देश 7 मिनट पढ़ें

जंतर मंतर पर नीट विरोध जारी, वांगचुक का अनशन 25वें दिन

22 व्यूज़
जंतर मंतर पर नीट विरोध जारी, वांगचुक का अनशन 25वें दिन
देश

नई दिल्ली के जंतर मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट 'पेपर' लीक मुद्दे को लेकर कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों सहित बड़ी संख्या में लोग बुधवार, 22 जुलाई, 2026 को भी विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक, जो इस मुद्दे पर अपनी भूख हड़ताल के 25वें दिन में हैं, को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है। CJP नेतृत्व ने वांगचुक से अपना अनशन तोड़ने की अपील की है, हालांकि उन्होंने यह भी कसम खाई है कि मांगें पूरी होने तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। यह आंदोलन तब और तेज हो गया जब CJP ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों, विशेष रूप से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर सहमत नहीं होती है, तो "लाखों और लोग" दिल्ली आएंगे।

विरोध प्रदर्शन और अनशन की स्थिति

जंतर मंतर पर CJP द्वारा आयोजित यह विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों और जनता के बढ़ते गुस्से को दर्शाता है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके सहित पार्टी के शीर्ष नेताओं ने सोनम वांगचुक से अपील की है कि वे अपना अनशन समाप्त करें, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया है कि जब तक उनकी मुख्य मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वांगचुक ने अनशन तोड़ने से पहले सरकार से यह "अटूट आश्वासन" मांगा है कि किसी भी युवा प्रदर्शनकारी को दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। उनका अनशन, जो अब 25वें दिन में है, देश भर में छात्रों के बीच व्याप्त निराशा का प्रतीक बन गया है। इस बीच, विरोध प्रदर्शन के लिए ऑनलाइन भोजन ऑर्डर करने वाले सैकड़ों लोगों की खबरें भी सामने आई हैं, जो इस आंदोलन को मिल रहे व्यापक जन समर्थन को दर्शाती हैं।

न्यायिक हस्तक्षेप और पुलिस कार्रवाई पर सवाल

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार, 22 जुलाई, 2026 को 20 जुलाई को संसद तक CJP के नेतृत्व वाले मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ "अत्यधिक बल" के इस्तेमाल से संबंधित याचिकाओं पर केंद्र और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह घटना से संबंधित सभी रिकॉर्ड, जिसमें सीसीटीवी फुटेज और वीडियोग्राफी (यदि कोई हो) शामिल है, को निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार संरक्षित रखे। इस विरोध मार्च के संबंध में अब तक पांच दिल्ली पुलिस स्टेशनों में कुल 10 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली एक याचिका की तत्काल सुनवाई के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। यह न्यायिक हस्तक्षेप पुलिस की कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाता है और पारदर्शिता की मांग करता है, जिससे आंदोलनकारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया

इस बीच, सरकार और विपक्ष दोनों ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम में सोनम वांगचुक से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों ने उनसे छात्रों से विश्वास बनाए रखने और आगे किसी भी तरह के तनाव से बचने की अपील करने का आग्रह किया। उन्होंने सरकार के संसद में इस मुद्दे पर बहस शुरू करने के निर्णय से भी अवगत कराया। बुधवार को, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा को सरकार की इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तत्परता के बारे में सूचित किया। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों द्वारा उठाई गई सभी मांगों का समर्थन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी मांगने की मांग की। दूसरी ओर, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन पर देश के युवाओं को "राजनीतिक उपकरण" के रूप में इस्तेमाल करने और अपने हितों को साधने के लिए "मनगढ़ंत गुस्से की भावना" पैदा करने का आरोप लगाया। यह दर्शाता है कि यह मुद्दा अब एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

आंदोलन का भविष्य और छात्रों की आकांक्षाएं

जंतर मंतर पर चल रहा यह विरोध प्रदर्शन केवल नीट परीक्षा के मुद्दे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल उठाता है। CJP और अन्य प्रदर्शनकारियों का दृढ़ संकल्प, साथ ही सोनम वांगचुक का अथक अनशन, सरकार पर तत्काल कार्रवाई करने का दबाव बढ़ा रहा है। छात्रों और उनके समर्थकों की मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। सरकार द्वारा संसद में चर्चा की पेशकश एक सकारात्मक कदम है, लेकिन प्रदर्शनकारी इससे कहीं अधिक ठोस परिणाम चाहते हैं। यह आंदोलन आने वाले समय में देश की राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है, खासकर युवाओं की आवाज को मुखर करने में।

टैग्स

और पढ़ें

लेखक