महत्व और मोटे अनाज के फायदों पर सरल भाषा में जानकारी दी। इन वार्ताओं में हाथ धोने की सही तकनीक, भोजन को सही तापमान पर पकाना, कच्चे और पके भोजन को अलग रखना, और सुरक्षित पानी का उपयोग करना जैसे बुनियादी खाद्य सुरक्षा नियमों पर जोर दिया गया। अभियान के दौरान, लोगों को यह भी बताया गया कि कैसे वे अपने दैनिक भोजन में आसानी से मोटे अनाज को शामिल कर सकते हैं, जैसे कि रोटी, दलिया या उपमा के रूप में। विभाग ने स्थानीय स्कूलों में भी विशेष सत्र आयोजित किए, जहाँ बच्चों को स्वस्थ भोजन के बारे में सिखाया गया, क्योंकि वे अक्सर परिवार में खाद्य आदतों को प्रभावित करते हैं।
भविष्य की योजनाएं और जन स्वास्थ्य पर प्रभाव
रायगढ़ खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह जागरूकता अभियान केवल एक दिन की पहल नहीं है, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया का हिस्सा है। विभाग भविष्य में भी ऐसे ही जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहा है, जिसमें विभिन्न खाद्य सुरक्षा पहलुओं और पोषण संबंधी विषयों को शामिल किया जाएगा। इन प्रयासों का उद्देश्य दीर्घकालिक रूप से जिले की आबादी के पोषण स्तर में सुधार लाना और खाद्य जनित बीमारियों की घटनाओं को कम करना है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनीता देवी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, "खाद्य सुरक्षा और पोषण एक स्वस्थ समाज की नींव हैं। मोटे अनाज को बढ़ावा देने से न केवल कुपोषण से लड़ने में मदद मिलेगी, बल्कि यह किसानों के लिए भी लाभकारी होगा, क्योंकि ये अनाज कम पानी में भी उग सकते हैं।" विभाग ने जनता से अपील की है कि वे इन जानकारियों को अपने जीवन में अपनाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें, ताकि एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज का निर्माण हो सके। इस तरह के अभियानों से जन स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन आने की उम्मीद है, जिससे समुदाय की समग्र जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा।