कर्मचारी संगठन ने JCM पुनर्गठन की उठाई मांग, वर्तमान प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप बदलाव आवश्यक
अखिल भारतीय राष्ट्रीय लोक सेवा कर्मचारी महासंघ (AINPSEF) ने केंद्र सर...
अखिल भारतीय राष्ट्रीय लोक सेवा कर्मचारी महासंघ (AINPSEF) ने केंद्र सरकार से संयुक्त परामर्शदात्री तंत्र (JCM) के पुनर्गठन की मांग की है, जो सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच है। महासंघ का कहना है कि यह मंच वर्तमान प्रशासनिक हकीकतों के अनुरूप नहीं है और इसे अधिक प्रतिनिधि बनाने की आवश्यकता है। हाल ही में केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को लिखे एक पत्र में, AINPSEF के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल ने इस मुद्दे पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1960 के दशक में निर्मित JCM का मौजूदा प्रतिनिधित्व ढांचा अब देश के विस्तृत प्रशासनिक तंत्र को पर्याप्त रूप से कवर नहीं करता, जिससे लाखों सरकारी कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं और उनका उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है।
JCM की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान चुनौतियां
संयुक्त परामर्शदात्री तंत्र (JCM) की स्थापना 1960 के दशक में सरकारी कर्मचारियों और सरकार के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में की गई थी। उस समय, भारत सरकार लगभग 35-45 मंत्रालयों और अपेक्षाकृत सीमित प्रशासनिक ढांचे के माध्यम से कार्य करती थी। यह ढांचा उस समय की प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप था, और इसने सरकार तथा कर्मचारियों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाने में मदद की। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में, केंद्र सरकार का विस्तार अभूतपूर्व रहा है और इसमें व्यापक परिवर्तन आए हैं।
आज, केंद्र सरकार 50 से अधिक मंत्रालयों के साथ-साथ अनगिनत विभागों, स्वायत्त संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों, तकनीकी निकायों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के माध्यम से कार्य करती है। मनजीत सिंह पटेल ने अपने पत्र में जोर दिया कि इस बड़े प्रशासनिक विस्तार के बावजूद, JCM की प्रतिनिधि संरचना अभी भी काफी हद तक 1966 के ऐतिहासिक ढांचे पर ही आधारित है। परिणामस्वरूप, कई मंत्रालय, क्षेत्र और केंद्र शासित प्रशासनिक पारिस्थितिकी तंत्र वर्तमान JCM संरचना के भीतर या तो अत्यधिक अपर्याप्त प्रतिनिधित्व प्राप्त करते हैं या बिल्कुल भी प्रतिनिधित्व नहीं पाते हैं। यह स्थिति प्रभावी परामर्श और सहभागी शासन के सिद्धांतों के खिलाफ है, और यह सुनिश्चित करती है कि कई कर्मचारी अपनी चिंताओं और सुझावों को उचित मंच पर नहीं रख पाते हैं।
व्यापक प्रतिनिधित्व और समावेशी प्रशासन की आवश्यकता
AINPSEF ने सरकार से वर्तमान शासन की वास्तविकताओं और प्रशासनिक विस्तार के अनुसार JCM संरचना का विस्तार/पुनर्गठन करने का आग्रह किया है। महासंघ का मानना है कि प्रशासनिक आधुनिकीकरण के साथ-साथ समावेशी परामर्श भी होना चाहिए, ताकि केंद्र सरकार के प्रशासनिक ढांचे के तहत आने वाले सभी प्रमुख क्षेत्रों को संस्थागत संवाद तंत्र के भीतर उचित और सार्थक भागीदारी मिल सके। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी हितधारकों की आवाज सुनी जाए और नीति निर्माण में उनका योगदान हो।
महासंघ ने सुझाव दिया है कि व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारी पक्ष से कर्मचारी प्रतिनिधियों की चक्रीय नियुक्तियों पर विचार किया जाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को समय-समय पर प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सके, जो वर्तमान में वंचित हैं। यह केवल अतिरिक्त प्रतिनिधित्व की मांग नहीं है, बल्कि भारत में सहभागी शासन, सलाहकार प्रशासन, संस्थागत समन्वय और शासन में सुगमता को मजबूत करने की दिशा में एक रचनात्मक प्रस्ताव है। AINPSEF का मानना है कि यह कदम न केवल कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाएगा बल्कि सरकारी नीतियों के कार्यान्वयन में भी अधिक दक्षता लाएगा।
केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान
AINPSEF ने विशेष रूप से उन मंत्रालयों/विभागों को संस्थागत भागीदारी प्रदान करने का आग्रह किया है, जिनमें वर्तमान में JCM ढांचे के भीतर प्रतिनिधित्व का अभाव है। एक महत्वपूर्ण मांग यह भी है कि JCM कर्मचारी पक्ष के भीतर एक 'केंद्र शासित प्रदेश कर्मचारी परिसंघ प्रतिनिधित्व ब्लॉक' बनाया जाए। इस ब्लॉक के माध्यम से, केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों के परिसंघों/महासंघों से कम से कम चार प्रतिनिधियों को JCM ढांचे में शामिल किया जाए। यह सुनिश्चित करेगा कि केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों की विशिष्ट चिंताओं और आवश्यकताओं को राष्ट्रीय स्तर पर उचित मंच पर उठाया जा सके।
इसके अतिरिक्त, महासंघ ने JCM कर्मचारी पक्ष की स्थायी समिति संरचना को भी वर्तमान प्रशासनिक वास्तविकताओं और कार्यबल के विविधीकरण के अनुसार विस्तारित और युक्तिसंगत बनाने का सुझाव दिया है। AINPSEF, जो केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य संगठनों के 13 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों का समर्थन करने का दावा करता है, का मानना है कि ये परिवर्तन न केवल JCM को मजबूत करेंगे बल्कि सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग को भी बढ़ावा देंगे। यह पहल 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत के अनुरूप है और एक अधिक समावेशी एवं प्रभावी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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