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AIIMS रायपुर की रिपोर्ट—बच्चों में बढ़ रही गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं, विशेषज्ञों की चेतावनी | Raipur News Today

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AIIMS रायपुर की रिपोर्ट—बच्चों में बढ़ रही गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं, विशेषज्ञों की चेतावनी | Raipur News Today
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आज की रायपुर खबर के अनुसार... AIIMS Raipur की हालिया रिपोर्ट ने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक स्थिति उजागर की है। रिपोर्ट के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में बच्चों में कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के मामले तेजी से बढ़े हैं। इनमें कुपोषण, श्वसन संबंधी रोग, मोटापा, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और स्क्रीन टाइम से जुड़ी परेशानियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में यह एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ सहित देश के कई हिस्सों में बच्चों में कुपोषण की समस्या अभी भी व्यापक है। ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण की कमी के कारण बच्चों की शारीरिक और मानसिक वृद्धि प्रभावित हो रही है। वहीं शहरी क्षेत्रों में जंक फूड और अनियमित जीवनशैली के कारण मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। यह दोहरी समस्या बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है।

विशेषज्ञों ने क्या बताया

विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों में श्वसन संबंधी बीमारियों के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है। प्रदूषण, धूल और खराब वायु गुणवत्ता इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। खासकर छोटे बच्चों में अस्थमा और एलर्जी के मामलों में तेजी आई है। डॉक्टरों का कहना है कि बदलते पर्यावरणीय हालात और जीवनशैली इसका मुख्य कारण हैं।

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी रिपोर्ट में चिंता जताई गई है। बच्चों में तनाव, चिंता और अवसाद जैसे लक्षण पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रहे हैं। पढ़ाई का दबाव, डिजिटल डिवाइस का अधिक उपयोग और सामाजिक अलगाव इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

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रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों की आंखों और नींद पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर का अत्यधिक उपयोग बच्चों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। इससे उनकी शारीरिक गतिविधि कम हो रही है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं जन्म ले रही हैं।

डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे बच्चों के खान-पान पर विशेष ध्यान दें और उन्हें संतुलित आहार प्रदान करें। साथ ही बच्चों को नियमित रूप से खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में शामिल करना जरूरी है। डिजिटल उपकरणों के उपयोग को सीमित करना भी अत्यंत आवश्यक बताया गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूलों और समुदाय स्तर पर भी जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच और समय पर इलाज से कई गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

रिपोर्ट यह स्पष्ट संकेत देती है कि बच्चों का स्वास्थ्य केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज और सरकार की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि अभी से सही कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में बच्चों का स्वास्थ्य एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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