जल जीवन मिशन पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगी जवाबदेही
देशभर में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) पर अब न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने मिशन के क्रियान्वयन में हो रही देरी, अनियमितताओं और गुणवत्ता से जुड़े सवालों पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि योजनाओं की घोषणा के साथ-साथ उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है।
दरअसल, कई जिलों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही थीं कि गांवों में पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा है, पानी की सप्लाई नियमित नहीं है और जहां सप्लाई हो रही है वहां पानी की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। इन शिकायतों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह लक्ष्य अभी अधूरा नजर आ रहा है। कोर्ट ने पूछा कि अब तक कितने घरों में नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की गई है और कितने प्रोजेक्ट समयसीमा से पीछे चल रहे हैं। साथ ही, यह भी जानना चाहा कि गुणवत्ता नियंत्रण के लिए कौन-कौन से उपाय किए जा रहे हैं।
सरकार से मांगी गई विस्तृत जानकारी।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह निम्न बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी प्रस्तुत करे:।
- कितने गांवों में पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा हुआ
- कितने घरों को नल कनेक्शन दिए गए
- जल गुणवत्ता की जांच के लिए क्या तंत्र मौजूद है
- परियोजनाओं में देरी के कारण और जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यह निर्देश प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक समस्या।
ग्रामीण इलाकों में जल जीवन मिशन की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई जा रही है। कई जगहों पर पाइपलाइन तो बिछाई गई है, लेकिन पानी की सप्लाई नियमित नहीं है। कुछ गांवों में तो केवल कागजों में ही कनेक्शन दिखाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें आज भी पुराने जल स्रोतों जैसे हैंडपंप और कुओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए केवल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी निरंतर निगरानी और रखरखाव भी जरूरी है। अगर समय पर मेंटेनेंस नहीं किया गया, तो पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
गुणवत्ता पर भी उठे सवाल।
हाई कोर्ट ने जल की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई है। कई क्षेत्रों से दूषित पानी की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या नियमित जांच की जा रही है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी से जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे ग्रामीण आबादी सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। इसलिए, केवल पानी पहुंचाना ही नहीं बल्कि सुरक्षित और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।
सरकार की सफाई।
सरकार की ओर से कहा गया है कि जल जीवन मिशन के तहत तेजी से काम किया जा रहा है और कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अधिकारियों का दावा है कि तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों के कारण कुछ परियोजनाओं में देरी हुई है, लेकिन उन्हें जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि गुणवत्ता नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है और नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। हालांकि, अदालत ने इन दावों पर संतोष जताने के बजाय ठोस आंकड़ों और प्रमाण की मांग की है।
जवाबदेही तय करने पर जोर।
हाई कोर्ट का यह सख्त रुख प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोर्ट के निर्देशों का सही तरीके से पालन किया गया, तो जल जीवन मिशन की गति तेज हो सकती है और लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
निष्कर्ष।
जल जीवन मिशन देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल की समस्या को हल करने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी पहल है। लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए केवल योजनाएं बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। हाई कोर्ट के सख्त रुख से उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी और हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने का लक्ष्य जल्द ही पूरा किया जा सकेगा।
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