विश्व शांति और मानव कल्याण की दिशा में नई पहल
रायपुर। विश्व शांति, मानव कल्याण और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रायपुर से डोंगरगढ़ (कलवारी पहाड़) तक चार दिवसीय क्रूसमार्ग पदयात्रा का भव्य शुभारंभ किया गया। यह पदयात्रा कुसमार्ग पदयात्रा आयोजन समिति के तत्वावधान में आयोजित की जा रही है, जिसमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
यह पदयात्रा रायपुर स्थित संत जोसेफ महागिरजाघर, बैजनाथ बाजार से प्रारंभ हुई। कार्यक्रम का नेतृत्व परम श्रद्धेय आर्च बिशप रेव. डॉ. विक्टर हेनरी ठाकुर द्वारा किया गया। उनके साथ रेव. फादर सेबेस्टियन (वी.जी.), रेव. फादर जॉन सेवियर, रेव. फादर मानी, रेव. फादर क्रोस्लिन, रेव. फादर एरॉन मरिया जोसेफ सहित अन्य धर्मगुरु उपस्थित रहे।
पदयात्रा के शुभारंभ अवसर पर प्रभु यीशु मसीह के क्रूसमार्ग के प्रथम स्थान की विशेष विनती प्रार्थना की गई। इस दौरान मुख्य प्रार्थना में उपदेशक सर्जियस मिन्ज, दिलप्रीत सिंह चड्ढा, गुरप्रीत जॉर्ज और मार्गदर्शक एस.एस. तिग्गा, सिल्वेस्टर एक्का तथा कानूनी सलाहकार विकास भास्कर भी शामिल रहे।
इस पदयात्रा में पास्टर रेव. अनिल कुमार, पास्टर रेव. सिमोन पातरास, पास्टर केदार मित्तल के साथ-साथ गुरविंदर सिंह चड्ढा, विजय रविकांत रुण्डा, प्रणव टोप्पो, नितेश केरकेट्टा, येसु पॉल, अविनाश नियाल, पीटर खाखा, प्रदीप तिर्की, सुनील जॉन, अजय चतुर्वेदी, अमित किंदो, एलेक्स, अनिल पॉल, जॉन कुल्लू, अल्बर्ट, एलन, आशीष और कुमुदिनी मसीह सहित अनेक श्रद्धालु शामिल हुए।
पहले दिन दुर्ग जिले में विश्राम
पदयात्रा रायपुर से शुरू होकर टाटीबंध, कुम्हारी, चरौदा, भिलाई पावर हाउस, सुपेला, सेक्टर-6 और गोल्फ चौक से होते हुए दुर्ग जिले पहुंची। पहले दिन श्रद्धालुओं ने संत विन्सेंट डी पॉल चर्च, दुर्ग में रात्रि विश्राम किया। यहां विश्व शांति, मानव कल्याण और आपसी भाईचारे के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई।
दूसरे दिन राजनांदगांव में प्रार्थना
दूसरे दिन 25 मार्च 2026 को सुबह 6 बजे पदयात्रा पुनः प्रारंभ हुई। श्रद्धालु अंजोरा और सोमनी होते हुए संत जॉन बैपटिस्ट चर्च, राजनांदगांव पहुंचे। यहां विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जिसमें समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता बनाए रखने का संदेश दिया गया।
तीसरे दिन डोंगरगढ़ पहुंचेंगे श्रद्धालु
तीसरे दिन 26 मार्च को सुबह पदयात्रा आगे बढ़ेगी और विभिन्न स्थानों से गुजरते हुए शाम लगभग 8 बजे कलवारी पहाड़, डोंगरगढ़ पहुंचेगी। यहां श्रद्धालु विश्व शांति, मानव कल्याण और छत्तीसगढ़ राज्य की सुख-समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना करेंगे और रात्रि विश्राम करेंगे।
चौथे दिन 14 स्थलों पर होगी विशेष प्रार्थना
चौथे दिन 27 मार्च 2026 को सभी यात्री एकत्र होकर अपने हाथों में पवित्र क्रूस लेकर प्रभु यीशु मसीह के क्रूस मार्ग के 14 स्थलों पर प्रार्थना करेंगे। इस दौरान विशेष मिस्सा बलिदान पूजा विधि का आयोजन किया जाएगा, जिसके मुख्य याजक आर्च बिशप रेव. डॉ. विक्टर हेनरी ठाकुर होंगे। उनके साथ रेव. फादर विपिन मिन्ज, सुपीरियर पल्लोथी समाज एवं अन्य धर्मपुरोहित भी उपस्थित रहेंगे।
इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालु अपनी प्रार्थनाएं और निवेदन पत्र मुख्य याजक को समर्पित करेंगे। यह आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
400 से 450 श्रद्धालुओं की भागीदारी
आयोजन समिति के संयोजक गुरविंदर सिंह चड्ढा ने बताया कि इस पदयात्रा में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से लगभग 400 से 450 श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। यह संख्या समाज में शांति और भाईचारे के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है।
उन्होंने मीडिया और आम जनता से अपील की है कि इस पदयात्रा को अधिक से अधिक प्रचारित करें और इसके संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग दें।
समाज में एकता और सद्भाव का संदेश
यह पदयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में एकता, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। वर्तमान समय में जब समाज विभिन्न चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे में इस प्रकार के आयोजन सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को एकजुट करते हैं।
पदयात्रा के दौरान श्रद्धालु अनुशासन, श्रद्धा और समर्पण के साथ आगे बढ़ रहे हैं। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों द्वारा उनका स्वागत किया जा रहा है, जिससे यह यात्रा सामाजिक समरसता का प्रतीक बनती जा रही है।
निष्कर्ष
रायपुर से डोंगरगढ़ तक आयोजित यह क्रूसमार्ग पदयात्रा विश्व शांति, मानव कल्याण और सामाजिक एकता का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। इसमें शामिल श्रद्धालु न केवल अपनी धार्मिक आस्था को व्यक्त कर रहे हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश भी दे रहे हैं।
यदि इस प्रकार के आयोजन लगातार होते रहें, तो यह समाज में भाईचारे, सद्भाव और शांति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह पदयात्रा निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ में सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरूकता का एक नया अध्याय लिखेगी।
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