देश 8 मिनट पढ़ें

जीएसटी से मिला बढ़ावा: महाराष्ट्र भारत का शीर्ष राज्य कर योगदानकर्ता बना

16 व्यूज़
जीएसटी से मिला बढ़ावा: महाराष्ट्र भारत का शीर्ष राज्य कर योगदानकर्ता बना
देश

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (इंड-रा) द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने के बाद महाराष्ट्र भारत में राज्यों के कर राजस्व का सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा है। राज्य की उच्च घरेलू खपत और विशाल सेवा क्षेत्र ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है। 1 जुलाई, 2017 को जीएसटी प्रणाली की शुरुआत के बाद से, इसने राज्यों के कर संग्रह को मजबूत किया है और कर उछाल में उल्लेखनीय सुधार किया है, जैसा कि इंड-रा के विश्लेषण से सामने आया है। यह सुधार देश की आर्थिक संरचना में एक बड़े बदलाव का परिणाम है, जिसने महाराष्ट्र जैसे आर्थिक रूप से मजबूत राज्यों को और अधिक लाभान्वित किया है, जिससे राज्य के वित्तीय परिदृश्य में स्थिरता और वृद्धि आई है।

जीएसटी सुधार और कर उछाल में वृद्धि

जीएसटी ने भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया। 1 जुलाई, 2017 को लागू होने के बाद, इस सुधार ने 17 विभिन्न केंद्रीय और राज्य करों के साथ-साथ 13 उपकरों को एक एकीकृत प्रणाली के तहत समेकित किया। इस कदम का उद्देश्य कर ढांचे को सरल बनाना, व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देना और कर आधार का विस्तार करना था। इंड-रा की रिपोर्ट में 26 राज्यों के गहन विश्लेषण से पता चला है कि जीएसटी लागू होने के बाद कर उछाल में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी पूर्व अवधि (वित्त वर्ष 2014-वित्त वर्ष 2017) के दौरान 0.6 के मुकाबले जीएसटी लागू होने के बाद (वित्त वर्ष 2018-वित्त वर्ष 2026) के दौरान 26 राज्यों का कर उछाल बढ़कर 2.9 हो गया। इंड-रा की अर्थशास्त्री और निदेशक, मेघा अरोड़ा ने इस सुधार को राज्यों के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया। यह दर्शाता है कि आर्थिक विकास के सापेक्ष राज्यों का कर संग्रह कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जो उनके राजस्व आधार को मजबूत कर रहा है। इस उछाल ने राज्यों को अपने विकासात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए हैं, जिससे नागरिकों को सीधे लाभ हुआ है।

शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य और प्रमुख कारण

जीएसटी के बाद कर उछाल में जिन राज्यों ने सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, उनमें मणिपुर, नागालैंड, गोवा, महाराष्ट्र और सिक्किम शामिल हैं। यह सूची जीएसटी से पहले के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों से काफी भिन्न है, जहां मेघालय, बिहार, नागालैंड, छत्तीसगढ़ और मणिपुर अग्रणी थे। इंड-रा ने इस सुधार के पीछे कई प्रमुख कारणों को उजागर किया है। एजेंसी के अनुसार, अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में संरचनात्मक परिवर्तन एक महत्वपूर्ण कारक रहा है, जिसमें उत्पत्ति-आधारित उत्पादन कर से गंतव्य-आधारित खपत कर की ओर बदलाव शामिल है। यह बदलाव उन राज्यों को अधिक लाभ पहुंचाता है जिनकी खपत अधिक होती है, जैसे कि महाराष्ट्र। इसके अतिरिक्त, सेवाओं को जीएसटी ढांचे के भीतर लाना भी एक बड़ा कारण रहा है, क्योंकि सेवा क्षेत्र का अर्थव्यवस्था में योगदान लगातार बढ़ रहा है। कर चोरी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों और डिजिटल कर प्रणाली के प्रभावी कार्यान्वयन ने भी कर संग्रह दक्षता में सुधार किया है, जिससे राज्यों को उनके देय राजस्व का अधिक हिस्सा मिल रहा है। ये सभी कारक मिलकर राज्यों के लिए एक मजबूत और अधिक पारदर्शी कर प्रणाली बनाने में सहायक सिद्ध हुए हैं।

महाराष्ट्र की आर्थिक शक्ति का प्रभाव

महाराष्ट्र का भारत के शीर्ष राज्य कर योगदानकर्ता के रूप में उभरना उसकी मजबूत आर्थिक नींव और अद्वितीय विशेषताओं का प्रत्यक्ष परिणाम है। राज्य की उच्च घरेलू खपत, जो एक बड़े और संपन्न उपभोक्ता आधार को दर्शाती है, जीएसटी के तहत कर राजस्व को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चूंकि जीएसटी एक गंतव्य-आधारित कर है, इसलिए जहां वस्तुओं और सेवाओं का उपभोग होता है, वहीं कर एकत्र किया जाता है। महाराष्ट्र जैसे घनी आबादी वाले और आर्थिक रूप से सक्रिय राज्य स्वाभाविक रूप से इससे लाभान्वित होते हैं। इसके अलावा, महाराष्ट्र का विशाल सेवा क्षेत्र, जिसमें वित्तीय सेवाएं, सूचना प्रौद्योगिकी, मनोरंजन और अन्य व्यावसायिक सेवाएं शामिल हैं, ने भी इसके योगदान को बढ़ाया है। जीएसटी के तहत सेवाओं को शामिल करने से इस क्षेत्र से होने वाले राजस्व संग्रह में पारदर्शिता और दक्षता आई है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की वृद्धि धीमी होने के बावजूद, एसजीएसटी (राज्य वस्तु एवं सेवा कर) संग्रह में वृद्धि जारी रही है, जो जीएसटी प्रणाली की अंतर्निहित शक्ति और राज्य की आर्थिक लचीलेपन को दर्शाता है। जीएसटी ने राज्यों के लिए राजस्व के एक अधिक स्थिर और अनुमानित स्रोत का निर्माण किया है, जिससे उन्हें अपनी विकासात्मक परियोजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं के लिए बेहतर योजना बनाने में मदद मिली है। महाराष्ट्र का अनुभव यह दर्शाता है कि कैसे एक अच्छी तरह से डिजाइन की गई कर प्रणाली, मजबूत आर्थिक बुनियादी ढांचे वाले राज्य के साथ मिलकर, राष्ट्रीय राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल प्रस्तुत करता है कि कैसे अपनी खपत और सेवा क्षेत्रों को मजबूत करके वे अपने कर राजस्व को बढ़ा सकते हैं और समग्र राष्ट्रीय विकास में योगदान कर सकते हैं।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

टैग्स

और पढ़ें

लेखक