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CBSE कक्षा 9 में त्रि-भाषा अनिवार्य: जुलाई 2026 से, तीसरी की बोर्ड परीक्षा नहीं

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CBSE कक्षा 9 में त्रि-भाषा अनिवार्य: जुलाई 2026 से, तीसरी की बोर्ड परीक्षा नहीं
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🔴 ब्रेकिंग न्यूज़।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने देश की भाषाई विविधता को बढ़ावा देने और छात्रों में बहुभाषी कौशल विकसित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बोर्ड ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए जुलाई 1, 2026 से त्रि-भाषा नियम अनिवार्य कर दिया है। इस नए नियम के तहत, विद्यार्थियों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिनमें से कम से कम दो भाषाएँ मूल भारतीय भाषाएँ होनी चाहिए। यह महत्वपूर्ण बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य भारतीय शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और व्यापक बनाना है। CBSE ने 15 मई को जारी एक सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 में तीसरी भाषा (R3) के लिए कोई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी, जिससे छात्रों पर से परीक्षा का अनावश्यक दबाव कम हो सके और वे भाषा सीखने की प्रक्रिया का अधिक आनंद ले सकें।

त्रि-भाषा नियम की मुख्य बातें और संरचना

CBSE द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, त्रि-भाषा संरचना के तहत स्कूलों को अपनी अनुमोदित सूची से कोई भी भाषा प्रदान करने की अनुमति होगी, लेकिन यह अनिवार्य है कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएँ हों। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि छात्र अपनी मातृभाषा या किसी अन्य भारतीय भाषा के साथ-साथ एक और भारतीय भाषा का अध्ययन करें, जिससे देश की समृद्ध भाषाई विरासत का संरक्षण और संवर्धन हो सके। विदेशी भाषाएँ, जैसे फ्रेंच, जर्मन या स्पेनिश, केवल तीसरी भाषा के रूप में चुनी जा सकती हैं, बशर्ते पहली दो भाषाएँ भारतीय हों। यदि कोई स्कूल चाहे तो विदेशी भाषा को वैकल्पिक चौथी भाषा के रूप में भी पेश कर सकता है, यदि उसकी स्कूल संरचना इसकी अनुमति देती है।

इस नियम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कक्षा 10 में तीसरी भाषा (R3) के लिए कोई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। इसके बजाय, तीसरी भाषा का मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल-आधारित और आंतरिक होगा। छात्रों का तीसरी भाषा में प्रदर्शन CBSE प्रमाण पत्र में दर्शाया जाएगा, लेकिन इसका उपयोग उन्हें कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने से रोकने के लिए नहीं किया जाएगा। यह कदम छात्रों को नई भाषा सीखने के लिए प्रेरित करेगा और उन्हें परीक्षा के दबाव के बिना अपनी भाषाई क्षमताओं को विकसित करने का अवसर देगा। यह नीति NEP 2020 के उस दर्शन को दर्शाती है जो रटने की बजाय समझने और कौशल विकास पर जोर देता है।

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क्रियान्वयन और चुनौतियों का समाधान

CBSE ने इस नए त्रि-भाषा नियम के सुचारू क्रियान्वयन के लिए अंतरिम समाधान भी सुझाए हैं। जुलाई 1, 2026 से कक्षा 9 में इस नियम को लागू करने के लिए, बोर्ड ने स्कूलों को तीसरी भाषा के लिए अस्थायी रूप से कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करने की अनुमति दी है, जब तक कि माध्यमिक स्तर के लिए नई और अद्यतन पाठ्यपुस्तकें पेश नहीं की जातीं। इसके अतिरिक्त, स्कूलों को यह भी प्रोत्साहित किया गया है कि वे भाषा सीखने में सहायता के लिए स्थानीय या राज्य साहित्य को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करें। यह छात्रों को अपनी क्षेत्रीय संस्कृति और साहित्य से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा।

भाषा शिक्षकों की कमी, जो कि कई स्कूलों के लिए एक वास्तविक चुनौती हो सकती है, को संबोधित करने के लिए CBSE ने कई लचीले उपाय सुझाए हैं। इनमें स्कूलों के बीच संसाधनों को साझा करना, वर्चुअल कक्षाओं का आयोजन करना और सेवानिवृत्त शिक्षकों या योग्य स्नातकोत्तरों को शामिल करना शामिल है। ये उपाय सुनिश्चित करेंगे कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण भाषा शिक्षा मिले, भले ही स्कूलों को शिक्षकों की उपलब्धता में चुनौतियों का सामना करना पड़े। यह लचीलापन विशेष रूप से ग्रामीण या दूरदराज के क्षेत्रों के स्कूलों के लिए महत्वपूर्ण है जहां योग्य भाषा शिक्षकों को ढूंढना मुश्किल हो सकता है। यह बोर्ड का दूरदर्शी कदम है जो जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए नीति को व्यावहारिक बनाता है।

छात्रों और स्कूलों पर दूरगामी प्रभाव

CBSE के इस त्रि-भाषा नियम का छात्रों और स्कूलों पर सकारात्मक और दूरगामी प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। छात्रों में बहुभाषी कौशल विकसित होने से उनके संज्ञानात्मक विकास में वृद्धि होगी और उन्हें भविष्य में बेहतर करियर के अवसर मिल सकते हैं। विभिन्न भाषाओं को सीखने से छात्रों की सांस्कृतिक समझ भी बढ़ेगी, जिससे वे एक अधिक विविध और वैश्विक समाज में बेहतर ढंग से समायोजित हो पाएंगे। NEP 2020 का एक प्रमुख उद्देश्य छात्रों को भारत की विविध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है, और यह नियम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन में भी मदद करेगा, जिससे देश की भाषाई विविधता को बल मिलेगा।

हालांकि, स्कूलों को इस बड़े बदलाव को लागू करने में कुछ प्रारंभिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसमें शिक्षकों की उपलब्धता, नई पाठ्यपुस्तक सामग्री का विकास और मूल्यांकन प्रणालियों को समायोजित करना शामिल है। CBSE ने इन चुनौतियों को समझते हुए, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN), भारत के बाहर के स्कूलों और भारत लौटने वाले विदेशी छात्रों के लिए मामले-दर-मामले आधार पर छूट प्रदान करने का भी प्रावधान किया है। यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी छात्र को भाषा सीखने की आवश्यकता के कारण अनुचित कठिनाई का सामना न करना पड़े, जिससे यह नीति और अधिक समावेशी और न्यायसंगत बन सके। यह नीति भारत को एक बहुभाषी राष्ट्र के रूप में मजबूत करने और छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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