मिड-डे मील योजना पर हाईकोर्ट सख्त, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर दिए कड़े निर्देश
राज्य में बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़ी अहम योजना मिड-डे मील योजना को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बच्चों को मिलने वाला भोजन न सिर्फ पर्याप्त होना चाहिए बल्कि उसकी गुणवत्ता भी तय मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित विभागों को निर्देश देते हुए कहा कि मिड-डे मील योजना का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र पोषण और स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। ऐसे में यदि कहीं भी खराब भोजन, गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की शिकायत मिलती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
गुणवत्ता पर उठे सवाल, कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान कई याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया था कि कई स्कूलों में बच्चों को घटिया और अस्वच्छ भोजन दिया जा रहा है। कुछ जगहों पर भोजन में कीड़े मिलने और समय पर भोजन न मिलने की शिकायतें भी सामने आईं। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
कोर्ट ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही जिला स्तर पर नियमित निरीक्षण करने और भोजन की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने के निर्देश
हाईकोर्ट ने मिड-डे मील योजना में पारदर्शिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि हर स्कूल में भोजन की गुणवत्ता, मेन्यू और वितरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा अभिभावकों और स्थानीय समितियों को भी निगरानी प्रक्रिया में शामिल करने की बात कही गई है।
कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि तकनीक का उपयोग कर निगरानी को मजबूत किया जाए, जैसे कि ऑनलाइन रिपोर्टिंग सिस्टम और रियल-टाइम मॉनिटरिंग। इससे योजना में हो रही गड़बड़ियों पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।
पोषण स्तर सुधारने पर जोर
मिड-डे मील योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को कम करना है। हाईकोर्ट ने कहा कि भोजन में आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर आहार बच्चों को दिया जाए ताकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सके।
कोर्ट ने यह भी कहा कि मेन्यू में विविधता लाई जाए ताकि बच्चों को संतुलित आहार मिल सके। एक ही प्रकार का भोजन लगातार देने से बच्चों में पोषण की कमी हो सकती है।
जिम्मेदारी तय करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि योजना में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। संबंधित अधिकारियों, स्कूल प्रबंधन और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई हो।
कोर्ट ने कहा कि मिड-डे मील योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना में भ्रष्टाचार या लापरवाही समाज के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जिसे किसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सरकार ने दिए सुधार के आश्वासन
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को आश्वासन दिया गया कि मिड-डे मील योजना को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि भोजन की गुणवत्ता और समय पर वितरण सुनिश्चित किया जाए।
सरकार ने यह भी कहा कि शिकायतों के निवारण के लिए हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा ताकि किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके।
निष्कर्ष
मिड-डे मील योजना पर हाईकोर्ट का सख्त रुख यह दर्शाता है कि बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कोर्ट के निर्देशों से उम्मीद है कि योजना में सुधार होगा और बच्चों को बेहतर पोषण मिल सकेगा।
यह फैसला न केवल प्रशासन के लिए चेतावनी है बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि बच्चों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सभी को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।
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