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भारत के चीनी निर्यात प्रतिबंध से नेपाल में बढ़ी चिंता, त्योहारों से पहले सप्लाई संकट की आशंका; सरकार ने दिया स्टॉक का भरोसा

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भारत के चीनी निर्यात प्रतिबंध से नेपाल में बढ़ी चिंता, त्योहारों से पहले सप्लाई संकट की आशंका; सरकार ने दिया स्टॉक का भरोसा
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भारत सरकार द्वारा चीनी निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध का असर अब पड़ोसी देश नेपाल में दिखाई देने लगा है। भारत ने घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने और पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए सितंबर 2026 तक चीनी निर्यात पर रोक लगा दी है। इसके बाद नेपाल में चीनी की उपलब्धता और भविष्य की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि नेपाल सरकार और संबंधित एजेंसियों ने दावा किया है कि फिलहाल देश में कई महीनों का स्टॉक उपलब्ध है और तत्काल किसी संकट की स्थिति नहीं है।

नेपाल के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में चीनी की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है, लेकिन आने वाले महीनों में खासकर त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर दबाव पैदा हो सकता है। नेपाल में दशैं, तिहार और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान चीनी की खपत तेजी से बढ़ जाती है और उसी समय उत्पादन चक्र भी कमजोर पड़ता है। ऐसे में भारत की ओर से निर्यात बंद रहने पर सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

भारत ने क्यों लगाया निर्यात प्रतिबंध?

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश माना जाता है। हाल के समय में सरकार को घरेलू उत्पादन और खपत के बीच अंतर बढ़ने की आशंका हुई है। गन्ने की पैदावार में कमी, मौसम संबंधी जोखिम और एल नीनो के प्रभाव को देखते हुए सरकार ने कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया। यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा या अगली अधिसूचना तक प्रभावी रहेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने पहले चीनी मिलों को निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन बाद में उत्पादन अनुमान घटने और घरेलू जरूरत बढ़ने के कारण नीति बदल दी गई। सरकार का मानना है कि इससे देश में कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सकेगा और भविष्य के लिए पर्याप्त स्टॉक सुरक्षित रहेगा।

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नेपाल की निर्भरता बनी बड़ी चुनौती

नेपाल अपनी कुल चीनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है और इसमें भारत की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहती है। नेपाल की वार्षिक चीनी मांग लगभग 3 लाख टन बताई जाती है, जबकि घरेलू उत्पादन इससे काफी कम है। रिपोर्ट्स के अनुसार देश में हर साल करीब 1 लाख टन की कमी आयात के माध्यम से पूरी की जाती है।

नेपाल के सरकारी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल देश के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकारी एजेंसियों के अनुसार मौजूदा भंडारण अगले कई महीनों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त है और तुरंत घबराने की आवश्यकता नहीं है। कुछ रिपोर्टों में आठ महीने तक स्टॉक उपलब्ध होने का भी दावा किया गया है।

पहले भी झेल चुका है नेपाल संकट

यह पहली बार नहीं है जब भारत के निर्यात प्रतिबंध का असर नेपाल पर पड़ा हो। वर्ष 2023 में भी भारत ने चीनी निर्यात सीमित किया था, जिसके बाद नेपाल में कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं। त्योहारों के समय बाजार में चीनी की कमी देखी गई और कुछ क्षेत्रों में काला बाजारी जैसी स्थितियां भी सामने आई थीं। उस दौरान नेपाल को वैकल्पिक आयात विकल्पों पर विचार करना पड़ा था।

विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल की खाद्य सुरक्षा भारत की व्यापार नीतियों से काफी प्रभावित होती है क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध बेहद मजबूत हैं। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

त्योहारों में बढ़ सकती है चुनौती

नेपाल में सामान्य महीनों के दौरान चीनी की मांग लगभग 20 से 25 हजार टन प्रति माह रहती है, लेकिन त्योहारों के समय यह बढ़कर लगभग 30 हजार टन तक पहुंच जाती है। यदि उसी अवधि में आयात बाधित रहता है तो कीमतों पर दबाव बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत की निर्यात रोक लंबे समय तक जारी रहती है और नेपाल वैकल्पिक बाजार नहीं खोज पाता तो वर्ष के अंत तक कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। हालांकि अभी तत्काल संकट की स्थिति नहीं है।

भारत के फैसले का वैश्विक असर भी

भारत के निर्यात प्रतिबंध का असर केवल नेपाल तक सीमित नहीं है। वैश्विक बाजार में भी चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। भारत दुनिया के प्रमुख निर्यातकों में शामिल है और उसके बाजार से बाहर होने पर अन्य देशों जैसे ब्राजील और थाईलैंड को लाभ मिल सकता है।

फिलहाल नेपाल सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक आयात स्रोतों या भारत के साथ विशेष व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। लेकिन आने वाले त्योहारों और बढ़ती मांग को देखते हुए यह मुद्दा दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

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