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छत्तीसगढ़ का आजीविका मॉडल: केंद्रीय मंत्री **पासवान** ने सराहा, अन्य राज्यों को प्रेरणा

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छत्तीसगढ़ का आजीविका मॉडल: केंद्रीय मंत्री **पासवान** ने सराहा, अन्य राज्यों को प्रेरणा
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केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के दूरदर्शी आजीव...

केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के दूरदर्शी आजीविका मॉडल की प्रशंसा की, इसे देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का जीवंत स्रोत बताया। उन्होंने जोर दिया कि कैसे छत्तीसगढ़ ने स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग और ग्रामीण समुदायों को सशक्त करके गरीबी उन्मूलन और आर्थिक विकास में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। मंत्री पासवान ने यह टिप्पणी नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दौरान की, जहाँ उन्होंने छत्तीसगढ़ द्वारा अपनाए गए समग्र दृष्टिकोण और उसके सकारात्मक परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मॉडल दिखाता है कि कैसे नवाचार, प्रतिबद्धता और जनभागीदारी से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदली जा सकती है।

छत्तीसगढ़ मॉडल की मुख्य विशेषताएं और सफलता के स्तंभ

छत्तीसगढ़ का आजीविका मॉडल कई नवीन पहलों और योजनाओं का सुसंगठित संगम है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने पर केंद्रित है। इस मॉडल का प्रमुख स्तंभ स्व-सहायता समूह (SHGs) हैं, जिन्होंने राज्य में महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं छोटे-बड़े व्यवसाय चला रही हैं, जिससे न केवल उनकी व्यक्तिगत आय बढ़ी है, बल्कि वे स्थानीय बाजारों को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। मंत्री पासवान ने विशेष रूप से गौठानों की अवधारणा की सराहना की, जो गांवों में पशुधन प्रबंधन, जैविक खाद उत्पादन और ग्रामीण औद्योगिक पार्कों (RIPAs) के केंद्र बन गए हैं।

गौठान केवल मवेशियों के लिए आश्रय स्थल नहीं, बल्कि बहुउद्देशीय ग्रामीण...

गौठान केवल मवेशियों के लिए आश्रय स्थल नहीं, बल्कि बहुउद्देशीय ग्रामीण आजीविका केंद्र बन गए हैं। यहां महिला स्व-सहायता समूह वर्मीकम्पोस्ट का उत्पादन करते हैं, जिसे किसानों को बेचा जाता है, जिससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है। इसके अतिरिक्त, इन गौठानों में तेल निष्कर्षण इकाइयों, आटा चक्कियों और प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की गई है, जो स्थानीय उत्पादों को मूल्यवर्धित करती हैं और ग्रामीणों के लिए नियमित आय का स्रोत बनती हैं। कमलेश पासवान ने कहा कि यह मॉडल कचरे से कंचन बनाने के सिद्धांत पर काम करता है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करता है, जिससे पलायन में कमी आती है और स्थानीय स्तर पर समृद्धि आती है।

महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की नई गाथा

छत्तीसगढ़ के आजीविका मॉडल की सबसे प्रभावशाली विशेषताओं में से एक महिला सशक्तिकरण पर इसका गहरा प्रभाव है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से राज्य की लाखों महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। ये समूह उन्हें न केवल वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं, बल्कि कौशल विकास प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच भी सुनिश्चित करते हैं। महिलाएं अब सिलाई, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि उत्पाद विपणन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। उनकी बढ़ी हुई आय ने उनके

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