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2026 में कमजोर पड़ सकता है मानसून, किसानों और अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

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2026 में कमजोर पड़ सकता है मानसून, किसानों और अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
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भारत में साल 2026 का मानसून सामान्य से कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग और निजी एजेंसियों के ताजा पूर्वानुमान ने देशभर में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि मानसून भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। शुरुआती आकलनों के अनुसार इस बार बारिश सामान्य से कम हो सकती है, जिसका सीधा असर खेती, जल संसाधन और महंगाई पर पड़ सकता है।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 2026 में मानसून की कुल बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) का लगभग 92% रहने का अनुमान है, जो सामान्य से कम श्रेणी में आता है। आमतौर पर 96% से 104% के बीच बारिश को सामान्य माना जाता है, लेकिन इस बार उससे नीचे रहने की संभावना जताई गई है।

अल नीनो का असर बढ़ा सकता है चिंता

इस साल मानसून पर सबसे बड़ा असर ‘अल नीनो’ का देखने को मिल सकता है। यह एक मौसमीय घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ जाता है और इसका असर भारत के मानसून पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो के कारण मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे बारिश में कमी आ सकती है।

निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार, पूरे मानसून सीजन (जून से सितंबर) में बारिश लगभग 94% रहने का अनुमान है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि मानसून सामान्य से थोड़ा कमजोर रह सकता है।

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किन इलाकों में ज्यादा असर?

पूर्वानुमान के मुताबिक मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में बारिश कम हो सकती है। खासकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और कुछ मध्य भारत के इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका है। वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अपेक्षाकृत बेहतर बारिश हो सकती है।

इस असमान वितरण का असर खेती पर साफ दिखाई देगा, क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा मानसून आधारित कृषि पर निर्भर है।

खेती और किसानों पर बड़ा असर

भारत की लगभग आधी खेती बारिश पर निर्भर करती है। ऐसे में मानसून कमजोर रहने का मतलब है कि धान, मक्का, सोयाबीन और दाल जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। जुलाई और अगस्त जैसे महत्वपूर्ण महीनों में अगर बारिश कम होती है, तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इसके अलावा, सिंचाई के लिए जलाशयों और बांधों में पानी का स्तर भी कम रह सकता है, जिससे आने वाले समय में जल संकट गहराने की आशंका बढ़ जाएगी।

महंगाई और अर्थव्यवस्था पर असर

मानसून कमजोर होने का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। कम उत्पादन के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई में इजाफा हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की स्थिति भारत की GDP ग्रोथ को भी प्रभावित करती है, क्योंकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था काफी हद तक बारिश पर निर्भर रहती है।

अभी गर्मी और लू का कहर

मानसून से पहले ही देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का असर देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है।

इस बीच कुछ राज्यों में आंधी-तूफान और हल्की बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है, जिससे अस्थायी राहत मिल सकती है।

सरकार और किसानों के लिए चेतावनी

मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान सरकार और किसानों के लिए एक तरह की चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी के बेहतर प्रबंधन, वैकल्पिक फसलों को अपनाने और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत है।

यदि समय रहते तैयारी नहीं की गई, तो कमजोर मानसून देश के कई हिस्सों में जल संकट और खाद्य संकट को जन्म दे सकता है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर 2026 का मानसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना ने कई चुनौतियों की ओर इशारा किया है। आने वाले महीनों में वास्तविक स्थिति क्या रहती है, यह तो समय बताएगा, लेकिन फिलहाल यह साफ है कि देश को इस बार मानसून को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

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लेखक
Aameen Parveen
Aameen Parveen is a reporter at Sakar Bharat, covering local news, civic issues, and ground reports with accuracy, clarity, and strong public focus.