यूनिसेफ कार्यशाला: मीडिया स्तनपान, स्वस्थ आहार से लाएगा सामाजिक बदलाव
इस खबर की वेब स्टोरी देखें
रायपुर। विश्व स्तनपान सप्ताह से पहले, यूनिसेफ ने मातृ एवं शिशु पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में होटल सयाजी में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय "विश्व स्तनपान सप्ताह एवं स्वस्थ आहार" था। इस कार्यशाला में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। चर्चा का केंद्र वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग के माध्यम से समाज में सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देना था, विशेषकर स्तनपान और स्वस्थ आहार के क्षेत्र में। यूनिसेफ का मानना है कि मीडिया केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त वाहक है, जो भ्रांतियों को दूर कर हर बच्चे को स्वस्थ जीवन की शुरुआत सुनिश्चित कर सकता है।
मीडिया: सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम
यूनिसेफ के कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट, अनिल गुलाटी ने कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि मीडिया केवल सूचना प्रसारित करने का एक माध्यम मात्र नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन लाने का एक अत्यंत प्रभावी और शक्तिशाली वाहक है। गुलाटी ने जोर दिया कि तथ्यपरक और वैज्ञानिक जानकारी पर आधारित रिपोर्टिंग समाज में व्याप्त विभिन्न भ्रांतियों और गलत धारणाओं को सफलतापूर्वक दूर कर सकती है। इसके साथ ही, यह परिवारों को ऐसे व्यवहारों को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है, जो प्रत्येक बच्चे के जीवन को एक स्वस्थ और मजबूत शुरुआत प्रदान करें। उन्होंने बताया कि सही जानकारी और जागरूकता के माध्यम से, मीडिया पोषण संबंधी चुनौतियों का समाधान करने और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है, जिससे दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव पड़ें। मीडिया के पास यह शक्ति है कि वह समाज में गहरी जड़ें जमा चुकी गलतफहमियों को चुनौती दे और उन्हें वैज्ञानिक तथ्यों से प्रतिस्थापित करे, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार हो। यह सुनिश्चित करना मीडिया का दायित्व है कि वह विश्वसनीय और सत्यापित जानकारी ही जनता तक पहुंचाए।
स्तनपान: शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार और साझा जिम्मेदारी
यूनिसेफ की न्यूट्रिशन स्पेशलिस्ट, डॉ. अपर्णा देशपांडे ने स्तनपान के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण एवं सर्वोत्तम आहार है, जो जीवन के पहले छह महीनों तक उसकी सभी पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरी तरह से पूरा करता है। डॉ. देशपांडे ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मां का दूध बच्चे के स्वस्थ भविष्य की एक मजबूत नींव रखता है, उसे बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है और उसके शारीरिक तथा मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सफल स्तनपान केवल मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार और समाज की एक साझा जिम्मेदारी है। गर्भावस्था से लेकर स्तनपान की पूरी अवधि तक, मां को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सहयोग मिलना अत्यंत आवश्यक है, जिसमें पति और परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सहयोग मां को बिना किसी तनाव या सामाजिक दबाव के अपने शिशु को सर्वोत्तम पोषण प्रदान करने में सक्षम बनाता है। यह सामूहिक प्रयास ही एक स्वस्थ शिशु और स्वस्थ समाज की दिशा में पहला कदम है, जहां हर बच्चे को जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत मिले।
कानूनी संरक्षण और पोषण का व्यापक दृष्टिकोण
डॉ. अपर्णा देशपांडे ने स्तनपान को संरक्षण और प्रोत्साहन देने के लिए बनाए गए आईएमएस अधिनियम 1992 (Infant Milk Substitutes, Feeding Bottles and Infant Foods (Regulation of Production, Supply and Distribution) Act) का भी उल्लेख किया। यह अधिनियम शिशु दूध के विकल्प, फीडिंग बॉटल और शिशु आहार के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को विनियमित करता है, ताकि स्तनपान को किसी भी प्रकार से बाधित न किया जा सके और माताओं को कृत्रिम उत्पादों के लिए गुमराह न किया जाए। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि मीडिया इस कानून के बारे में जागरूकता फैलाकर और इसके प्रावधानों को उजागर करके स्तनपान के पक्ष में एक मजबूत माहौल बनाने में सहायक हो सकता है। अधिनियम का उद्देश्य मां के दूध के महत्व को बनाए रखना और शिशु आहार उद्योग द्वारा किए जा सकने वाले किसी भी अनैतिक प्रचार को रोकना है। पोषण का यह व्यापक दृष्टिकोण केवल स्तनपान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गर्भवती माताओं के लिए स्वस्थ आहार, बच्चों के लिए पूरक पोषण और पूरे समुदाय के लिए सही खान-पान की आदतों को बढ़ावा देना भी शामिल है। यूनिसेफ का मानना है कि मीडिया इन सभी पहलुओं पर प्रकाश डालकर समाज में पोषण संबंधी जागरूकता को अगले स्तर पर ले जा सकता है, जिससे स्वस्थ पीढ़ियों का निर्माण संभव हो सके।
और पढ़ें
- छत्तीसगढ़ न्यूज़
- ताज़ा खबरें
- छत्तीसगढ़ के छह शहरों में लगेगा स्वदेशी मेला, सीएम साय ने किया पोस्टर-ब्रोशर विमोचन
- खरोरा में गणेश चतुर्थी की धूम, ‘खरोरा के राजा’ के भव्य गणेशोत्सव की तैयारियां पूरी
- छत्तीसगढ़ कैबिनेट के ऐतिहासिक फैसले: आयु सीमा बढ़ी, युवाओं को उद्यमिता का अवसर
- केंद्रीय मंत्री शिवराज का छत्तीसगढ़ दौरा: सक्ती में 122 करोड़ की सौगात, PM आवासों में गृह प्रवेश