जेट फ्यूल संकट के कारण उड़ानों पर असर, कैथे पैसिफिक ने काटी फ्लाइट्स – यात्रियों पर पड़ेगा असर
वैश्विक स्तर पर बढ़ते जेट फ्यूल संकट का असर अब एयरलाइंस के संचालन पर साफ दिखाई देने लगा है। हांगकांग की प्रमुख एयरलाइन कैथे पैसिफिक ने बढ़ती ईंधन कीमतों और सप्लाई संकट के चलते अपनी कई उड़ानों में कटौती करने का बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले का सीधा असर हजारों यात्रियों पर पड़ने की संभावना है, खासकर एशिया और लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एयरलाइन मई से जून 2026 के बीच अपनी कुल निर्धारित यात्री उड़ानों में करीब 2% की कटौती करेगी। यह कटौती 16 मई से 30 जून के बीच लागू रहेगी। इसके साथ ही कंपनी की लो-कॉस्ट सहायक एयरलाइन HK Express भी लगभग 6% उड़ानों को कम करेगी।
जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल
इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण जेट फ्यूल की कीमतों में तेजी से हुआ इजाफा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जेट फ्यूल की कीमतें कुछ ही हफ्तों में लगभग दोगुनी हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी में जहां कीमत करीब 99 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं अप्रैल तक यह बढ़कर 200 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।
इस तेजी की मुख्य वजह मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष है, जिसने वैश्विक तेल सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के बाधित होने से तेल और ईंधन की आपूर्ति पर भारी असर पड़ा है।
किन रूट्स पर पड़ेगा असर
कैथे पैसिफिक की उड़ान कटौती का असर मुख्य रूप से क्षेत्रीय (रीजनल) रूट्स पर देखा जाएगा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण एशिया और कुछ अफ्रीकी रूट्स पर भी सीमित प्रभाव पड़ेगा।
साथ ही, कंपनी ने दुबई और रियाद जैसी मध्य पूर्व की उड़ानों को जून के अंत तक स्थगित रखने का फैसला किया है।
हालांकि एयरलाइन का कहना है कि यह कदम “आखिरी विकल्प” के तौर पर उठाया गया है, ताकि बढ़ती लागत को नियंत्रित किया जा सके।
यात्रियों के लिए क्या होगा असर
उड़ानों में कटौती का सबसे बड़ा असर यात्रियों पर पड़ेगा। जिन यात्रियों की फ्लाइट रद्द होगी, उन्हें एयरलाइन द्वारा 24 घंटे के भीतर वैकल्पिक उड़ान देने की कोशिश की जाएगी।
फिर भी, इस दौरान टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी और सीटों की उपलब्धता में कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
सिर्फ कैथे पैसिफिक ही नहीं, कई एयरलाइंस प्रभावित
यह संकट केवल एक एयरलाइन तक सीमित नहीं है। दुनिया भर की कई बड़ी एयरलाइंस जेट फ्यूल की महंगाई से जूझ रही हैं।
- एयर न्यूजीलैंड ने भी अपनी लगभग 5% उड़ानें घटाने की योजना बनाई है
- स्कैंडिनेवियन एयरलाइंस (SAS) ने 1000 से ज्यादा उड़ानें रद्द की हैं
- यूनाइटेड एयरलाइंस ने भी 2026 में उड़ानों में कटौती का संकेत दिया है
इसके अलावा कई एयरलाइंस ने टिकट कीमतों में बढ़ोतरी और फ्यूल सरचार्ज लागू करना शुरू कर दिया है।
आने वाले समय में और बढ़ सकती हैं दिक्कतें
एविएशन इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि जेट फ्यूल सप्लाई की स्थिति जल्द सामान्य होने वाली नहीं है। भले ही कुछ क्षेत्रों में संघर्ष कम हो जाए, लेकिन रिफाइनरी और सप्लाई चेन को पूरी तरह बहाल होने में कई महीने लग सकते हैं।
इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में भी यात्रियों को महंगी फ्लाइट टिकट, कम उपलब्धता और उड़ान रद्द होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
भविष्य की रणनीति
इन चुनौतियों के बावजूद कैथे पैसिफिक ने अपने दीर्घकालिक विस्तार योजनाओं को बरकरार रखा है। कंपनी का लक्ष्य 2026 में कुल यात्री क्षमता को 10% तक बढ़ाना है, खासकर यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे लंबी दूरी के बाजारों में।
हालांकि यह भी स्पष्ट है कि यदि ईंधन संकट लंबा खिंचता है, तो एयरलाइंस को और सख्त फैसले लेने पड़ सकते हैं।
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