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राजनांदगांव में गो आरोग्यम केंद्र का शुभारंभ

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राजनांदगांव में गो आरोग्यम केंद्र का शुभारंभ
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में गौ संरक्षण और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। शहर के मोहारा क्षेत्र में आधुनिक ‘गो आरोग्यम केंद्र’ का शुभारंभ किया गया है, जहां बीमार, घायल और लावारिस गोवंश का इलाज और देखभाल की जाएगी। यह केंद्र न केवल पशु कल्याण के लिए एक बड़ी सुविधा है, बल्कि समाज में गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।

15 हजार वर्गफीट में बना आधुनिक केंद्र

यह गो आरोग्यम केंद्र लगभग 15,000 वर्गफीट क्षेत्र में विकसित किया गया है, जहां गोवंश के उपचार और देखभाल के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

केंद्र में घायल और बीमार गायों के लिए अलग-अलग सेक्शन बनाए गए हैं, ताकि उन्हें बेहतर इलाज और आराम मिल सके। इसके अलावा, यहां साफ-सफाई और स्वच्छ वातावरण पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।

बीमार और घायल गोवंश को मिलेगा उपचार

इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां बीमार, दुर्घटनाग्रस्त और लावारिस गोवंश का मुफ्त इलाज किया जाएगा।

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यहां 24 घंटे पशु चिकित्सकों की उपलब्धता रहेगी, जो गोवंश की नियमित जांच और उपचार करेंगे। साथ ही, पशुओं के लिए दवाइयों, भोजन और आश्रय की भी पूरी व्यवस्था की गई है।

विशेष रूप से सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले मवेशियों को यहां तत्काल चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी, जिससे उनकी जान बचाई जा सके।

जीवरत्नम फाउंडेशन की पहल

इस गो आरोग्यम केंद्र की स्थापना जीवरत्नम फाउंडेशन द्वारा की गई है, जो लंबे समय से गौ सेवा और संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।

फाउंडेशन का उद्देश्य बेसहारा और पीड़ित गोवंश को सुरक्षित आश्रय देना और उनके स्वास्थ्य की देखभाल करना है। इस पहल के माध्यम से न केवल पशुओं को जीवनदान मिलेगा, बल्कि समाज में गौ सेवा के प्रति सकारात्मक संदेश भी जाएगा।

गो संरक्षण के प्रति बढ़ेगी जागरूकता

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के केंद्रों से समाज में गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

आज के समय में कई लोग गाय को दूध देने तक ही सीमित मानते हैं और बाद में उन्हें सड़कों पर छोड़ देते हैं, जिससे दुर्घटनाओं और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यह केंद्र लावारिस गोवंश के लिए सुरक्षित आश्रय साबित होगा।

पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा

इस केंद्र के माध्यम से पशु स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी। यहां गोवंश का रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिससे उनके इलाज और देखभाल को व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।

इसके अलावा, पशुपालकों को भी जागरूक किया जाएगा कि वे अपने मवेशियों की समय-समय पर जांच कराएं और उनकी उचित देखभाल करें।

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

गो आरोग्यम केंद्र के शुभारंभ अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और गौ प्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सभी ने इस पहल की सराहना की और इसे समाज के लिए उपयोगी बताया।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा पहलू

गौ संरक्षण केवल धार्मिक या सांस्कृतिक विषय नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।

गाय से मिलने वाले उत्पाद जैसे दूध, गोबर और गोमूत्र का उपयोग कृषि, औषधि और अन्य क्षेत्रों में किया जाता है। ऐसे में गोवंश की सुरक्षा और स्वास्थ्य बेहतर होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल सकता है।

भविष्य में और विस्तार की योजना

फाउंडेशन और स्थानीय प्रशासन द्वारा भविष्य में इस तरह के और केंद्र स्थापित करने की योजना भी बनाई जा रही है।

यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है, जिससे पूरे राज्य में गोवंश संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।

निष्कर्ष

राजनांदगांव में शुरू हुआ गो आरोग्यम केंद्र पशु कल्याण और गौ संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह केंद्र न केवल बीमार और बेसहारा गोवंश को नई जिंदगी देगा, बल्कि समाज में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की भावना को भी मजबूत करेगा। आने वाले समय में यह पहल राज्य में पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विकास का एक उदाहरण बन सकती है।

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