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जगदलपुर में नेत्रोत्सव से गोंचा महापर्व का आगाज, कल रथयात्रा

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जगदलपुर में नेत्रोत्सव से गोंचा महापर्व का आगाज, कल रथयात्रा
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग स्थित जगदलपुर शहर आज एक बार फिर भक्ति, परंपरा और संस्कृति के अद्भुत संगम का साक्षी बना, जहाँ भगवान जगन्नाथ के नेत्रोत्सव के साथ सदियों पुराने गोंचा महापर्व की औपचारिक शुरुआत हो गई। अनशन काल के बाद आज भगवान जगन्नाथ को दिव्य श्रृंगार में सजाकर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए गए, जिसके बाद पूरे शहर में कल होने वाली भव्य रथयात्रा के लिए उत्साह का माहौल है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि बस्तर की अनूठी सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाता है।

भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम: नेत्रोत्सव

जगदलपुर के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में नेत्रोत्सव कार्यक्रम पूरे विधि-विधान और असीम श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। यह वह पवित्र दिन होता है, जब भगवान जगन्नाथ, अपने अनशन काल (जिस दौरान भगवान बीमार माने जाते हैं और एकांतवास में रहते हैं) के बाद पहली बार भक्तों को सुसज्जित और आकर्षक रूप में दर्शन देते हैं। आज सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी, जिन्होंने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और महालक्ष्मी के दिव्य विग्रहों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर के पुजारियों ने बताया कि नेत्रोत्सव भगवान की आँखों का खुलने और भक्तों को पूर्ण दर्शन देने का प्रतीक है, जो उनके स्वास्थ्य लाभ को दर्शाता है। इस अवसर पर भगवान को विशेष प्रकार के फूलों, वस्त्रों और आभूषणों से सजाया गया था, जिसे 'दिव्य श्रृंगार' कहा गया। श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान रहा, और हर भक्त की आँखों में अपने आराध्य के प्रथम दर्शन की अलौकिक चमक स्पष्ट दिखाई दे रही थी।

कल निकलेगी भव्य रथयात्रा: उत्साह का माहौल

नेत्रोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह गोंचा महापर्व की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है, क्योंकि इसके ठीक अगले ही दिन भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ भव्य रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं। यह परंपरा भगवान को भक्तों के और करीब लाती है, जिससे हर वर्ग और हर समुदाय के लोग भी भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकें। जगदलपुर शहर में कल निकलने वाली इस रथयात्रा के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं। रथ को पारंपरिक रूप से सजाया जा रहा है और हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए आतुर हैं। रथयात्रा के दौरान भक्तगण श्रद्धापूर्वक रथ को खींचते हैं, जिसे मोक्षदायिनी सेवा माना जाता है। यह यात्रा शहर की मुख्य सड़कों से होकर गुजरेगी, जहाँ जगह-जगह भक्तों द्वारा भगवान का स्वागत किया जाएगा और प्रसाद वितरण होगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह जगदलपुर की सांस्कृतिक पहचान का भी एक अभिन्न अंग है।

बस्तर की सदियों पुरानी अनूठी परंपरा

बस्तर में गोंचा महापर्व की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे पुरी की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा का एक छोटा किंतु अत्यंत विशिष्ट स्वरूप माना जाता है। यहाँ की विशेषता यह है कि सर्व समाज मिलकर इस उत्सव को भव्यता प्रदान करता है, जो सामाजिक समरसता का एक बेजोड़ उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस आयोजन में 360 आरण्यक ब्राह्मण, उत्कल ब्राह्मण और आदिवासी समाज के लोग मिलकर इस महापर्व को जीवंत बनाते हैं। यह सहभागिता दर्शाती है कि कैसे धार्मिक आस्था विभिन्न समुदायों को एक सूत्र में पिरोती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बस्तर के राजाओं ने पुरी की तर्ज पर यहाँ भी इस पर्व को शुरू किया था, जिससे यहाँ के निवासियों को भी भगवान जगन्नाथ की कृपा प्राप्त हो सके। यह उत्सव केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और महालक्ष्मी के विग्रहों के साथ यह उत्सव आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन जाता है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि भगवान स्वयं भक्तों के बीच आकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं, और बस्तर का यह गोंचा महापर्व इसी दिव्य भावना को साकार करता है।

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