गरियाबंद में आस्था के रंग में रंगा तीजा पर्व, शिव-पार्वती की भक्ति में लीन रहीं महिलाएं
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गरियाबंद। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और नारी आस्था का प्रमुख पर्व हरितालिका तीजा मंगलवार को गरियाबंद जिले में श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। जिला मुख्यालय स्थित पुराना मंगल बाजार में बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं और युवतियों ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की।
व्रतधारी महिलाओं ने निर्जला उपवास रखकर पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं कुंवारी युवतियों ने सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए तीजा व्रत रखा। पारंपरिक परिधानों, आभूषणों, मेहंदी और सोलह श्रृंगार से सजी महिलाओं ने पर्व की खूबसूरती बढ़ा दी।
शिव-पार्वती के प्रेम और मिलन का प्रतीक
धार्मिक मान्यता के अनुसार हरितालिका तीज माता पार्वती की कठोर तपस्या और भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने की कथा से जुड़ा है। इसी मान्यता के चलते महिलाएं श्रद्धापूर्वक कठिन व्रत रखती हैं। तीजा को दांपत्य प्रेम, समर्पण और पारिवारिक सुख-शांति का प्रतीक भी माना जाता है।
करू भात से शुरू होती है व्रत की परंपरा
छत्तीसगढ़ में तीजा पर्व की अपनी विशिष्ट लोकपरंपराएं हैं। व्रत से एक दिन पहले महिलाएं करू भात ग्रहण करती हैं। इसके बाद निर्जला व्रत शुरू होता है। पूजा में गौर माता और शिव-पार्वती की प्रतिमाएं स्थापित कर हल्दी, कुमकुम, चंदन, बेलपत्र, सुहाग सामग्री और फलों से विधि-विधानपूर्वक पूजा की जाती है।
रात्रि में भजन-कीर्तन, जागरण और पारंपरिक तीजा गीतों का आयोजन होता है। लोकगीतों और सामूहिक पूजा के बीच छत्तीसगढ़ी संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली।
पुराना मंगल बाजार में दिखी संस्कृति की छटा
पुराना मंगल बाजार में फूलों से सजे फुलेरा, झूले और पारंपरिक सजावट आकर्षण का केंद्र रहे। महिलाओं के समूहों में तीजा गीतों की गूंज सुनाई देती रही। मेहंदी, पारंपरिक गहनों और श्रृंगार से सजी महिलाओं ने पर्व को खास बना दिया।
भारती सिन्हा ने कहा कि तीजा भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम, विश्वास और एकता का प्रतीक है। वहीं लक्ष्मी सिन्हा ने तीजा को आस्था और छत्तीसगढ़ी संस्कृति को जोड़ने वाला पर्व बताया।
अंजली सिन्हा ने कहा कि करू भात से शुरू होकर निर्जला तपस्या तक पहुंचने वाला तीजा नारी शक्ति, प्रेम और समर्पण की मिसाल है।
पूजा-अर्चना में रेणुका सिन्हा, राधिका सिन्हा और अंजली सिन्हा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। सामूहिक पूजा और लोकगीतों के बीच गरियाबंद में तीजा पर्व ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा और नारी शक्ति की खूबसूरत तस्वीर पेश की।
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