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वैष्णो देवी यात्रा: छठे दिन भी स्थगित, कटड़ा में हजारों श्रद्धालु प्रतीक्षारत

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वैष्णो देवी यात्रा: छठे दिन भी स्थगित, कटड़ा में हजारों श्रद्धालु प्रतीक्षारत
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जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध तीर्थस्थल माता वैष्णो देवी की यात्रा लगातार छठे दिन भी स्थगित रही, जिससे कटड़ा में हजारों श्रद्धालु फंसे हुए हैं और माता के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भारी बारिश, भूस्खलन और यात्रा मार्गों पर हुए व्यापक नुकसान के कारण श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है। पिछले कुछ दिनों से त्रिकुटा पर्वत और आसपास के क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जिसके चलते नया ताराकोट मार्ग और पुराना पारंपरिक मार्ग दोनों बंद कर दिए गए हैं। प्रशासन और श्राइन बोर्ड के अधिकारी लगातार स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं, लेकिन मौसम में सुधार न होने और क्षतिग्रस्त मार्गों की मरम्मत के जटिल कार्य के कारण यात्रा शुरू होने में अभी और समय लगने की संभावना है।

यात्रा निलंबन का मुख्य कारण

माता वैष्णो देवी की यात्रा के निलंबन का प्राथमिक कारण त्रिकुटा पर्वत पर हुई अप्रत्याशित भारी बारिश और इसके परिणामस्वरूप हुए कई भूस्खलन हैं। लगातार बारिश ने मिट्टी को ढीला कर दिया है, जिससे पहाड़ों से बड़े-बड़े पत्थर और मलबा गिर रहा है, जिसने यात्रा मार्गों को अवरुद्ध कर दिया है। विशेष रूप से, भूमिका मंदिर के पास और पंचवटी ट्रैक पर बड़े पैमाने पर भूस्खलन की सूचना मिली है, जहाँ पत्थरों का एक बड़ा हिस्सा नीचे आ गिरा है। इसके अतिरिक्त, प्राप्त जानकारी के अनुसार पुरानी गुफा के पास एक महत्वपूर्ण पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है, जो तीर्थयात्रियों की आवाजाही के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी था। इन सभी घटनाओं ने यात्रा को अत्यंत असुरक्षित बना दिया है।

श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है और क्षतिग्रस्त ढाँचों की मरम्मत के लिए इंजीनियरों की टीमें मौके पर मौजूद हैं। मार्ग पर फिसलन और पत्थरों के गिरने का खतरा अभी भी बना हुआ है, जिसके कारण यात्रा को फिर से शुरू करने का निर्णय अभी तक नहीं लिया जा सका है। जम्मू-कश्मीर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी स्थिति पर पैनी नज़र रखे हुए है और सभी आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है।

कटड़ा में श्रद्धालुओं का इंतजार और व्यवस्थाएं

यात्रा स्थगित होने के कारण हजारों श्रद्धालु पिछले कई दिनों से कटड़ा में ही रुके हुए हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से आए ये श्रद्धालु माता के दर्शन की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन खराब मौसम और बंद मार्गों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। हालांकि, अधिकांश श्रद्धालु प्रशासन के निर्णय को समझते हैं और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए धैर्य बनाए हुए हैं। कटड़ा में श्रद्धालुओं के लिए स्थानीय प्रशासन, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड और कई स्वयंसेवी संगठनों द्वारा भोजन और आश्रय की पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई हैं। जगह-जगह भंडारे और लंगर चलाए जा रहे हैं, जहाँ तीर्थयात्रियों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

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स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्हें नियमित रूप से यात्रा की स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है और उनसे अनुरोध किया गया है कि वे सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। कटड़ा के होटल और धर्मशालाएं श्रद्धालुओं से भरी हुई हैं, और स्थानीय व्यापारियों ने भी इस मुश्किल घड़ी में तीर्थयात्रियों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। यह स्थिति न केवल श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण है, बल्कि कटड़ा की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है, जो मुख्य रूप से पर्यटन पर निर्भर करती है।

मार्ग बहाली के प्रयास और मौसम की चेतावनी

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड और स्थानीय प्रशासन की टीमें युद्धस्तर पर क्षतिग्रस्त मार्गों की बहाली और मलबे को हटाने के काम में जुटी हुई हैं। भारी मशीनरी और सैकड़ों मजदूरों को भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है ताकि जल्द से जल्द मार्गों को साफ किया जा सके। हालांकि, त्रिकुटा पर्वत पर लगातार हो रही बारिश और खराब मौसम बचाव कार्यों में बाधा डाल रहा है। सुरक्षा कारणों से, कर्मचारियों को भी अत्यधिक सावधानी बरतनी पड़ रही है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

इसी बीच, मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटों के लिए जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में और अधिक बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो सकती है। यह चेतावनी मार्ग बहाली के प्रयासों को धीमा कर रही है और यात्रा को फिर से शुरू करने के निर्णय को प्रभावित कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी मार्ग पूरी तरह से सुरक्षित घोषित नहीं हो जाते और मौसम में उल्लेखनीय सुधार नहीं होता, तब तक यात्रा शुरू नहीं की जाएगी। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चट्टानों को स्थिर करने और क्षतिग्रस्त ढाँचों की मरम्मत जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्राथमिकता पर हैं। श्राइन बोर्ड लगातार विशेषज्ञों के साथ परामर्श कर रहा है ताकि यात्रा को सुरक्षित रूप से फिर से शुरू करने के लिए सर्वोत्तम रणनीति तैयार की जा सके।

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