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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में नई व्यवस्था से घटा मानव-वन्यजीव टकराव

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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में नई व्यवस्था से घटा मानव-वन्यजीव टकराव
छत्तीसगढ़

 छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव टकराव को कम करने के लिए एक नई और प्रभावी रणनीति सामने आई है। राज्य के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में “फायर और वाटर वॉचर्स” की तैनाती के साथ-साथ जल स्रोतों का विकास और आधुनिक तकनीक के उपयोग ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। पिछले तीन वर्षों में यहां कोई बड़ी मानव-वन्यजीव टकराव की घटना सामने नहीं आई है, जो इस मॉडल की सफलता को दर्शाता है।

जल स्रोतों ने बदली तस्वीर

टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 750 से अधिक कृत्रिम और प्राकृतिक जल स्रोत विकसित किए गए हैं। गर्मियों के दौरान जब पानी की कमी होती है, तब जंगली जानवर पानी की तलाश में गांवों की ओर रुख करते हैं। लेकिन अब जंगल के भीतर ही पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से जानवरों का गांवों की ओर जाना काफी हद तक कम हो गया है। इससे ग्रामीणों की सुरक्षा बढ़ी है और पशुधन को होने वाले नुकसान में भी कमी आई है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जल स्रोतों के नियमित रखरखाव और समय-समय पर सफाई के कारण यह व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ साबित हो रही है। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार में भी संतुलन बना हुआ है।

“फायर और वाटर वॉचर्स” की अहम भूमिका

वन विभाग ने जंगलों में “फायर और वाटर वॉचर्स” की नियुक्ति की है, जिनका काम आग की घटनाओं पर नजर रखना और जल स्रोतों की निगरानी करना है। ये वॉचर्स स्थानीय ग्रामीणों में से ही चुने गए हैं, जिससे उन्हें क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति की बेहतर समझ होती है।

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यह पहल रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रही है और स्थानीय लोगों को वन संरक्षण से जोड़ रही है। इससे समुदाय और वन विभाग के बीच सहयोग मजबूत हुआ है, जो मानव-वन्यजीव टकराव को कम करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

ड्रोन तकनीक से आग पर नियंत्रण

जंगलों में आग की घटनाएं वन्यजीवों के लिए बड़ी चुनौती होती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए टाइगर रिजर्व में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन के जरिए दूर-दराज के इलाकों में भी आग की शुरुआती स्थिति का पता लगाया जा सकता है और समय रहते उसे नियंत्रित किया जा सकता है।

ड्रोन निगरानी से न केवल जंगल सुरक्षित हो रहे हैं, बल्कि वन्यजीवों का आवास भी सुरक्षित बना हुआ है। इससे जानवरों के विस्थापन की संभावना कम हुई है, जो अक्सर मानव-वन्यजीव संघर्ष का मुख्य कारण बनती है।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में नई व्यवस्था से घटा मानव-वन्यजीव टकराव
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में नई व्यवस्था से घटा मानव-वन्यजीव टकराव

ग्रामीणों को मिला राहत

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा आसपास के गांवों को मिला है। पहले जहां जंगली जानवरों के गांव में घुसने की घटनाएं आम थीं, अब उनमें स्पष्ट कमी आई है। किसानों की फसलों और पशुधन को होने वाले नुकसान में भी गिरावट दर्ज की गई है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अब वे पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वन विभाग की पहल ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है और जंगलों के प्रति उनकी सोच भी बदली है।

संरक्षण के साथ विकास का संतुलन

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल वन संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का एक सफल उदाहरण है। जल प्रबंधन, स्थानीय सहभागिता और तकनीक का संयोजन इस पहल को खास बनाता है।

अगर इस मॉडल को राज्य के अन्य वन क्षेत्रों में भी लागू किया जाए, तो मानव-वन्यजीव टकराव को बड़े स्तर पर कम किया जा सकता है। इससे न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि ग्रामीणों का जीवन भी सुरक्षित और स्थिर बनेगा।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लागू की गई नई व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि सही योजना, तकनीक और स्थानीय सहयोग से मानव-वन्यजीव टकराव जैसी गंभीर समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। आने वाले समय में यह मॉडल देश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है।

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