दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज' भारत के बाद अब विदेशों में भी बैन, विवाद गहराया
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मनोरंजन डेस्क, नई दिल्ली। बहुप्रतीक्षित फिल्म 'सतलुज', जिसमें अभिनेता दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में हैं, भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्ट्रीमिंग सेवाओं से गायब हो गई है। यह घटनाक्रम 10 जुलाई, 2026 को सामने आया, जब फिल्म को वैश्विक लाइब्रेरी से हटा लिया गया, जिससे इसके इर्द-गिर्द का विवाद और गहरा गया है। यह फिल्म पंजाब में उग्रवाद के दौर में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के साहसिक संघर्ष को दर्शाती है, जिन्होंने कथित फर्जी मुठभेड़ों और बड़े पैमाने पर हुए गैर-कानूनी अंतिम संस्कारों के खिलाफ आवाज उठाई थी। फिल्म को पहले 3 जुलाई, 2026 को जी5 पर रिलीज किया गया था, लेकिन भारत में दो दिनों के भीतर ही इसे हटा लिया गया था, जिसके बाद अब अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध ने प्रशंसकों और फिल्म निर्माताओं दोनों के बीच गहरी निराशा पैदा कर दी है।
भारत से अंतरराष्ट्रीय मंच तक प्रतिबंध
दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' ने रिलीज के साथ ही दर्शकों और आलोचकों का ध्यान खींचा था। 3 जुलाई, 2026 को जी5 पर रिलीज होने के बाद, फिल्म को सोशल मीडिया पर अच्छी चर्चा मिली थी। हालांकि, यह खुशी अल्पकालिक रही, क्योंकि भारत में दो दिनों के भीतर, यानी 5 जुलाई, 2026 को, बिना किसी स्पष्टीकरण के इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस अचानक हुई कार्रवाई ने प्रशंसकों को हैरान कर दिया और फिल्म के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गईं। अब, भारत में इसके हटाए जाने के एक हफ्ते बाद, यानी 10 जुलाई, 2026 को, यह खबर आई है कि फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की है, जिससे फिल्म पर प्रतिबंध का दायरा वैश्विक हो गया है। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से फिल्म के गायब होने के कुछ दिनों बाद ही, इसकी आईएमडीबी (IMDb) यूजर रेटिंग भी हटा दी गई थी, जो इस विवाद की गंभीरता को और बढ़ाती है।
सेंसर बोर्ड की आपत्तियां और TIFF रद्द होना
'सतलुज' फिल्म का विवाद रिलीज से काफी पहले ही शुरू हो गया था। मूल रूप से 'पंजाब 95' शीर्षक वाली इस फिल्म को 2022 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था। हालांकि, सेंसर बोर्ड ने अब तक इसे मंजूरी का प्रमाणपत्र जारी नहीं किया है। फिल्म निर्माताओं ने पहले आरोप लगाया था कि CBFC ने फिल्म में 127 कट लगाने की मांग की थी, जिसे वे अत्यधिक और अनुचित मानते थे। इन बाधाओं के बावजूद, फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली थी और इसे 2023 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में प्रदर्शित किया जाना था। लेकिन, भारतीय अधिकारियों की आपत्तियों के बाद, TIFF में इसकी स्क्रीनिंग भी रद्द कर दी गई थी। इन लगातार चुनौतियों ने फिल्म के रिलीज होने की राह को बेहद मुश्किल बना दिया था, और अब ओटीटी प्लेटफॉर्म से इसके हटाए जाने से यह अनिश्चितता और बढ़ गई है।
फिल्म का विषय और गहराता विवाद
'सतलुज' फिल्म का केंद्रबिंदु मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा का जीवन और संघर्ष है। यह फिल्म पंजाब में 1980 और 1990 के दशक के उग्रवाद के दौर को दर्शाती है, जब खालरा ने कथित फर्जी मुठभेड़ों और बड़े पैमाने पर किए गए गैर-कानूनी अंतिम संस्कारों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण लड़ाई लड़ी थी। इस संवेदनशील और विवादास्पद विषयवस्तु ने फिल्म को शुरू से ही सेंसर बोर्ड और कुछ वर्गों की आपत्तियों का सामना करना पड़ा। फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ कंवलजीत सिंह, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहलयान जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण कहानी को पर्दे पर लाने का प्रयास किया है। फिल्म का यह संवेदनशील विषय ही इसके बैन का मुख्य कारण माना जा रहा है, और यही कारण है कि यह विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
प्रशंसकों की प्रतिक्रिया और भविष्य की अनिश्चितता
फिल्म 'सतलुज' पर लगे प्रतिबंध ने प्रशंसकों के बीच गहरी नाराजगी पैदा की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर कई यूजर्स ने इस प्रतिबंध को लेकर अपनी आवाज उठाई है। कुछ लोगों ने लिखा है कि "हर जगह इस पर बैन लगाकर लोग इसे और ज्यादा मशहूर बना रहे हैं।" एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, "मेरे कुछ गैर-पंजाबी दोस्त ऐसे हैं जिन्हें इस फिल्म के बारे में बैन लगने के बाद ही पता चला, और अब वो इसी वजह से इसे देख रहे हैं।" यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि प्रतिबंध अक्सर किसी कृति के प्रति जिज्ञासा को बढ़ा देता है। एक यूजर ने फिल्म के अनुपलब्ध होने की पुष्टि करते हुए लिखा, "अभी मैंने भी चेक किया, हां अब ये उपलब्ध नहीं है।" प्रशंसकों का मानना है कि एक बार रिलीज हो चुकी फिल्म को रोकना मुश्किल है, और इस पर प्रतिबंध लगाने से इसकी चर्चा और लोकप्रियता ही बढ़ेगी। 'सतलुज' का भविष्य अब अनिश्चितता के घेरे में है, और यह घटना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा कलात्मक प्रस्तुतियों पर सरकारी नियंत्रण के बीच के बढ़ते तनाव को उजागर करती है।
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