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रायगढ़ में अनोखा ‘हाथी मिशन’ सफल, मानव-हाथी संघर्ष में आई बड़ी कमी

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रायगढ़ में अनोखा ‘हाथी मिशन’ सफल, मानव-हाथी संघर्ष में आई बड़ी कमी
रायगढ़

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में चलाया गया अनोखा ‘हाथी मिशन’ अब सफलता की नई मिसाल बन गया है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई इस पहल ने न सिर्फ जंगली हाथियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद की, बल्कि मानव-हाथी संघर्ष को भी काफी हद तक कम किया है। यह मिशन राज्य के अन्य संवेदनशील इलाकों के लिए भी एक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

क्या है ‘हाथी मिशन’?

रायगढ़ जिले के वन क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से हाथियों की बढ़ती आवाजाही के कारण ग्रामीणों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। फसलों की बर्बादी, मकानों को नुकसान और कई बार जान-माल की हानि जैसी घटनाएं सामने आ रही थीं। इस समस्या के समाधान के लिए वन विभाग ने ‘हाथी मिशन’ की शुरुआत की।

इस मिशन के तहत हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। ड्रोन कैमरे, जीपीएस ट्रैकिंग और अलर्ट सिस्टम के माध्यम से हाथियों की लोकेशन का पता लगाया जाने लगा। जैसे ही हाथियों का झुंड किसी गांव की ओर बढ़ता, ग्रामीणों को तुरंत सतर्क कर दिया जाता।

ग्रामीणों की सहभागिता बनी ताकत

इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत रही स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी। गांवों में ‘हाथी मित्र दल’ बनाए गए, जो वन विभाग के साथ मिलकर काम करते हैं। ये दल रात में निगरानी करते हैं और हाथियों को सुरक्षित दिशा में मोड़ने में मदद करते हैं।

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ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए कई शिविर भी आयोजित किए गए, जिनमें उन्हें बताया गया कि हाथियों से कैसे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किन परिस्थितियों में क्या कदम उठाएं। इससे लोगों में भय कम हुआ और जागरूकता बढ़ी।

तकनीक और परंपरा का संगम

‘हाथी मिशन’ में सिर्फ आधुनिक तकनीक ही नहीं, बल्कि पारंपरिक तरीकों का भी उपयोग किया गया। ढोल-नगाड़ों, मशालों और मधुमक्खी के छत्तों जैसी तकनीकों से हाथियों को खेतों से दूर रखने के प्रयास किए गए। यह तरीका काफी प्रभावी साबित हुआ।

नुकसान में आई कमी

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस मिशन के लागू होने के बाद मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। फसल नुकसान के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं ग्रामीणों की सुरक्षा भी पहले से बेहतर हुई है।

सरकार और वन विभाग की पहल

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मिशन को विशेष प्राथमिकता दी है। वन अधिकारियों का कहना है कि यह पहल राज्य के अन्य जिलों में भी लागू की जाएगी, जहां हाथियों का खतरा बना रहता है। इसके लिए अतिरिक्त बजट और संसाधनों की भी व्यवस्था की जा रही है।

भविष्य की योजना

आने वाले समय में ‘हाथी मिशन’ को और मजबूत बनाने की योजना है। इसमें और अधिक उन्नत तकनीकों को शामिल किया जाएगा, जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम और मोबाइल ऐप के जरिए रियल-टाइम अपडेट। साथ ही, ग्रामीणों को आर्थिक सहायता और बीमा योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा।

निष्कर्ष

रायगढ़ का ‘हाथी मिशन’ इस बात का उदाहरण है कि अगर प्रशासन, तकनीक और जनता मिलकर काम करें तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव है। यह पहल न केवल वन्यजीव संरक्षण में मददगार साबित हुई है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन को भी सुरक्षित और संतुलित बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। आने वाले समय में यह मॉडल पूरे देश में लागू किया जा सकता है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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