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क्या आप जानते हैं दूध के पैकेट के रंग का राज? सेहत से जुड़ी है बड़ी जानकारी

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क्या आप जानते हैं दूध के पैकेट के रंग का राज? सेहत से जुड़ी है बड़ी जानकारी
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भारत में हर घर में दूध का इस्तेमाल होता है, लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि दूध के पैकेट अलग-अलग रंगों में क्यों आते हैं? बाजार में मिलने वाले दूध के पैकेट पर नीला, हरा, नारंगी या कभी-कभी लाल और गुलाबी रंग भी दिखाई देते हैं। अधिकांश लोग इसे सिर्फ कंपनी की डिजाइन समझते हैं, लेकिन वास्तव में इन रंगों का सीधा संबंध दूध की गुणवत्ता और उसमें मौजूद फैट की मात्रा से होता है।

दूध कंपनियां ग्राहकों की सुविधा के लिए रंगों का इस्तेमाल करती हैं ताकि लोग आसानी से समझ सकें कि पैकेट में किस प्रकार का दूध है। यह रंग कोडिंग सिस्टम वर्षों से भारत में अपनाया जा रहा है और अब यह लोगों की रोजमर्रा की खरीदारी का हिस्सा बन चुका है।

नीले रंग का दूध पैकेट क्या दर्शाता है?

भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला दूध पैकेट नीले रंग का होता है। यह आमतौर पर टोंड मिल्क को दर्शाता है। टोंड दूध में लगभग 3 प्रतिशत फैट होता है। यह दूध उन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है जो संतुलित मात्रा में फैट लेना चाहते हैं।

टोंड दूध में कैल्शियम, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व मौजूद रहते हैं, लेकिन इसमें फैट कम होने के कारण यह हल्का माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना चाय, कॉफी और सामान्य उपयोग के लिए यह दूध सबसे ज्यादा खरीदा जाता है।

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हरे रंग के पैकेट का मतलब

हरे रंग का दूध पैकेट सामान्यतः स्टैंडर्डाइज्ड मिल्क को दर्शाता है। इसमें लगभग 4.5 प्रतिशत फैट पाया जाता है। यह दूध टोंड दूध की तुलना में थोड़ा अधिक गाढ़ा और क्रीमी होता है।

घर में चाय, कॉफी और बच्चों के लिए कई परिवार हरे पैकेट वाला दूध पसंद करते हैं क्योंकि इसका स्वाद ज्यादा रिच माना जाता है। डेयरी कंपनियां इस रंग का उपयोग ग्राहकों को फैट लेवल समझाने के लिए करती हैं।

नारंगी या लाल पैकेट वाला दूध

नारंगी रंग का पैकेट आमतौर पर फुल क्रीम दूध को दर्शाता है। इसमें लगभग 6 प्रतिशत या उससे अधिक फैट होता है। यह दूध सबसे ज्यादा गाढ़ा और मलाईदार माना जाता है।

मिठाई, दही, पनीर और खीर बनाने के लिए लोग फुल क्रीम दूध का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। बच्चों और ज्यादा ऊर्जा की जरूरत वाले लोगों के लिए भी यह दूध उपयोगी माना जाता है। हालांकि, वजन नियंत्रित करने वाले लोगों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है।

गुलाबी या मैजेंटा रंग का पैकेट

कुछ डेयरी कंपनियां डबल टोंड मिल्क के लिए गुलाबी या मैजेंटा रंग का इस्तेमाल करती हैं। इसमें फैट की मात्रा लगभग 1.5 प्रतिशत होती है। यह दूध उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है जो कम फैट वाला आहार लेना चाहते हैं।

हृदय रोग, वजन नियंत्रण और फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोग डबल टोंड दूध को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि इसमें फैट कम होता है, लेकिन कैल्शियम और प्रोटीन जैसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद रहते हैं।

आखिर रंगों की जरूरत क्यों पड़ी?

भारत जैसे बड़े देश में हर दिन करोड़ों लोग दूध खरीदते हैं। ऐसे में हर ग्राहक लेबल पढ़कर दूध चुने, यह संभव नहीं होता। इसी कारण डेयरी कंपनियों ने रंगों के जरिए दूध की पहचान आसान बनाई।

विशेषज्ञों के मुताबिक रंगों की यह प्रणाली भाषा और साक्षरता की बाधा भी खत्म करती है। गांव हो या शहर, लोग आसानी से “नीला पैकेट” या “हरा पैकेट” कहकर अपनी पसंद का दूध खरीद लेते हैं।

क्या पैकेट का रंग दूध की गुणवत्ता बताता है?

कई लोगों को लगता है कि गहरे रंग वाला दूध ज्यादा अच्छा होता है, लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। पैकेट का रंग केवल दूध के प्रकार और फैट प्रतिशत को दर्शाता है, गुणवत्ता को नहीं।

दूध की गुणवत्ता उसकी प्रोसेसिंग, स्वच्छता और पोषण पर निर्भर करती है। इसलिए अपनी जरूरत और स्वास्थ्य के अनुसार सही दूध चुनना ज्यादा जरूरी है।

कौन-सा दूध सबसे बेहतर?

विशेषज्ञों के अनुसार “सबसे अच्छा दूध” व्यक्ति की जरूरत पर निर्भर करता है। बच्चों और ज्यादा ऊर्जा की जरूरत वाले लोगों के लिए फुल क्रीम दूध बेहतर हो सकता है, जबकि फिटनेस और वजन नियंत्रण पर ध्यान देने वाले लोग टोंड या डबल टोंड दूध चुन सकते हैं।

इसलिए अगली बार जब आप दूध खरीदने जाएं तो पैकेट के रंग को ध्यान से देखें, क्योंकि वही रंग आपको बताएगा कि आपके लिए कौन-सा दूध सही है।

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