भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता में 22% उछाल, 297.36 GW के पार
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भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो जून 2026 में 297.36 GW के आंकड़े को पार कर गई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 22 प्रतिशत से अधिक की प्रभावशाली बढ़ोतरी है, जब यह क्षमता जून 2025 में 242.78 GW थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि देश की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की दिशा में तेजी से बढ़ते कदमों को दर्शाती है और शुक्रवार को जारी इन आंकड़ों ने ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रगति को रेखांकित किया है। इस अभूतपूर्व वृद्धि में सौर और पवन ऊर्जा का विशेष योगदान रहा है, जो देश को एक हरित और अधिक टिकाऊ भविष्य की ओर ले जा रहा है। यह उपलब्धि भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों और जलवायु परिवर्तन से निपटने की वैश्विक प्रतिबद्धता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हरित ऊर्जा की नई ऊंचाइयों
भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है, जिसकी पुष्टि नवीनतम सरकारी आंकड़ों से हुई है। जून 2026 में देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता 297.36 GW तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि, जून 2025, में दर्ज 242.78 GW की क्षमता से 22 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाती है। यह वृद्धि दर न केवल प्रभावशाली है बल्कि यह भी बताती है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के लिए कितनी गंभीरता से काम कर रहा है। इस तेजी से बढ़ते संक्रमण का सीधा असर देश के कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने पर पड़ रहा है। यह आंकड़ा भारत को वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी देशों की श्रेणी में मजबूती से स्थापित करता है। इस प्रगति से भारत की ऊर्जा सुरक्षा में भी सुधार हुआ है, क्योंकि यह विदेशी तेल और गैस पर निर्भरता को कम करता है।
सौर और पवन ऊर्जा का बढ़ता योगदान
गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता में यह वृद्धि मुख्य रूप से सौर और पवन ऊर्जा जैसे प्रमुख नवीकरणीय स्रोतों के असाधारण प्रदर्शन के कारण संभव हुई है। जून 2026 में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता बढ़कर 162.15 GW हो गई है, जो पिछले वर्ष जून 2025 में 116.25 GW थी। यह सौर ऊर्जा क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत की भारी वृद्धि को दर्शाता है, जो भारत के सौर ऊर्जा कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण है। इसी तरह, पवन ऊर्जा क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जून 2026 में पवन ऊर्जा की क्षमता 57.44 GW तक पहुंच गई है, जबकि जून 2025 में यह 51.67 GW थी। यह आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि देश की ऊर्जा मिश्रण में सौर और पवन ऊर्जा का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिल रही है। इन दोनों स्रोतों ने मिलकर भारत की ऊर्जा ग्रिड को मजबूत और अधिक लचीला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार की विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएं और नीतियां, जैसे कि उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं और नवीकरणीय ऊर्जा पार्कों का विकास, इस वृद्धि के प्रमुख चालक रहे हैं। इन प्रयासों से क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ निवेश और रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।
भारत का हरित भविष्य: मंत्री जोशी का दृष्टिकोण
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस विकास पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत का स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण अभूतपूर्व गति प्राप्त कर रहा है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, "केवल एक वर्ष में, स्थापित सौर क्षमता 116.25 GW से बढ़कर 162.15 GW हो गई है, जबकि कुल गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 242.78 GW से बढ़कर 297.36 GW हो गई है।" मंत्री जोशी ने इस उपलब्धि का श्रेय माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा, "माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित, अधिक टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए गति, पैमाने और दृढ़ संकल्प के साथ अपने स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।" यह वक्तव्य सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता और भविष्य के लिए उसकी महत्वाकांक्षी योजनाओं को दर्शाता है। भारत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्यों को प्राप्त करने और वैश्विक जलवायु कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को दृढ़ संकल्पित है। इस तरह की प्रगति न केवल देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाती है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की साख को भी मजबूत करती है। यह दिखाता है कि भारत किस प्रकार ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन साध रहा है।
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