ग्रैंड विजन-अशोक शर्मा विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, रिटायर्ड जस्टिस धीरेन्द्र मिश्रा बने एकल आर्बिट्रेटर | Raipur News Today
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आज की रायपुर खबर के अनुसार... बिलासपुर/रायपुर। ग्रैंड विजन और दुर्ग निवासी केबल ऑपरेटर अशोक कुमार शर्मा के बीच व्यावसायिक समझौते से जुड़े करीब एक करोड़ रुपये के विवाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति से सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस धीरेन्द्र मिश्रा को एकल आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है। अब आर्बिट्रेटर दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद की नियमानुसार सुनवाई करेंगे।
यह आदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस कृष्णा राम महापात्रा ने पारित किया। मामले में आवेदक गुरुचरण सिंह होरा और प्रतिवादी अशोक कुमार शर्मा हैं।
आवेदक पक्ष के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच 30 जनवरी 2023 को एक व्यावसायिक समझौता हुआ था। इसमें नेटवर्क संचालन से संबंधित शर्तें तय की गई थीं। समझौते के क्लॉज 6.3 में विवाद की स्थिति में आर्बिट्रेशन के माध्यम से समाधान का प्रावधान किया गया था।
आवेदक पक्ष ने कोर्ट को बताया कि समझौते के तहत ग्रैंड विजन के एक भागीदार द्वारा नेटवर्क संचालन के उद्देश्य से अशोक शर्मा को करीब एक करोड़ रुपये की राशि दी गई थी। इसके लिए दोनों पक्षों के बीच अनुबंध भी हुआ था।
ग्रैंड विजन की ओर से आरोप लगाया गया कि राशि और समझौते के बाद नेटवर्क संचालन को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और मामले को लेकर लगातार टालमटोल की स्थिति बनी रही। आवेदक पक्ष के अनुसार, नेटवर्क संचालन शुरू करने के लिए कई बार आग्रह किया गया, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हो सका।
मामले में दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतों और कानूनी कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया। ग्रैंड विजन की ओर से उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर शिकायत दर्ज कराने और कानूनी नोटिस भेजे जाने की बात कोर्ट के समक्ष रखी गई। आवेदक पक्ष के अनुसार, नोटिस का जवाब नहीं मिलने के बाद आर्बिट्रेशन के लिए हाईकोर्ट का रुख किया गया।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष की ओर से आर्बिट्रेटर की नियुक्ति पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की सहमति के बाद हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त जस्टिस धीरेन्द्र मिश्रा को मामले का एकल आर्बिट्रेटर नियुक्त किया।
हाईकोर्ट ने संबंधित रिकॉर्ड आर्बिट्रेटर को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने का निर्देश दिया है। आर्बिट्रेटर का पारिश्रमिक दोनों पक्षों की आपसी सहमति से निर्धारित किया जाएगा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जस्टिस धीरेन्द्र मिश्रा दोनों पक्षों के बीच उत्पन्न विवाद की आर्बिट्रेशन के माध्यम से सुनवाई करेंगे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने आर्बिट्रेशन रिक्वेस्ट एप्लीकेशन का निपटारा कर दिया।
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