छत्तीसगढ़ में 2027 की डिजिटल जनगणना शुरू, 51 हजार कर्मचारी मोबाइल ऐप से कर रहे घर-घर सर्वे
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2027 की डिजिटल जनगणना का पहला चरण शुरू हो गया है। इस बार जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीक आधारित बनाई गई है, जिसमें मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। राज्यभर में 51 हजार से अधिक कर्मचारियों और सर्वे कर्मियों को इस अभियान में लगाया गया है, जो घर-घर जाकर लोगों की जानकारी एकत्र कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि डिजिटल व्यवस्था से जनगणना अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक होगी।
राज्य प्रशासन के अनुसार, डिजिटल जनगणना के जरिए जनसंख्या, आवास, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक स्थिति और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी रियल टाइम में एकत्र की जाएगी। सर्वे कर्मचारियों को विशेष मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध कराया गया है, जिसके माध्यम से डेटा सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपलोड किया जा रहा है। इससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और आंकड़ों में त्रुटि की संभावना भी घटेगी।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक साथ अभियान
डिजिटल जनगणना अभियान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में एक साथ चलाया जा रहा है। सर्वे दल लोगों के घर पहुंचकर परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा स्तर, रोजगार, मकान की स्थिति, बिजली-पानी जैसी सुविधाओं और अन्य सामाजिक आंकड़ों की जानकारी जुटा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सही जानकारी उपलब्ध कराएं ताकि भविष्य की योजनाएं बेहतर तरीके से तैयार की जा सकें।
राज्य सरकार का कहना है कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े आने वाले वर्षों में विकास योजनाओं की दिशा तय करेंगे। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, आवास और ग्रामीण विकास से जुड़ी नीतियों के निर्माण में इन आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
मोबाइल ऐप से तुरंत अपलोड हो रहा डेटा
इस बार जनगणना की सबसे बड़ी खासियत डिजिटल तकनीक का उपयोग है। सर्वे कर्मचारी मोबाइल ऐप में जानकारी दर्ज करते ही डेटा सीधे ऑनलाइन सर्वर पर अपलोड कर रहे हैं। इससे डेटा संग्रहण की प्रक्रिया तेज हुई है और रिकॉर्ड सुरक्षित भी रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल प्रणाली से डुप्लीकेट एंट्री और गलत आंकड़ों की संभावना कम होगी।
जनगणना कर्मचारियों को पहले ही प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे ऐप का सही उपयोग कर सकें। कई जिलों में कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं, जहां से पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है। तकनीकी समस्या आने पर तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकार ने बताया भविष्य की योजनाओं के लिए अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना भविष्य की सरकारी योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। राज्य में किस क्षेत्र में कितनी आबादी है, किस वर्ग को अधिक सहायता की जरूरत है और किन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, इसका स्पष्ट आंकड़ा सरकार को मिलेगा। इससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
प्रशासन का कहना है कि जनगणना के आंकड़े रोजगार नीति, शिक्षा व्यवस्था, शहरी विकास और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विस्तार में उपयोग किए जाएंगे। इसके अलावा सामाजिक और आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर नई कल्याणकारी योजनाएं भी तैयार की जा सकती हैं।
लोगों से सहयोग की अपील
राज्य सरकार और प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि जनगणना टीम को सही और पूरी जानकारी दें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सभी व्यक्तिगत जानकारियां सुरक्षित रखी जाएंगी और उनका उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए किया जाएगा।
जनगणना कर्मचारियों को पहचान पत्र और आधिकारिक दस्तावेज भी दिए गए हैं ताकि लोग आसानी से उनकी पहचान कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
डिजिटल इंडिया अभियान को मिलेगा बल
विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में डिजिटल जनगणना की शुरुआत डिजिटल इंडिया अभियान को भी मजबूती देगी। तकनीक आधारित सर्वे से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी डेटा प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा। आने वाले समय में अन्य सरकारी सर्वेक्षणों में भी इसी मॉडल का उपयोग किया जा सकता है।
राज्य में पहली बार इतने बड़े स्तर पर डिजिटल माध्यम से जनगणना हो रही है। ऐसे में यह अभियान प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीकी उपयोग का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है तो भविष्य में सरकारी डेटा संग्रहण की पूरी व्यवस्था डिजिटल मॉडल पर आधारित हो सकती है।
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